पाठ-6 : भारतीय संगीत की एक झलक
कक्षा - 8 (Class 8) | आलोक भाग-3 (SCERT Assam)
पाठ का मुख्य सार:
संगीत की परिभाषा: आचार्य शारंगदेव के अनुसार— 'गीतं वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगीतमुच्यते' (गायन, वादन और नृत्य इन तीनों के समन्वय को संगीत कहते हैं)।
भारतीय संगीत की दो प्रमुख धाराएँ:
  1. हिंदुस्तानी संगीत: उत्तर और पूर्वोत्तर भारत (असम सहित) में प्रचलित।
  2. कर्नाटकी संगीत: दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश) में प्रचलित।
असम का शास्त्रीय नृत्य: महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव द्वारा प्रवर्तित सत्रीया नृत्य (सन् 2000 में शास्त्रीय नृत्य की मान्यता मिली)।
शब्दार्थ (শব্দাৰ্থ)
शब्दअर्थ (Hindi)অসমীয়া অৰ্থ
धुनसुर / तरानाসুৰ / সুৰৰ লহৰ
मशहूरप्रसिद्ध / विख्यातবিখ্যাত / জনাজাত
शुरुआतआरंभ / प्रारंभআৰম্ভণি
श्रीगणेश होनाशुरू होनाআৰম্ভ হোৱা / শুভাৰম্ভ
रोशनचमकदार / विख्यातউজ্জ্বল / প্ৰসিদ্ধ
पहचानपरिचयপৰিচয়
दौरानसमय के भीतरসময়ছোৱাত
अलावासिवाय / छोड़करবাহিৰে / উপৰি
देनअवदान / योगदानবৰঙণি / অৱদান
पाठ से (পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ)
प्रश्न 1. सही उत्तर का चयन करो:

(क) 'दिल हुम हुम करे घबराए...' इस गीत के रचयिता हैं—
(अ) लता मंगेशकर    (आ) भूपेन हाजरिका    (इ) ए.आर. रहमान    (ई) जावेद अख्तर
उत्तर: (आ) भूपेन हाजरिका


(ख) अकबर के राजदरबार के प्रसिद्ध संगीतज्ञ थे—
(अ) बीरबल    (आ) हुमायूँ    (इ) तानसेन    (ई) अबुल फजल
उत्तर: (इ) तानसेन


(ग) भारतीय संगीत की शुरुआत कब हुई थी ?
(अ) वैदिक युग से    (आ) नव प्रस्तर युग से    (इ) भक्ति युग से    (ई) आधुनिक युग से
उत्तर: (अ) वैदिक युग से


(घ) पं. रविशंकर किस वाद्य के श्रेष्ठ कलाकार हैं ?
(अ) तबला    (आ) शहनाई    (इ) सितार    (ई) सरोद
उत्तर: (इ) सितार


(ङ) भारतीय संगीत की कितनी प्रचलित धाराएँ हैं ?
(अ) एक    (आ) दो    (इ) तीन    (ई) चार
उत्तर: (आ) दो

प्रश्न 2. उत्तर लिखो:

(क) आचार्य शारंगदेव के अनुसार संगीत की परिभाषा क्या है ?
उत्तर: आचार्य शारंगदेव के अनुसार— "गीतं वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगीतमुच्यते।" अर्थात् गीत (गायन), वाद्य (वादन) और नृत्य इन तीनों कलाओं के समन्वित रूप को ही 'संगीत' कहा जाता है।


(ख) भारतीय शास्त्रीय संगीत की कितनी धाराएँ हैं? ये क्या-क्या हैं ?
उत्तर: भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो प्रमुख धाराएँ हैं—

  1. हिंदुस्तानी संगीत (उत्तर भारतीय संगीत)
  2. कर्नाटकी संगीत (दक्षिण भारतीय संगीत)

