टूटा पहिया
अभ्यासमाला : प्रश्नोत्तर
(अ) सही विकल्प का चयन करो :
रथ का टूटा पहिया स्वयं को न फेंके जाने की सलाह देता है, क्योंकि —
(क) उसे मरम्मत करके फिर से रथ में लगाया जा सकता है।
(ख) किसी दुस्साहसी अभिमन्यु के हाथों में आकर ब्रह्मास्त्र से लोहा ले सकता है।
(ग) इतिहासों की सामूहिक गति झूठी पड़ जाने पर सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले सकता है।
(घ) ऊपर के ख और ग दोनों सही हैं।
उत्तर: (घ) ऊपर के ख और ग दोनों सही हैं।
‘दुरूह चक्रव्यूह में अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती’ किसने दी थी ?
(क) अभिमन्यु ने (ख) द्रोणाचार्य ने (ग) अर्जुन ने (घ) दुर्योधन ने
उत्तर: (क) अभिमन्यु ने
‘अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी ….’ — यहाँ किसके पक्ष को असत्य कहा गया है ?
(क) युधिष्ठिर का (ख) दुर्योधन का (ग) अभिमन्यु का (घ) कृष्ण का
उत्तर: (ख) दुर्योधन का (कौरव पक्ष का)
‘ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ’ — यह किसका कथन है ?
(क) भीष्म का कथन (ख) परशुराम का कथन (ग) टूटे हुए पहिए का कथन (घ) भीम के गदा का कथन
उत्तर: (ग) टूटे हुए पहिए का कथन
(आ) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर do :
कवि ने अभिमन्यु को दुस्साहसी क्यों बताया है ?
उत्तर: महाभारत के युद्ध में कौरव सेनापति द्रोणाचार्य द्वारा रचित अत्यंत जटिल और अभेद्य चक्रव्यूह को तोड़ने का ज्ञान केवल अर्जुन और उनके 16 वर्षीय पुत्र अभिमन्यु को था। अर्जुन की अनुपस्थिति में, यह जानते हुए भी कि चक्रव्यूह से बाहर निकलने का मार्ग उसे ज्ञात नहीं है, अभिमन्यु ने अकेले ही कौरवों की विशाल अक्षौहिणी सेना और सात-सात महारथियों को ललकारते हुए चक्रव्यूह में प्रवेश किया। इस असाधारण, अत्यंत जोखिमपूर्ण और अदम्य वीरता के कारण कवि ने अभिमन्यु को ‘दुस्साहसी’ कहा है।
‘दुरूह चक्रव्यूह’ का महाभारत के संदर्भ में और आज के संदर्भ में क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
महाभारत के संदर्भ में: ‘दुरूह चक्रव्यूह’ द्रोणाचार्य द्वारा रची गई चक्र के आकार की वह अत्यंत कठिन सैन्य व्यूह-रचना थी, जिसमें अकेले अभिमन्यु को छलपूर्वक घेरकर मारा गया था।
आज के संदर्भ में: ‘दुरूह चक्रव्यूह’ आधुनिक समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, शोषण, अन्याय, कुटिल राजनीति और पूँजीवादी व्यवस्था के उस जटिल जाल का प्रतीक है, जिसमें आज का आम और साधनहीन इंसान (लघु मानव) चारों तरफ से घिरकर संघर्ष कर रहा है।
कवि ने किस तथ्य के आधार पर कहा कि ‘असत्य कभी सत्य को बर्दाश्त नहीं कर पाता’ ?
उत्तर: महाभारत के चक्रव्यूह प्रसंग में कौरवों के बड़े-बड़े महारथी (द्रोणाचार्य, कर्ण, दुर्योधन, जयद्रथ आदि) भली-भाँति जानते थे कि उनका पक्ष अधर्म और असत्य का है और निहत्थे बालक पर वार करना युद्ध-नीति के विरुद्ध है। फिर भी वे सत्य और धर्म के पक्षधर अकेले निहत्थे अभिमन्यु की वीरता को सहन नहीं कर सके और उन्होंने अपने सभी ब्रह्मास्त्रों से उस अकेली आवाज को कुचलने का प्रयास किया। इसी ऐतिहासिक सत्य के आधार पर कवि ने यह बात कही है।
‘लघु से लघु और तुच्छ से तुच्छ वस्तु’ किन परिस्थितियों में अत्यधिक उपयोगी हो सकती है ?
