बिंदु-बिंदु विजार
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) मुन्ना कौन-सा पाठ याद कर रहा था ?
उत्तर: मुन्ना अंग्रेजी की प्रसिद्ध सूक्ति का पाठ “क्लीनलीनेस इज़ नैक्स्ट टु गॉडलीनेस” (Cleanliness is next to godliness) याद कर रहा था।
(ख) मुन्ना को बाहर कौन बुला रहा था ?
उत्तर: मुन्ना को बाहर खेलने के लिए उसके मित्र (दोस्त) बुला रहे थे।
(ग) मुन्ना की बहन उसके लिए क्या-क्या कार्य किया करती थी ?
उत्तर: मुन्ना की बहन खुली किताब में निशान लगाकर उसे बंद करती थी, बिखरी कॉपियों-किताबों को करीने से सजाती थी, खुले पेन का ढक्कन लगाती थी, स्याही के दाग-धब्बे पोंछती थी और कुरसी को कायदे से रखती थी।
(घ) आपकी राय में अंग्रेजी की सूक्ति का मुन्ना और उसकी बहन में से किसने सही-सही अर्थ समझा ?
उत्तर: हमारी राय में अंग्रेजी की सूक्ति का सही-सही अर्थ मुन्ना की बहन (बिटिया) ने समझा, क्योंकि उसने केवल रटने के बजाय स्वच्छता को अपने वास्तविक आचरण में उतारा।
(ङ) पाठ के अनुसार सात समंदर पार की भाषा क्या है ?
उत्तर: पाठ के अनुसार सात समंदर पार की भाषा ‘अंग्रेजी’ है।
2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :
(क) लेखक का ध्यान अपनी किताब से उचट कर मुन्ना की ओर क्यों गया ?
उत्तर: मुन्ना जब अपनी पढ़ाई की मेज पर जोर-जोर से अंग्रेजी की सूक्ति “क्लीनलीनेस इज़ नैक्स्ट टु गॉडलीनेस” रट रहा था, तब उसके ऊँचे स्वर और रटने की आवाज सुनकर लेखक का ध्यान अपनी किताब से भटककर मुन्ना की ओर चला गया।
(ख) बिटिया मुन्ना की मेज को क्यों संवार देती है ?
उत्तर: बिटिया का अपने बड़े भाई पर अत्यधिक लाड़ और आदर था। इसके साथ ही उसमें स्वच्छता, व्यवस्था और सेवा का स्वाभाविक संस्कार था, इसलिए वह भाई के खेलने चले जाने पर मेज को व्यवस्थित कर देती है।
(ग) लेखक को सारे प्रवचन-अध्ययन बौने क्यों लगे ?
उत्तर: लेखक को सारे प्रवचन और अध्ययन इसलिए बौने (छोटे) लगे क्योंकि मुन्ना केवल स्वच्छता का पाठ रट रहा था, जबकि उसकी बहन ने बिना एक शब्द बोले चुपचाप अपने आचरण से सफाई करके दिखा दी। आचरण के सामने केवल किताबी ज्ञान प्रभावहीन सिद्ध हुआ।
(घ) “हम वास्तव में तुम्हारे समक्ष श्रद्धानत होना चाहते हैं।” – इस वाक्य में लेखक ने “वास्तव” शब्द का प्रयोग क्यों किया है ?
उत्तर: लेखक ने “वास्तव” शब्द का प्रयोग इसलिए किया है क्योंकि संसार में लोग प्रायः मंचों से केवल खोखले उपदेश देते हैं और आचरण में कुछ नहीं करते। लेखक का मानना है कि जो कथनी और करनी को एक कर ले, समाज वास्तव में केवल उसी के सामने सिर झुकाता है।
(ङ) “वाणी और व्यवहार में समता आने दो।” – यदि वाणी और व्यवहार एक हो तो इसका परिणाम क्या होगा ? अपना अनुभव व्यक्त करो।
उत्तर: यदि वाणी और व्यवहार एक हो जाए, तो समाज से ढोंग, पाखंड और अविश्वास समाप्त हो जाएगा। लोगों के बीच अटूट विश्वास और सद्भाव बढ़ेगा तथा समाज का वास्तविक नैतिक विकास होगा।
(च) “पाठ याद हो गया।” मुन्ना का पाठ याद हो जाने पर भी लेखक उससे प्रसन्न नहीं हैं, क्यों ?
