जो बीत गयी
अभ्यासमाला : सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
1. सही विकल्प का चयन करो :
(क) कवि हरिवंश राय ‘बच्चन’ का जन्म हुआ था—
(अ) सन् 1905 में
(आ) सन् 1906 में
(इ) सन् 1907 में
(ई) सन् 1908 में
उत्तर: (इ) सन् 1907 में (27 नवंबर 1907, इलाहाबाद)
(ख) कवि ने इस कविता में बीती बात को भूलकर क्या करने का संदेश दिया है ?
(अ) वर्तमान की चिंता और कर्म
(आ) भविष्य की चिंता
(इ) अतीत की चिंता
(ई) केवल सुख की चिंता
उत्तर: (अ) वर्तमान की चिंता और कर्म
(ग) निम्नलिखित में से कौन-सी कृति हरिवंश राय बच्चन जी की नहीं है ?
(अ) मधुशाला
(आ) मधुबाला
(इ) मधुकलश
(ई) गुनाहों का देवता
उत्तर: (ई) गुनाहों का देवता (यह धर्मवीर भारती की रचना है)
(घ) अपने प्रिय तारों के टूट जाने पर अंबर क्या करता है ?
(अ) रोता है
(आ) शोर मचाता है
(इ) कभी शोक नहीं मनाता
(ई) अंधकार में डूब जाता है
उत्तर: (इ) कभी शोक नहीं मनाता
(ङ) मदिरालय के प्याले किस वस्तु के बने होते हैं ?
(अ) सोने के
(आ) काँच के
(इ) मृदु (कोमल) मिट्टी के
(ई) पत्थर के
उत्तर: (इ) मृदु (कोमल) मिट्टी के
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) ‘जो बीत गई’ शीर्षक कविता के कवि कौन हैं ?
उत्तर: ‘जो बीत गई’ शीर्षक कविता के कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन हैं।
(ख) हरिवंश राय बच्चन जी का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर: हरिवंश राय बच्चन जी का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) जिले के पट्टीप्रतापगढ़ गाँव में हुआ था।
(ग) बच्चन जी ने शोध-कार्य (Ph.D.) कहाँ संपन्न किया था ?
उत्तर: बच्चन जी ने इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी कवि डब्ल्यू. बी. यीट्स पर अपना शोध-कार्य संपन्न किया था।
(घ) बच्चन जी की सबसे प्रसिद्ध एवं कालजयी काव्य-कृति कौन-सी है ?
उत्तर: बच्चन जी की सबसे प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘मधुशाला’ (1935) है।
(ङ) फूल और लताओं के सूख जाने पर कौन शोर नहीं मचाता ?
उत्तर: फूल और लताओं के सूख जाने पर मधुवन (बगीचा/उपवन) कभी शोर नहीं मचाता।
3. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 25–50 शब्दों में) :
(क) अपने प्रिय तारों के टूट जाने पर क्या अंबर कभी शोक मनाता है ?
उत्तर: नहीं, अपने अत्यंत प्रिय और जगमगाते तारों के टूट जाने या डूब जाने पर भी अंबर कभी शोक नहीं मनाता। वह शांत और निर्विकार भाव से अपने वर्तमान रूप में सुशोभित रहता है।
(ख) कवि ने ‘अंबर के आनन’ को देखने की बात क्यों की है ?
उत्तर: कवि ने ‘अंबर के आनन’ (आकाश के मुख) को देखने की बात इसलिए कही है ताकि मनुष्य उससे प्रेरणा ले सके। आकाश अपने न जाने कितने अनमोल तारों को खोकर भी शांत रहता है; उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने प्रियजनों के बिछोह पर विचलित होने के बजाय धैर्य रखना चाहिए।
(ग) हमें मधुवन और मदिरालय से क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर: मधुवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मुरझाए फूलों पर व्यर्थ रोने-धोने से वे वापस नहीं आते। मदिरालय से यह सीख मिलती है कि प्याले जैसे नश्वर साधनों के टूटने पर पश्चाताप करने के बजाय जीवन के वास्तविक आनंद और रस का उपभोग करना चाहिए।
(घ) प्यालों के टूट जाने पर मदिरालय क्यों नहीं पश्चाताप करता ?
