चरैवेति
अभ्यासमाला : प्रश्नोत्तर
बोध एवं विचार : निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो :
कवि ने ‘चलते चलो’ का संदेश किसे दिया है ?
उत्तर: कवि ने ‘चलते चलो’ का संदेश समस्त मानव जाति (मनुष्य) को दिया है, ताकि मनुष्य आलस्य, निराशा, भय और अकर्मण्यता को त्यागकर निरंतर प्रगति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे।
कवि ने वसुधा को रत्नमयी क्यों कहा है ?
उत्तर: कवि ने वसुधा (पृथ्वी) को ‘रत्नमयी’ इसलिए कहा है क्योंकि यह धरती अमूल्य खनिज संपदा, रत्नों, उपजाऊ मिट्टी, अन्न, जल, वनस्पति और जीवनदायिनी शक्तियों से परिपूर्ण है। निरंतर कर्म करने वाले मनुष्य को यहाँ जीवन के समस्त सुख और वैभव प्राप्त होते हैं।
कवि ने किस-किस के साथ निरंतर चलने का संदेश दिया है ?
उत्तर: कवि ने मनुष्य को निम्नलिखित के साथ कदम मिलाकर निरंतर चलने का संदेश दिया है:
सूरज के संग-संग (अंधकार मिटाकर प्रकाश फैलाने के लिए)
चंदा और तारों के संग-संग
ऋतुओं और संवत् (समय) के संग-संग
युग के संग-संग
नूतन (नवीनता एवं आधुनिक प्रगति) के संग-संग
किन पंक्तियों में कवि ने मनुष्य की सामर्थ्य और अजेयता का उल्लेख किया है ?
उत्तर: कविता की निम्नलिखित पंक्तियों में मनुष्य की अपार सामर्थ्य, निर्माण-शक्ति और अजेयता का उल्लेख हुआ है:”मानव जिस ओर गया
नगर बने, तीर्थ बने
तुम से है कौन बड़ा ?
गगन-सिंधु मित्र बने,”
निरंतर प्रयत्नशील मनुष्य को कौन-कौन से सुख प्राप्त होते हैं ?
उत्तर: निरंतर प्रयत्नशील रहने वाले मनुष्य को निम्नलिखित सुख और सफलताएँ प्राप्त होती हैं:
वह अज्ञान और दासता के बंधनों से मुक्त होकर स्वाधीन जीवन जीता है।
उसे क्षितिज पार बैठी समृद्धि और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
वह रत्नमयी पृथ्वी के समस्त प्राकृतिक ऐश्वर्य और नदियों के अमृततुल्य जल (सोम) का उपभोग करता है।
उसके प्रयासों से नई सभ्यताओं, नगरों और तीर्थों का निर्माण होता है और आकाश व समुद्र भी उसके सहयोगी बन जाते हैं।
‘रुकने को मरण’ कहना कहाँ तक उचित है ?
उत्तर: ‘रुकने को मरण’ कहना सर्वथा उचित और सत्य है, क्योंकि जीवन का वास्तविक लक्षण गतिशीलता, कर्म और ऊर्जा है। जब कोई व्यक्ति या समाज चलना (प्रयत्न करना) बंद कर देता है, तो उसमें आलस्य, जड़ता, पतन और निराशा घर कर लेती है। जिस प्रकार रुका हुआ पानी सड़ जाता है और बहती नदी पावन रहती है, उसी प्रकार कर्महीन मनुष्य जीवित रहते हुए भी मृतप्राय हो जाता है।
कवि ने मनुष्य को ‘तुमसे है कौन बड़ा’ क्यों कहा है ?