उत्तर: जब कोई व्यक्ति विकट संकट, अन्याय और आपातकालीन परिस्थिति में अकेला और निहत्था घिर जाता है तथा बड़े-बड़े साधन और अस्त्र विफल हो जाते हैं, तब तुच्छ और उपेक्षित समझी जाने वाली वस्तु भी प्राण-रक्षक और अत्यंत शक्तिशाली हथियार बन जाती है। जिस प्रकार निहत्थे अभिमन्यु के हाथों में आकर रथ का टूटा हुआ सामान्य पहिया भी कौरवों के ब्रह्मास्त्रों से लोहा लेने वाला अस्त्र बन गया था, उसी प्रकार संकटकाल में लघु वस्तु भी निर्णायक सिद्ध होती है।
‘इतिहास की सामूहिक गति का सहसा झूठी पड़ जाने’ का क्या आशय है ?
उत्तर: इसका आशय यह है कि जब किसी युग में समाज, शासन और इतिहास की मुख्यधारा (संगठित शक्ति) सत्य, नैतिकता और न्याय के मार्ग से भटककर असत्य, तानाशाही, क्रूरता और विनाशकारी राह पर चलने लगती है; जब बड़ी-बड़ी महाशक्तियाँ मानवता का हनन करने लगती हैं, तब इतिहास की यह तथाकथित गति झूठी और खोखली साबित हो जाती है।
कवि के अनुसार सच्चाई टूटे पहियों का आश्रय लेने को कब विवश हो सकती है ?
उत्तर: कवि के अनुसार जब शक्तिशाली लोग और व्यवस्थाएँ मिलकर असत्य और अन्याय का साथ देने लगती हैं तथा बड़े-बड़े साधन संपन्न लोग सत्य की अकेली आवाज को कुचलने पर उतारू हो जाते हैं, तब सच्चाई (सत्य और न्याय) को अपनी रक्षा और संघर्ष के लिए समाज के उपेक्षित, साधनहीन, लघु मानव और साधारण ‘टूटे हुए पहियों’ का आश्रय लेने को विवश होना पड़ता है।
5. भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय अलग करो :
शब्द | मूल शब्द + प्रत्यय |
|---|---|
सामूहिक | समूह + इक |
आवश्यकता | आवश्यक + ता |
सनसनाहट | सनसन + आहट |
पाठक | पाठ + अक |
पूजनीय | पूज + अनीय |
परीक्षित | परीक्षा + इत |
2. निम्नांकित शब्दों में से उपसर्ग अलग करो :
शब्द | उपसर्ग + मूल शब्द |
|---|---|
दुस्साहस | दुस् + साहस |
अनुदार | अन् + उदार |
बदसूरत | बद + सूरत |
निश्चिंत | निस् + चिंत |
बेकारी | बे + कारी |
अज्ञानी | अ + ज्ञानी |
6. परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: ‘टूटा पहिया’ कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है और इसके कवि कौन हैं ?
उत्तर: ‘टूटा पहिया’ कविता डॉ. धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध काव्य-संग्रह ‘सात गीत वर्ष’ से ली गई है।
प्रश्न 2: ‘टूटा पहिया’ कविता में ‘रथ का टूटा पहिया’ किसका प्रतीक है ?
उत्तर: ‘रथ का टूटा पहिया’ समाज के उपेक्षित, साधनहीन, साधारण मनुष्य (लघु मानव) तथा संकटकाल में सत्य की रक्षा करने वाले साधारण साधन का प्रतीक है।
प्रश्न 3: डॉ. धर्मवीर भारती द्वारा रचित प्रसिद्ध गीतिनाट्य और उपन्यास का नाम लिखो।
उत्तर: गीतिनाट्य— ‘अंधायुग’, तथा उपन्यास— ‘गुनाहों का देवता’ और ‘सूरज का सातवाँ घोड़ा’।
प्रश्न 4: ‘टूटा पहिया’ कविता का मूल संदेश क्या है ?
उत्तर: इसका मूल संदेश यह है कि समाज में किसी भी वस्तु या व्यक्ति को तुच्छ या व्यर्थ समझकर उपेक्षित नहीं करना चाहिए, क्योंकि संकट के समय वही उपेक्षित लघु मानव असत्य और अन्याय के विरुद्ध सबसे बड़ा रक्षक सिद्ध हो सकता है।