उत्तर: मदिरालय जानता है कि प्याले मिट्टी के बने हैं और उनका जीवन अत्यंत अल्प है; मिट्टी की वस्तु का टूटना स्वाभाविक नियम है। प्याले टूटते रहते हैं, परंतु मदिरा और पीने वालों का उत्साह कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए मदिरालय कभी पश्चाताप नहीं करता।
(ङ) मधु के घट और प्यालों से किन लोगों का लगाव होता है ?
उत्तर: मधु के घट और प्यालों से उन लोगों का गहरा लगाव होता है जो सच्चे रसिक हैं और जो जीवन की क्षणभंगुरता को स्वीकार करते हुए हर हाल में आनंद और रस लूटते रहते हैं।
(च) ‘जो मादकता के मारे हैं, वे मधु लूटा ही करते हैं’— इससे कवि क्या कहना चाहते हैं ?
उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि जो लोग जीवन को उत्साह और उमंग से जीने की कला जानते हैं, वे भौतिक साधनों के नष्ट होने या दुखों की परवाह किए बिना जीवन के हर क्षण का भरपूर आनंद लेते हैं।
4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) :
(क) ‘जो बीत गई’ कविता में मानव जीवन की तुलना किन-किन उपादानों से की गई है ? सोदाहरण स्पष्ट करो।
उत्तर: ‘जो बीत गई’ कविता में कवि हरिवंश राय बच्चन ने मानव जीवन के सुख-दुख और नश्वरता की तुलना प्रकृति के तीन प्रमुख उपादानों से की है:
अंबर और तारे: मनुष्य अपने किसी प्रिय व्यक्ति को खोकर जीवन भर रोता रहता है, जबकि अंबर अपने सबसे प्रिय तारों के टूटकर विलीन होने पर भी कभी शोक नहीं मनाता।
मधुवन और फूल: उपवन में अनगिनत कोमल कलियाँ और लताएँ मुरझा जाती हैं, पर मधुवन उन सूखे फूलों के लिए कभी शोर नहीं मचाता; वह नए फूलों के साथ मुस्कुराता है।
मदिरालय और प्याले: मदिरालय के आंगन में मिट्टी के प्याले गिरकर टूटते रहते हैं, पर मदिरालय उन पर कभी विलाप नहीं करता।
इन उदाहरणों द्वारा कवि समझाते हैं कि जीवन परिवर्तनशील है; हानि-लाभ को सहज स्वीकार कर निरंतर आगे बढ़ना ही प्रकृति का नियम है।
(ख) ‘जो बीत गई’ शीर्षक कविता का मूल संदेश और भावार्थ अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर: ‘जो बीत गई’ कविता का मूल संदेश जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण और कर्मठता बनाए रखना है। कवि का कहना है कि अतीत के दुखों, असफलताओं, नुकसान और वियोग को याद करके वर्तमान को नष्ट करना मूर्खता है। जो समय बीत गया, उसे किसी भी स्थिति में वापस नहीं लाया जा सकता (“जो बीत गई सो बात गई”)।
मनुष्य का जीवन मिट्टी के प्याले के समान क्षणभंगुर है। जीवन में सुख और दुख आते-जाते रहते हैं। प्रकृति हमें सिखाती है कि चाहे कितना भी बड़ा नुकसान क्यों न हो जाए, समय कभी नहीं रुकता। अतः मनुष्य को अतीत की कड़वी स्मृतियों से मुक्त होकर पूरे उत्साह और आशा के साथ वर्तमान में जीना चाहिए और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहिए।
5. सप्रसंग व्याख्या करो :
(क) “जीवन में एक सितारा था, माना वह बेहद प्यारा था,
वह डूब गया तो डूब गया; अंबर के आनन को देखो,
कितने इसके तारे टूटे, कितने इसके प्यारे छूटे,
जो छूट गए फिर कहाँ मिले; पर बोलो टूटे तारों पर
कब अंबर शोक मनाता है? जो बीत गई सो बात गई!”