उत्तर: लेखक मुन्ना से इसलिए प्रसन्न नहीं हैं क्योंकि मुन्ना ने स्वच्छता का पाठ केवल तोते की तरह रटा था, उसे जीवन में उतारा नहीं था। पाठ पूरा होते ही वह कमरे में गंदगी और बिखराव छोड़कर खेलने भाग गया था।
(छ) लेखक ने इस निबंध में अंग्रेजी की सूक्ति- ‘क्लीनलीनेस इज़ नैक्स्ट टु गॉडलीनेस’ को आधारबिंदु क्यों बनाया है ?
उत्तर: लेखक ने इस सूक्ति को आधारबिंदु इसलिए बनाया है ताकि वे यह दर्शा सकें कि ‘शुचिता देवत्व की बहन है’। स्वच्छता का मूल्य केवल मुँह से बोलने में नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन और आचरण में अपनाने में है।
3. आशय स्पष्ट करो (लगभग 50 शब्दों में) :
(क) “आचरण की एक लकीर ने सबको छोटा कर दिया है।”
आशय: प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि जीवन में सिद्धांतों का बखान करना, बड़े-बड़े भाषण देना और मोटी पुस्तकें पढ़ना बहुत आसान है, परंतु उन आदर्शों को अपने व्यावहारिक आचरण में उतारना ही सबसे कठिन और महान कार्य है। बिटिया द्वारा की गई सफाई के मौन आचरण ने मुन्ना के रटे हुए पाठ, भाषणों और अध्ययन के सारे दिखावे को बहुत छोटा और तुच्छ साबित कर दिया।
(ख) “केवल कंठ से मत बोलो – हम तुम्हारे हृदयों की गूंज सुनना चाहते हैं।”
आशय: प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से लेखक धर्म, राजनीति और समाज के उपदेशकों को चेतावनी देते हैं कि केवल कंठ (मुँह) से आदर्शवादी बातें बोलना व्यर्थ है। मनुष्य जो बोले, वह उसके हृदय की सच्ची भावना और आचरण से निकलना चाहिए। जब तक वाणी और व्यवहार में एकता नहीं होगी, तब तक वह उपदेश किसी को प्रभावित नहीं कर सकता।
4. सही शब्दों का चयन कर वाक्यों को फिर से लिखो :
(क) लेखक …………………. पढ़ रहा था।
उत्तर: लेखक किताब पढ़ रहा था।
(ख) बिटिया …………………. नहीं पढ़तीं।
उत्तर: बिटिया अंग्रेजी नहीं पढ़तीं।
(ग) …………………. आचरण में उतरे बिना विफल मनोरथ है।
उत्तर: ज्ञान आचरण में उतरे बिना विफल मनोरथ है।
(घ) आचरण की एक …………………. ने सबको छोटा कर दिया है।
उत्तर: आचरण की एक लकीर ने सबको छोटा कर दिया है।
(ङ) प्रवचन और अध्ययन सब …………………. हो गए हैं।
उत्तर: प्रवचन और अध्ययन सब बौने हो गए हैं।
5. भाग – 1 : भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. एकवचन और बहुवचन में समान रहने वाले 10 शब्द और दोनों वचनों में वाक्य प्रयोग :
मित्र:
एकवचन: मेरा मित्र कल मुझसे मिलने आया था।
बहुवचन: मुन्ना के सभी मित्र बाहर मैदान में खेल रहे हैं।
घर:
एकवचन: उसका घर बहुत सुंदर और स्वच्छ है।
बहुवचन: इस बस्ती में अनेक घर बने हुए हैं।
पेड़:
एकवचन: आँगन में आम का एक पेड़ लगा है।
बहुवचन: आँधी में सड़क के कई पेड़ गिर गए।
हाथी:
एकवचन: जंगल से एक हाथी गाँव में आ गया।