उत्तर: कवि ने मनुष्य को ‘तुमसे है कौन बड़ा’ कहकर संबोधित किया है क्योंकि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ और असीम सामर्थ्यवान रचना है। मनुष्य ने अपने बुद्धि-बल, अदम्य साहस और पुरुषार्थ से दुर्गम जंगलों और पहाड़ों को काटकर सुंदर नगरों और पावन तीर्थों का निर्माण किया है। उसने विशाल आकाश (गगन) और अथाह समुद्र (सिंधु) को भी वश में करके अपना मित्र बना लिया है।
‘युग के ही संग-संग चलते चलो’ कथन का आशय स्पष्ट करो।
उत्तर: इस कथन का आशय यह है कि मनुष्य को पुरानी, सड़ी-गली रूढ़ियों, अंधविश्वासों और संकीर्णताओं को त्यागकर वर्तमान समय के नए विचारों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, ज्ञान और सामाजिक प्रगति के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना चाहिए। जो समाज युग और समय के साथ नहीं चलता, वह पिछड़ जाता है।
नरेश मेहता ‘आस्था और जागृति’ के कवि हैं — कविता के आधार पर सिद्ध करो।
उत्तर: ‘चरैवेति’ कविता से यह पूर्णतः सिद्ध होता है कि कवि नरेश मेहता मानव-सामर्थ्य में अटूट ‘आस्था’ और समाज में नई ‘जागृति’ लाने वाले कवि हैं:
मानवता में आस्था: कवि मनुष्य को दुर्बल या दीन-हीन नहीं मानते, बल्कि “तुमसे है कौन बड़ा” कहकर उसके भीतर आत्म-विश्वास और देवत्व की भावना जगाते हैं।
नव-जागरण का शंखनाद: वे सूर्य, चंदा, नदी और मेघ जैसे प्राकृतिक बिंबों के माध्यम से मनुष्य को आलस्य और दासता की नींद से जगाकर कर्म के पथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
प्रगतिशील दृष्टिकोण: वे प्राचीन रूढ़ियों (जीर्ण वसन) को छोड़कर नवीनता (नूतन) को अपनाने का क्रांतिकारी संदेश देते हैं।
5. भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखो :
(क) जो दूसरों के अधीन हो — पराधीन
(ख) जो दूसरों के उपकार को मानता हो — कृतज्ञ
(ग) जो बच्चों को पढ़ाते हैं — शिक्षक / अध्यापक
(घ) जो गीत की रचना करते हैं — गीतकार
(ङ) जो खेती-बारी का काम करता हो — किसान / कृषक
2. निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह कर समास का नाम लिखो :
पीतांबर = पीत (पीला) है जो अंबर (वस्त्र) — कर्मधारय समास
(विग्रह: पीला है अंबर जिसका अर्थात् श्रीकृष्ण — बहुव्रीहि समास)यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार — अव्ययीभाव समास
अजेय = जिसे जीता न जा सके (न जेय) — नञ् तत्पुरुष समास
धनी-निर्धन = धनी और निर्धन — द्वंद्व समास
कमल-नयन = कमल के समान नयन — कर्मधारय समास
त्रिफला = तीन फलों का समाहार — डिगु समास
3. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग करो :
अपना उल्लू सीधा करना (अपना स्वार्थ पूरा करना):
वाक्य: आज के स्वार्थी लोग केवल अपना उल्लू सीधा करने के लिए दूसरों से मीठी बातें करते हैं।
आँखों का तारा (अत्यधिक प्रिय होना):
वाक्य: इकलौता पुत्र अपने माता-पिता की आँखों का तारा होता है।
उन्नीस-बीस का अंतर (बहुत थोड़ा अंतर होना):
वाक्य: इन दोनों घड़ियों के मूल्य और गुणवत्ता में केवल उन्नीस-बीस का अंतर है।
घी के दीए जलाना (अत्यधिक प्रसन्नता व उत्सव मनाना):
वाक्य: जब उसका चयन सिविल सेवा में हुआ, तो पूरे परिवार ने घी के दीए जलाए।
जान पर खेलना (प्राणों की बाजी लगाना / अत्यधिक साहसिक कार्य करना):
वाक्य: भारतीय सैनिकों ने जान पर खेलकर देश की सीमाओं की रक्षा की।
बाएँ हाथ का खेल (अत्यंत सरल और आसान कार्य):
वाक्य: तैराकी में प्रथम स्थान पाना उसके लिए बाएँ हाथ का खेल है।
6. परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: ‘चरैवेति’ किस ग्रंथ की वैदिक सूक्ति है और इसका क्या संदेश है ?
उत्तर: ‘चरैवेति’ ऐतरेय ब्राह्मण की वैदिक सूक्ति है, जिसका संदेश है कि मनुष्य को कभी रुकना नहीं चाहिए, बल्कि सदैव गतिशील रहकर प्रगति के मार्ग पर चलते रहना चाहिए।
प्रश्न 2: कविता में ‘नदियों’ और ‘मेघों’ के चलने का क्या परिणाम बताया गया है ?
उत्तर: नदियों के निरंतर चलने से ही विशाल सागर का निर्माण होता है और मेघों (बादलों) के निरंतर चलने व बरसने से ही धरती को नवजीवन (गर्भ) मिलता है।
प्रश्न 3: ‘जीर्ण वसन’ किसका प्रतीक है और कवि इसे त्यागने को क्यों कहते हैं ?
उत्तर: ‘जीर्ण वसन’ पुराने रूढ़िवादी विचारों, अंधविश्वासों और पिछड़ेपन का प्रतीक है। कवि इसे इसलिए त्यागने को कहते हैं ताकि समाज नवीन वैज्ञानिक सोच और आधुनिक युग के साथ आगे बढ़ सके।
प्रश्न 4: कवि नरेश मेहता को किस सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ?
उत्तर: कवि नरेश मेहता को उनके संपूर्ण साहित्यिक अवदान के लिए सन् 1992 में सर्वोच्च भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।