पाठ-7 : पहली बूँद
कक्षा - 8 (Class 8) | आलोक भाग-3 (SCERT Assam)
कविता परिचय:
कवि: गोपाल कृष्ण कौल
मूल विषय: प्रस्तुत कविता में वर्षा ऋतु के आगमन पर सूखी धरती और संपूर्ण प्रकृति में आने वाले नए जीवन, हरियाली और आनंद का अत्यंत सुंदर व सजीव चित्रण किया गया है।
शब्दार्थ (শব্দাৰ্থ)
शब्दअर्थ (Hindi)অসমীয়া অৰ্থ
पावसवर्षा ऋतुবাৰিষা কাল / বৰ্ষা ঋতু
दिवसदिनদিন
धरा / वसुंधराधरती / पृथ्वीপৃথিৱী / ধৰিত্ৰী
अधरओठ / होंठওঁঠ
अमृतसुधा / जीवनदायी जलঅমৃত
रोमावलिरोमों की पंक्ति / रोएँগাৰ নোমৰ শাৰী
दूबदूर्वा घास / हरी घासদূবৰি বন
स्वर्णिमसुनहरे रंग काসোণালী ৰং
अंबरआकाश / गगनআকাশ
जलधरबादल / मेघডাৱৰ / মেঘ
अश्रुआँसूচকুলো / অশ্ৰু
चिरसदा / हमेशा रहने वालाচিৰস্থায়ী / চিৰকাল
शस्य-श्यामलाहरी-भरी / फसलों से लहलहातीশস্যেৰে শ্যামলী / সেউজীয়া
पाठ से (পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ)
प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो:

(क) कविता में किस ऋतु का वर्णन हुआ है ?
उत्तर: कविता में वर्षा ऋतु (पावस ऋतु) का वर्णन हुआ है।


(ख) वर्षा की पहली बूँद को किसके समान बताया गया है ?
उत्तर: वर्षा की पहली बूँद को अमृत के समान बताया गया है।


(ग) धरती की रोमावलि क्या है ?
उत्तर: धरती पर उगी हरी दूब (घास) धरती की रोमावलि (रोमों की पंक्ति) है।


(ঘ) 'आसमान में उड़ता सागर'- यहाँ कवि ने उड़ता सागर किसे कहा है ?
उत्तर: यहाँ कवि ने आसमान में उमड़ते-घुमड़ते काले-घने बादलों को 'उड़ता सागर' कहा है।


(ङ) बूढ़ी धरती क्या बनना चाहती है ?
उत्तर: बूढ़ी धरती फिर से शस्य-श्यामला (हरी-भरी और लहलहाती) बनना चाहती है।

प्रश्न 2. कविता का भाव समझकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो:

(क) वर्षा की पहली बूँद से धरती की प्रसन्नता किस प्रकार प्रकट होती है ?
उत्तर: वर्षा की पहली बूँद गिरते ही धरती के गर्भ से नए अंकुर फूट पड़ते हैं। धरती की रोमावलि रूपी हरी दूब खुशी से झूमकर मुस्कुरा उठती है। ऐसा लगता है मानो तपती और प्यासी धरती के सूखे होंठों को अमृत मिल गया हो और वह तृप्त होकर खिलखिला उठी हो।


(ख) वर्षा ऋतु में बादल कैसे दिखाई पड़ते हैं ?
उत्तर: वर्षा ऋतु में बादल आसमान में उड़ते हुए विशाल सागर की तरह दिखाई पड़ते हैं। चमकती हुई बिजलियाँ उनके सुनहरे पंखों जैसी लगती हैं और उनकी गड़गड़ाहट ऐसी प्रतीत होती है मानो वे नगाड़े बजाकर धरती को जगा रहे हों। कवि ने बादलों की तुलना नीले आकाश की काली पुतलियों से भी की है।


(ग) वर्षा ऋतु में धरती पर क्या-क्या परिवर्तन होते हैं ?
उत्तर: वर्षा ऋतु आते ही ग्रीष्म ऋतु की भीषण गर्मी समाप्त हो जाती है। सूखी धरती की प्यास बुझती है, बीज अंकुरित होने लगते हैं और चारों ओर हरी-भरी घास बिछ जाती है। नदियाँ-तालाब जल से भर जाते हैं और संपूर्ण प्रकृति सुंदर, हरी-भरी व सजीव हो उठती है।


(ঘ) कवि ने वर्षा की पहली बूँद को अमृत के समान क्यों कहा है ?
उत्तर: गर्मी के कारण धरती सूख जाती है और पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु मुरझा जाते हैं। ऐसे समय में वर्षा की पहली बूँद धरती को नया जीवन प्रदान करती है और सभी की प्यास बुझाती है। जीवनदायिनी होने के कारण ही कवि ने इसे 'अमृत' के समान कहा है।


(ङ) वर्षा ऋतु के सौंदर्य का अपने शब्दों में चित्रण करो।
उत्तर: वर्षा ऋतु का सौंदर्य अत्यंत मनमोहक होता है। नीले आकाश में काले मेघ छा जाते हैं और ठंडी-शीतल पवन बहने लगती है। बिजली की चमक और मेघों की गर्जन के बीच जब रिमझिम फुहारें बरसती हैं, तो पेड़-पौधे धूल-धुलकर चमक उठते हैं। धरती हरी दूब की चादर ओढ़कर अत्यंत सुहावनी दिखाई देती है।

प्रश्न 3. कविता में प्रकृति का मानवीकरण (उचित मिलान):
प्रकृति की वस्तुएँमानवीकृत रूप
बूँदअमृत
अंबर (आकाश)नीला नयन
बादल (जलधर)काली-पुतली
दूब (घास)पुलकी-मुसकाई
आओ, पढ़ें, समझें और लिखें (ध्वनि-सूचक शब्द)

• हवा की आवाज ➔ सर-सर

• पानी बरसने की आवाज ➔ झर-झर / टप-टप

• नदी के बहने की आवाज ➔ कल-कल

• बिजली चमकने व कड़कने की आवाज ➔ कड़-कड़

• नगाड़े की आवाज ➔ डम-डम / धम-धम

भाषा-अध्ययन (ভাষা আৰু ব্যাকৰণ)
प्रश्न 1. अनुस्वार (ं) और अनुनासिक (ँ) वाले शब्द:

अनुस्वार (ं) वाले शब्द: अंकुर, अंबर, पतंग, तरंग, नंदन

अनुनासिक (ँ) वाले शब्द: बूँद, आँख, मुँह, छाँव, गाँव

प्रश्न 2. समान अर्थवाले (पर्यायवाची) शब्द:

धरती: धरा, वसुंधरा, पृथ्वी

बादल: जलधर, मेघ, घन

आकाश: अंबर, आसमान, गगन

नयन: लोचन, नेत्र, चक्षु

दिन: दिवस, दिवा, वासर

प्रश्न 3. विलोम शब्द (परस्पर विपरीतार्थक शब्द):
शब्दविलोम शब्द
दिवसरात्रि
जीवनमृत्यु
धरतीआकाश
अमृतविष
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