आप भले ती जग भला
अभ्यासमाला : प्रश्नोत्तर
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) बेढब बनारसी का असली नाम क्या है ?
उत्तर: बेढब बनारसी का असली नाम ‘कृष्णदेव प्रसाद गौड़’ है।
(ख) लेखक को बीमार पड़ने की इच्छा क्यों हुई थी ?
उत्तर: लेखक को बीमार पड़ने की इच्छा इसलिए हुई ताकि उन्हें आराम मिले, लोग देखने आएँ, पत्नी माथे पर हाथ फेरे और खाने को फल व बिस्कुट मिलें।
(ग) लेखक के पेट में दर्द कब और क्यों शुरू हुआ ?
उत्तर: रात के लगभग 3 बजे अत्यधिक मात्रा में पूरियाँ, मलाई और रसगुल्ले खाने से अपच होने के कारण लेखक के पेट में दर्द शुरू हुआ।
(घ) लेखक को देखने सबसे पहले कौन-से डॉक्टर आए ?
उत्तर: लेखक को देखने सबसे पहले डॉक्टर ‘चूहानाथ कातर’ आए।
(ङ) लेखक की बीमारी अंततः कैसे ठीक हुई ?
उत्तर: लेखक की बीमारी अंततः अपनी पत्नी की सलाह पर दवाइयाँ छोड़कर निश्चिंत होकर सामान्य भोजन करने से 15 दिनों में ठीक हुई।
2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :
(क) डॉक्टर चूहानाथ कातर ने लेखक की बीमारी के बारे में क्या कहा ?
उत्तर: डॉक्टर चूहानाथ कातर ने लेखक की नब्ज देखकर कहा कि आंतों में अपच और जलन है। उन्होंने दो-दो घंटे बाद एक-एक खुराक पीने के लिए दवा की शीशी दी।
(ख) हकीम साहब की वेशभूषा और ठाठ-बाट का वर्णन करो।
उत्तर: हकीम साहब चिकन का कुरता, बनारसी दुपट्टा और चूड़ीदार पाजामा पहने हुए इत्र की महक और बड़े ठाठ-बाट के साथ तशरीफ लाए थे।
(ग) वैद्य पंडित गंगाधर शास्त्री कैसे आए और उन्होंने क्या निदान बताया ?
उत्तर: वैद्य जी पालकी पर चढ़कर नंगे बदन, पीली धोती और उत्तरीय डाले आए। उन्होंने नाड़ी देखकर वात, पित्त और कफ तीनों के प्रकोप को बीमारी का कारण बताया।
(घ) मित्रों और पड़ोसियों ने लेखक को क्या-क्या विचित्र सलाहें दीं ?
उत्तर: किसी ने नीम की पत्ती घोटकर पीने की सलाह दी, किसी ने ओझा से झाड़-फूँक कराने और किसी ने दंत चिकित्सक से सारे दाँत उखड़वाने की विचित्र सलाह दी।
(ङ) ‘चिकित्सा का चक्कर’ पाठ से क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर: इस पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि बीमारी में बिना सोचे-समझे हर किसी की सलाह और नीम-हकीमों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि संयमित जीवनशैली और संतुलित खान-पान अपनाना चाहिए।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :
(क) लेखक ने विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों पर क्या व्यंग्य किया है ?
उत्तर: लेखक ने एलोपैथी, यूनानी और आयुर्वेद तीनों पद्धतियों के चिकित्सकों के बाह्य आडंबर, वेशभूषा, बात करने के अंदाज और भारी फीस पर गहरा व्यंग्य किया है। सभी चिकित्सक रोग की वास्तविक जड़ को समझे बिना अपनी विद्या का झूठा रौब दिखाते हैं और मरीज को ठीक करने के बजाय और अधिक बीमार व कमजोर कर देते हैं।
(ख) इलाज के चक्कर में लेखक की क्या दशा हुई ?
उत्तर: तरह-तरह के डॉक्टरों, वैद्यों और हकीमों की कड़वी दवाइयाँ पीने, उपवास करने और तरह-तरह के टोटके आजमाने से लेखक का पेट दर्द तो ठीक नहीं हुआ, बल्कि वे अत्यंत दुर्बल (कमजोर) हो गए। उनका बिस्तर से उठना दूभर हो गया और सैकड़ों रुपये व्यर्थ खर्च हो गए।
(ग) लेखक की पत्नी ने उन्हें क्या सलाह दी और उसका क्या परिणाम निकला ?
