साबरमती के संत
अभ्यासमाला : प्रश्नोत्तर
(अ) सही विकल्प का चयन करो :
‘गांधी तेरी मशाल’ का किस अर्थ में प्रयोग हुआ है ?
(क) गांधी जी का दीप (ख) गांधी जी की तलवार (ग) गांधीजी का आश्रम (घ) गांधीजी का आदर्श
उत्तर: (घ) गांधीजी का आदर्श
स्वाधीनता से पहले भारत पर किसका शासन था ?
(क) अंग्रेजों का (ख) फ्रांसीसियों का (ग) डचों का (घ) पुर्तगालियों का
उत्तर: (क) अंग्रेजों का
गांधी जी को प्यार से लोग क्या कहकर पुकारते थे ?
(क) महात्मा (ख) बापू (ग) मोहन दास (घ) राष्ट्रपिता
उत्तर: (ख) बापू
गांधीजी के ऊँचे मस्तक के सामने किसकी चोटी भी झुकती थी ?
(क) विंध्याचल की (ख) हिमालय की (ग) महाकाल की (घ) ताजमहल की
उत्तर: (ख) हिमालय की
(आ) पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
‘साबरमती के संत’ किसे कहा गया है ?
उत्तर: ‘साबरमती के संत’ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (बापू) को कहा गया है।
गांधीजी ने क्या कमाल कर दिखाया ?
उत्तर: गांधीजी ने बिना किसी अस्त्र-शस्त्र और बिना रक्तपात के केवल सत्य और अहिंसा के बल पर भारत को ब्रिटिश गुलामी से मुक्त कराकर कमाल कर दिखाया।
महात्मा गांधी का वास्तविक हथियार क्या था ?
उत्तर: महात्मा गांधी का वास्तविक हथियार ‘सत्य और अहिंसा’ था।
गांधीजी ने लोगों को किस मार्ग पर चलना सिखाया ?
उत्तर: गांधीजी ने लोगों को सत्य, अहिंसा, प्रेम, सद्भाव, त्याग और स्वावलंबन के मार्ग पर चलना सिखाया।
(इ) संक्षिप्त उत्तर लिखो (लगभग 50 शब्दों में) :
गांधीजी की संगठन शक्ति के बारे में तुम क्या जानते हो ?
उत्तर: महात्मा गांधी में अद्भुत और चमत्कारी संगठन शक्ति थी। जब वे देश में सत्याग्रह का आह्वान (बिगुल) करते थे, तो लाखों मजदूर, किसान, नौजवान, हिंदू, मुस्लिम, सिख, पठान सभी भेदभाव भुलाकर उनके पीछे चल पड़ते थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे संपन्न और प्रभावशाली नेता भी विलासिता (फूलों की सेज) छोड़कर देश-आंदोलन में कूद पड़े थे।
गांधीजी ने किस प्रकार अंग्रेजों से टक्कर ली थी ?
उत्तर: गांधीजी ने अंग्रेजों (फिरंगियों) से बिना किसी तोप, बंदूक या सेना के मुकाबला किया। उन्होंने अंग्रेजों की कूटनीतिक चालों का उत्तर असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा, दांडी मार्च और सत्याग्रह जैसे नैतिक व अहिंसक साधनों से दिया। उन्होंने अपनी आत्मिक शक्ति और जन-एकता से शक्तिशाली ब्रिटिश हुकूमत को घुटने टेकने पर विवश कर दिया।
प्रस्तुत गीत का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर: ‘साबरमती के संत’ गीत में कवि प्रदीप ने महात्मा गांधी के त्याग, सादगी और स्वतंत्रता संग्राम में उनके चमत्कारी योगदान का यशोगान किया है। गांधीजी ने बिना किसी हिंसा के देश को स्वतंत्र कराया और पूरे समाज को एकजुट किया। उन्होंने स्वयं फकीरी और लंगोटी में जीवन बिताया, आजादी के बाद कोई सत्ता या पद स्वीकार नहीं किया, बल्कि दूसरों को सुख देकर स्वयं कष्टों का जहर पिया।
‘साबरमती के संत’ गीत के आधार पर गांधीजी के व्यक्तित्व पर एक संक्षिप्त लेख लिखो।
उत्तर: महात्मा गांधी एक युगपुरुष, त्यागी संत और अहिंसा के साक्षात प्रतीक थे। वे बाह्य रूप से दुबले-पतले और साधारण लंगोटी पहनने वाले व्यक्ति थे, किंतु उनका नैतिक आत्मबल और चरित्र हिमालय से भी ऊँचा था। वे निस्वार्थ जनसेवक थे जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, किंतु सत्ता का कोई मोह नहीं रखा। उनका जीवन सादगी, प्रेम, विश्व-बंधुत्व और नैतिक शक्ति की अद्वितीय मिसाल है।
(ई) भावार्थ लिखो :
(क) “मन थी अहिंसा की बदन पे थी लंगोटी, लाखों में लिए घूमता था सत्य की सोटी ॥”