संदर्भ: प्रस्तुत काव्य-पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आलोक (भाग-2)’ में संकलित डॉ. हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित प्रेरणादायी कविता ‘जो बीत गई’ से उद्धृत हैं।
प्रसंग: यहाँ कवि ने आकाश और टूटते तारों के सजीव उदाहरण द्वारा मनुष्य को अतीत के वियोग और दुखों को भूलकर आगे बढ़ने का उपदेश दिया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि यदि तुम्हारे जीवन में कोई अत्यंत प्रिय व्यक्ति या वस्तु (सितारे के समान) थी और वह तुमसे सदा के लिए बिछड़ गई, तो उसके लिए जीवन भर विलाप करना व्यर्थ है। विशाल आकाश के मुख को देखो; उसके न जाने कितने जगमगाते तारे रोज़ टूटकर बिखर जाते हैं और जो तारे एक बार छूट जाते हैं, वे फिर कभी वापस नहीं मिलते। परंतु क्या आकाश कभी उन टूटे हुए तारों पर शोक मनाता है? कदापि नहीं! वह सदैव शांत और प्रसन्न रहता है। इसी प्रकार मनुष्य को भी अतीत के नुकसान को भूलकर वर्तमान में जीना चाहिए।
(ख) “मृदु मिट्टी के हैं बने हुए, मधु घट फूटा ही करते हैं,
लघु जीवन लेकर आए हैं, प्याले टूटा ही करते हैं,
फिर भी मदिरालय के अंदर, मधु के घट हैं, मधु प्याले हैं,
जो मादकता के मारे हैं, वे मधु लूटा ही करते हैं,
कच्चा पीने वाले हैं वे, जो रोते हैं, चिल्लाते हैं,
सच्ची मधुशाला में जाकर, कब कोई पश्चाताप किया?
जो बीत गई सो बात गई!”
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश डॉ. हरिवंश राय बच्चन विरचित कविता ‘जो बीत गई’ से लिया गया है।
प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि ने मदिरालय, घट और प्यालों के रूपक द्वारा जीवन की नश्वरता तथा सच्चे आनंद का मर्म समझाया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि शराब के घड़े और प्याले कोमल मिट्टी के बने होते हैं, जिनका स्वभाव ही टूटना है। उनका जीवन अत्यंत अल्प होता है। परंतु प्यालों के टूटने के बाद भी मदिरालय कभी सूना नहीं होता; वहाँ नए घट और नए प्याले भरते रहते हैं। जो लोग वास्तव में मदिरा (जीवन के आनंद) के सच्चे प्रेमी हैं, वे प्यालों के टूटने की परवाह किए बिना आनंद लूटते हैं। केवल अपरिपक्व और कमजोर दिल वाले लोग ही छोटी-मोटी हानियों पर रोते-चिल्लाते हैं। अतः जो नुकसान हो गया, उस पर पश्चाताप करने के बजाय वर्तमान के आनंद को पूरी तरह जीना चाहिए।
भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखो :
अंबर: आकाश, गगन, नभ, आसमान
सितारा: तारा, नक्षत्र, तारक
आनन: मुख, चेहरा, वदन
मधुवन: उपवन, वाटिका, बगीचा, बाग
वल्लरी: लता, बेल, बल्ली
मदिरालय: मधुशाला, मयखाना, शराबखाना
घट: घड़ा, मटका, कलश, कुंभ
निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विपरीतार्थक) शब्द लिखो :
जीवन × मरण (मृत्यु)
प्यारा × अप्रिय (घृणित)
शोक × हर्ष (आनंद)
टूटना × जुड़ना
सूखा × हरा (गीला)
कच्चा × पक्का
सच्चा × झूठा
मादकता × होश (सजगता)
निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह करके समास का नाम लिखो :
मधुघट: मधु का घट — तत्पुरुष समास
मधुवन: मधु का वन — तत्पुरुष समास
मदिरालय: मदिरा का आलय (घर) — तत्पुरुष समास
सुख-दुख: सुख और दुख — द्वंद्व समास
हानि-लाभ: हानि और लाभ — द्वंद्व समास
निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग करो :
जो बीत गई सो बात गई (बीती बातों पर दुख न कर आगे बढ़ना):
वाक्य: परीक्षा का परिणाम जैसा भी रहा, अब जो बीत गई सो बात गई, हमें अगली परीक्षा की तैयारी में जुट जाना चाहिए।शोक मनाना (दुख प्रकट करना / विलाप करना):
वाक्य: वीर सैनिक के बलिदान पर शोक मनाने के बजाय हमें उनके पराक्रम पर गर्व करना चाहिए।शोर मचाना (हल्ला-गुल्ला करना / व्यर्थ शिकायत करना):
वाक्य: समस्या आने पर शोर मचाने से समाधान नहीं निकलता, बल्कि शांत मन से सोचना पड़ता है।