उत्तर: लेखक की निरंतर बिगड़ती हालत देखकर उनकी पत्नी ने समझदारी भरी सलाह दी कि इन सभी डॉक्टरों और दवाइयों को छोड़ दो तथा निश्चिंत होकर भरपेट खाना खाओ। लेखक ने पत्नी की बात मानकर दवाइयाँ बंद कर दीं और अच्छा भोजन करने लगे, जिससे वे 15 दिनों में पूरी तरह तंदुरुस्त हो गए।
4. सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में) :
(क) “बीमारी से छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के इलाज शुरू होते हैं। कोई साधारण तो कोई गंभीर बीमारी बताकर लेखक की परेशानी को और बढ़ा देता है।”
प्रसंग: प्रस्तुत विचारोत्तेजक पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आलोक (भाग-2)’ के अंतर्गत प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्यकार बेढब बनारसी द्वारा रचित पाठ ‘चिकित्सा का चक्कर’ से उद्धृत हैं।
व्याख्या: जब लेखक बीमार पड़ते हैं, तो उनकी बीमारी का इलाज करने के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टर, हकीम, वैद्य और परिचित आते हैं। कोई इसे मामूली अपच बताता है, कोई हैजा बताता है, तो कोई इसे वात-पित्त का गंभीर प्रकोप बताता है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी विद्या का प्रदर्शन करने के चक्कर में साधारण से पेट दर्द को इतना भयानक बना देता है कि मरीज मानसिक रूप से भयभीत और त्रस्त हो जाता है। लेखक ने यहाँ डॉक्टरों के व्यावसायिक ढोंग और समाज में व्याप्त नीम-हकीमों पर तीखा कटाक्ष किया है।
विशेष:
हास्य और व्यंग्य का सुंदर समन्वय है।
भाषा अत्यंत सरल, सजीव और मुहावरेदार है।
5. भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. संधि-विच्छेद एवं संधि-कार्य :
शब्द | संधि-विच्छेद | संधि का नाम |
|---|---|---|
चिकित्सालय | चिकित्सा + आलय | दीर्घ स्वर संधि |
सूर्योदय | सूर्य + उदय | गुण स्वर संधि |
सज्जन | सत् + जन | व्यंजन संधि |
दुर्बल | दुर् + बल / दुश् + बल | उपसर्ग / विसर्ग संधि |
2. विलोम शब्द :
स्वस्थ — अस्वस्थ / बीमार
दुर्बल — सबल / बलवान
तंदुरुस्त — बीमार / अस्वस्थ
साधारण — असाधारण / विशेष
लाभ — हानि
3. मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य प्रयोग :
कटाक्ष करना (व्यंग्य कसना / ताना मारना):
वाक्य: लेखक ने समाज के अंधविश्वासों और ढोंगी चिकित्सकों पर तीखा कटाक्ष किया है।
नब्ज देखना (हालत या रोग को पहचानना):
वाक्य: हकीम साहब ने मरीज की नब्ज देखकर रोग का अनुमान लगाया।
चक्कर में पड़ना (मुसीबत या परेशानी में फँसना):
वाक्य: नीम-हकीमों के चक्कर में पड़कर उसने अपनी सेहत और धन दोनों गँवा दिए।
हवा का प्रकोप (ऊपरी बाधा या भूत-प्रेत का असर मानना):
वाक्य: अंधविश्वासी लोग बीमारी को किसी ऊपरी हवा का प्रकोप मानकर ओझा के पास जाते हैं।
6. परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: बेढब बनारसी को हिन्दी साहित्य में किस रूप में जाना जाता है ?
उत्तर: बेढब बनारसी को हिन्दी साहित्य में ‘हँसोड़ परंपरा के जीवंत प्रतीक’ और श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्यकार के रूप में जाना जाता है।
प्रश्न 2: ‘लेफ्टिनेंट पिगसन की डायरी’ किसकी रचना है और यह किस विधा की रचना है ?
उत्तर: यह बेढब बनारसी (कृष्णदेव प्रसाद गौड़) का प्रसिद्ध व्यंग्य प्रधान उपन्यास है।
प्रश्न 3: ‘चिकित्सा का चक्कर’ पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
उत्तर: इस पाठ का मुख्य उद्देश्य अंधविश्वासों, नीम-हकीमों और चिकित्सकों की व्यावसायिक लूट पर व्यंग्य करते हुए पाठकों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है।