बहुवचन: नदी किनारे कई हाथी जल पी रहे हैं।
छात्र:
एकवचन: वह छात्र प्रतिदिन समय पर विद्यालय आता है।
बहुवचन: सभी छात्र परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
फल:
एकवचन: मेज पर एक मीठा फल रखा है।
बहुवचन: बाजार में ताजे फल बिक रहे हैं।
फूल:
एकवचन: पौधे पर एक सुंदर लाल फूल खिला है।
बहुवचन: बगीचे में रंग-बिरंगे फूल महक रहे हैं।
साधु:
एकवचन: मंदिर में एक ज्ञानी साधु पधारे हैं।
बहुवचन: कुंभ मेले में हजारों साधु एकत्रित हुए।
पहाड़:
एकवचन: दूर एक ऊँचा पहाड़ दिखाई दे रहा है।
बहुवचन: हिमालय में अनेक विशाल पहाड़ हैं।
बालक:
एकवचन: बालक पुस्तक पढ़ रहा है।
बहुवचन: सभी बालक खेल में मग्न हैं।
2. सही उच्चारण :
शुचिता (Shuchita), क्षण (Kshan), प्रवचन (Pravachan), आचरण (Aacharan), मुद्रण (Mudran), मस्तिष्क (Mastishk), भाषण (Bhaashan), कॉपी (Copy)।
3. दो-दो समानार्थी (पर्यायवाची) शब्द :
किताब: पुस्तक, ग्रंथ
सोना: कंचन, स्वर्ण
लाड़: प्यार, दुलार
पत्थर: पाषाण, प्रस्तर
समंदर: सागर, समुद्र
आँख: नयन, नेत्र
4. विशेषण और विशेष्य के उपयुक्त जोड़े :
विशाल — मंदिर (विशाल मंदिर)
ऊँची — मीनार (ऊँची मीनार)
सुदीर्घ — सड़क (सुदीर्घ सड़क)
प्राणदायी — बूटी (प्राणदायी बूटी)
प्राणघातक — विष (प्राणघातक विष)
विध्वंसक — तोप (विध्वंसक तोप)
भाग – 2 : ‘पारसमणि’ (अभ्यासमाला : प्रश्नोत्तर)
(अ) सही विकल्प का चयन करो :
किसी ने कहा: “मेरे पास है पारसमणि” – इसमें ‘किसी’ कौन है ?
(क) कोई राह चलता व्यक्ति
(ख) लेखक का विवेक
(ग) लेखक की बुद्धि
(घ) लेखक की कल्पना
उत्तर: (ख) लेखक का विवेक
“लोहा है तुम्हारे पास ?” में ‘लोहा’ से क्या आशय है ?
(क) उद्यशीलता
(ख) लौह धातु
(ग) भौतिक उपकरण
(घ) अनुभव
उत्तर: (क) उद्यशीलता (परिश्रम / उद्यम)
(आ) संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :
प्रश्न 3: लेखक पारसमणि क्यों ढूँढ़ रहा था ?
उत्तर: लेखक पारसमणि इसलिए ढूँढ़ रहा था ताकि वह उसके चमत्कारी स्पर्श से लोहे आदि साधारण धातुओं को सोने में बदलकर अपार धन-संपत्ति प्राप्त कर सके।
प्रश्न 4: लेखक ने स्पर्शमणि के कौन-कौन से रूप बताए हैं ?
उत्तर: लेखक ने स्पर्शमणि के तीन प्रमुख रूप बताए हैं:
खाली हाथ वालों के लिए — सेवा का स्पर्श
साधन/श्रम वालों के लिए — कौशल का स्पर्श
बुद्धिमानों के लिए — लगन का स्पर्श
प्रश्न 5: ‘शुद्ध स्पर्श’ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: ‘शुद्ध स्पर्श’ से तात्पर्य बिना किसी कपट, लोभ, स्वार्थ या अहंकार के सच्चे मन, पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा-भावना से किए गए कर्म से है।
प्रश्न 6: सोना का होना और न होना दोनों ही समस्या के कारण क्यों हैं ?