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि प्रदीप द्वारा रचित प्रसिद्ध देशभक्ति गीत ‘साबरमती के संत’ से उद्धृत हैं। इसमें गांधीजी की सादगी और उनकी नैतिक शक्ति का सुंदर वर्णन है।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि महात्मा गांधी के मन में समस्त मानव जाति के प्रति अहिंसा और प्रेम का पवित्र भाव था तथा वे तन पर एक त्यागी फकीर की तरह केवल एक साधारण लंगोटी (धोती) पहनते थे। वे लाखों-करोड़ों देशवासियों के बीच ‘सत्य’ रूपी लाठी (सोटी) का संबल लेकर चलते थे। उनका बाह्य स्वरूप भले ही अत्यंत साधारण था, किंतु उनकी सत्य और अहिंसा की आत्मिक शक्ति अपराजेय थी।
(ख) “माँगा न तूने कोई तख्त बेताज ही रहा, अमृत दिया सभी को खुद जहर पिया ॥”
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि प्रदीप रचित गीत ‘साबरमती के संत’ से ली गई हैं। इसमें गांधीजी के निस्वार्थ त्याग और देश-समर्पण का भावपूर्ण चित्रण है।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि गांधीजी ने अपने जीवन के अथक संघर्ष से देश को स्वाधीनता दिलाई, किंतु देश आजाद होने के बाद भी उन्होंने अपने लिए कोई राजसिंहासन (तख्त), पद या सत्ता नहीं माँगी। वे बिना किसी मुकुट के ही जनता के दिलों पर राज करने वाले बेताज बादशाह बने रहे। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता रूपी अमृत प्रदान किया और स्वयं जीवनभर कष्टों, संघर्षों और अंततः शहादत का विष पीकर देश के लिए समर्पित हो गए।
5. भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. मुहावरों एवं वाक्यांशों का वाक्य प्रयोग :
चुटकी में (पल भर में / बहुत आसानी से):
वाक्य: गांधीजी ने अहिंसा के बल पर चुटकी में अंग्रेजों को देश से बाहर कर दिया।
बड़े जोर की टक्कर (कड़ा और भीषण मुकाबला):
वाक्य: स्वाधीनता संग्राम में भारतीय जनता और अंग्रेजी शासन के बीच बड़े जोर की टक्कर थी।
पुराना उस्ताद (अत्यंत अनुभवी और माहिर व्यक्ति):
वाक्य: कूटनीति के दाँव-पेंच में गांधीजी एक पुराने उस्ताद साबित हुए।
बिगुल बजाना (शंखनाद करना / आंदोलन आरंभ करना):
वाक्य: गांधीजी ने जैसे ही सत्याग्रह का बिगुल बजाया, लाखों लोग सड़कों पर निकल पड़े।
फूलों की सेज (सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य का जीवन):
वाक्य: देश को आजाद कराने के लिए पंडित नेहरू ने फूलों की सेज छोड़कर जेल की यातनाएँ सहीं।
2. विलोम शब्द :
अहिंसा — हिंसा
देश — विदेश
सत्य — असत्य / झूठ
अमृत — विष / जहर
पुराना — नया / नवीन
दुश्मन — दोस्त / मित्र
आजादी — गुलामी / परतंत्रता
मुश्किल — आसान / सरल
गुरु — शिष्य / चेला
मिसाल — बेमिसाल (या अनुपम)
3. ‘बे’ उपसर्ग लगाकर 10 नए शब्द :
बे + जोड़ = बेजोड़
बे + मिसाल = बेमिसाल
बे + ताज = बेताज
बे + कसूर = बेकसूर
बे + दाग = बेदाग
बे + चैन = बेचैन
बे + काबू = बेकाबू
बे + सहारा = बेसहारा
बे + रहम = बेरहम
बे + खटके = बेखटके
6. परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: कवि प्रदीप का वास्तविक नाम क्या था और उन्हें किस उपनाम से जाना जाता है ?
उत्तर: कवि प्रदीप का वास्तविक नाम ‘रामचंद्र द्विवेदी’ था और उन्हें राष्ट्रीय मंचों पर ‘कवि प्रदीप’ के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न 2: साबरमती आश्रम कहाँ स्थित है और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है ?
उत्तर: साबरमती आश्रम गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट पर स्थित है। यहीं से गांधीजी ने 12 मार्च, 1930 को 78 साथियों के साथ प्रसिद्ध ‘दांडी यात्रा’ शुरू कर नमक कानून तोड़ा था।
प्रश्न 3: “आंधी में जलती रहे गांधी तेरी मशाल” पंक्ति का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि देश में चाहे कितनी भी विकट परिस्थितियाँ या विपत्तियाँ (आँधी) आएँ, गांधीजी के सत्य, अहिंसा और प्रेम के आदर्श (मशाल) सदैव प्रकाशमान और जीवित रहने चाहिए।
प्रश्न 4: कवि प्रदीप द्वारा रचित भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रभक्ति गीत कौन-से हैं ?
उत्तर: “ऐ मेरे वतन के लोगों”, “साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल”, “आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिन्दुस्तान की” और “दूर हटो ऐ दुनिया वालो हिन्दुस्तान हमारा है”।