उत्तर: सोना (धन) का होना और न होना दोनों ही समस्या है क्योंकि जिसके पास सोना होता है, उसे वह घमंड और अहंकार (मद) से मारता है; और जिसके पास नहीं होता, उसे वह लोभ व लालच से त्रस्त रखता है।
(इ) आशय स्पष्ट करो (लगभग 50 शब्दों में) :
(क) “याचना के लिए फैलाए हाथ का भाग केवल तिरस्कार है, बंधु !”
आशय: प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि दूसरों के आगे हाथ फैलाने या याचना (भीख माँगने) से मनुष्य को केवल अपमान और तिरस्कार मिलता है। व्यक्ति को दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने हाथों को उद्योग, श्रम और सेवा के लिए आगे बढ़ाना चाहिए। आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन से ही सच्चा सम्मान मिलता है।
(ख) “शुद्ध सोने का वास शुद्ध व्यक्ति और शुद्ध समाज में ही संभव है।”
आशय: प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि धन-दौलत और समृद्धि (सोना) तभी फलदायी और कल्याणकारी होती है, जब उसे धारण करने वाला व्यक्ति और समाज चरित्रवान, नैतिक और लोभ-मुक्त (शुद्ध) हो। यदि मन में दुर्भावना और लालच हो, तो वही धन अहंकार और विनाश का कारण बन जाता है।
भाग – 2 : भाषा एवं व्याकरण ज्ञान (पदक्रम परिवर्तन)
विशेष बल देने के लिए पदों का सामान्य क्रम बदल दिया जाता है। पाठ से लिए गए वाक्य और उनका सामान्य पदक्रम:
पाठ का वाक्य (बलदायक पदक्रम): “सोना पाकर उसका करोगे क्या ?”
सामान्य पदक्रम: “सोना पाकर उसका क्या करोगे ?”
पाठ का वाक्य (बलदायक पदक्रम): “पारसमणि है तुम्हारे पास ?”
सामान्य पदक्रम: “क्या तुम्हारे पास पारसमणि है ?”
पाठ का वाक्य (बलदायक पदक्रम): “लोहा है तुम्हारे पास ?”
सामान्य पदक्रम: “क्या तुम्हारे पास लोहा है ?”
पाठ का वाक्य (बलदायक पदक्रम): “सोना भी उसी मात्रा में शुद्ध प्राप्त होगा तुम्हें।”
सामान्य पदक्रम: “तुम्हें सोना भी उसी मात्रा में शुद्ध प्राप्त होगा।”
पाठ का वाक्य (बलदायक पदक्रम): “प्रश्न यह उचित है और आवश्यक भी।”
सामान्य पदक्रम: “यह प्रश्न उचित और आवश्यक भी है।”
6. परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: ‘क्लीनलीनेस इज़ नेक्स्ट टु गॉडलीनेस’ का हिन्दी में क्या अर्थ है ?
उत्तर: इसका हिन्दी में अर्थ है— “शुचिता (पवित्रता/स्वच्छता) देवत्व की छोटी बहन है।”
प्रश्न 2: सच्चा पारसमणि किसे कहा गया है ?
उत्तर: मनुष्य के भीतर स्थित सेवा-भावना, लगन, कौशल और कठिन परिश्रम को ही सच्चा पारसमणि कहा गया है।
प्रश्न 3: ‘बिंदु-बिंदु विचार’ पाठ से विद्यार्थियों को क्या नैतिक संदेश मिलता है ?
उत्तर: इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपनी कथनी और करनी में समानता रखनी चाहिए तथा दूसरों से माँगने के बजाय अपने भीतर की लगन व परिश्रम से जीवन को सफल बनाना चाहिए।