(ग) हिंदुस्तानी संगीत की धारा का प्रचलन कहाँ-कहाँ है ?
उत्तर: हिंदुस्तानी संगीत की धारा का प्रचलन असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात आदि राज्यों में है।


(घ) दक्षिण भारतीय संगीत क्या है ? इस धारा का संगीत कहाँ-कहाँ प्रचलित है ?
उत्तर: दक्षिण भारत में प्रचलित शास्त्रीय संगीत की धारा को 'कर्नाटकी संगीत' या 'दक्षिण भारतीय संगीत' कहा जाता है। इसके गीतों की भाषाएँ मुख्य रूप से तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ हैं। यह धारा मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल आदि राज्यों में प्रचलित है।


(ङ) नेहा ने शास्त्रीय संगीत सीखने का निश्चय क्यों किया ?
उत्तर: अपनी सहेली स्नेहा से भारतीय संगीत के गौरवशाली इतिहास, महत्व और आनंद के बारे में जानकर नेहा बहुत प्रभावित हुई। उसे लगा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, इसलिए उसने शास्त्रीय संगीत सीखने का निश्चय किया।


(च) सत्रीया नृत्य के प्रवर्तक कौन हैं ? इसे लोकप्रिय बनाने में किन कलाकारों का योगदान है ?
उत्तर: सत्रीया नृत्य के प्रवर्तक असम के महान संत एवं समाज सुधारक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव हैं।
इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने में मणिराम बायन मुक्तियार, रोहेश्वर सैकिया 'बरबायन' और नृत्याचार्य यतीन गोस्वामी आदि कलाकारों का प्रमुख योगदान है।

पाठ के आस-पास (শিল্পী আৰু নৃত্য)
प्रश्न 2. विभिन्न वाद्यों के प्रमुख कलाकारों के नाम:

तबला वादक: पं. सामता प्रसाद, उस्ताद ज़ाकिर हुसैन

सरोद वादक: उस्ताद अली अकबर खाँ, अमजद अली खाँ

शहनाई वादक: उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ

सितार वादक: पं. रविशंकर, उस्ताद विलायत खाँ

बाँसुरी वादक: पं. हरिप्रसाद चौरसिया

प्रश्न 4. भारतीय शास्त्रीय नृत्य और उनके प्रसिद्ध कलाकारों के नाम:
शास्त्रीय नृत्यसंबंधित राज्यप्रसिद्ध कलाकार
सत्रीया नृत्यअसमनृत्याचार्य यतीन गोस्वामी, मणिक बायन
भरतनाट्यमतमिलनाडुरुक्मिणी देवी अरुंडेल, यामिनी कृष्णमूर्ति
कथक नृत्यउत्तर प्रदेशपंडित बिरजू महाराज, शंभू महाराज
कथकलीकेरलगुरु शंकरन नंबूदरीपाद
ओडिसीओडिशाकेलुचरण महापात्र
मणिपुरीमणिपुरगुरु बिपिन सिंह
मोहिनीअट्टमकेरलभारती शिवाजी, शांता राव
भाषा-अध्ययन (ভাষা আৰু ব্যাকৰণ)
प्रश्न 2. कर्तृवाच्य वाक्यों को कर्मवाच्य में बदलो:

(क) मैं गीत गाता हूँ।
कर्मवाच्य: मुझसे गीत गाया जाता है।


(ख) राजू गेंद खेलता है।
कर्मवाच्य: राजू से गेंद खेली जाती है।


(ग) रीमा चिट्ठी लिखती है।
कर्मवाच्य: रीमा से चिट्ठी लिखी जाती है।


(ঘ) माँ दोनों के लिए चाय लाई।
कर्मवाच्य: माँ द्वारा दोनों के लिए चाय लाई गई।

प्रश्न 3. निम्नलिखित वाक्यों को भूतकाल (Past Tense) में बदलो:

(क) दोपहर का समय है।  ➔  दोपहर का समय था।

(ख) नेहा, स्नेहा की सहेली है।  ➔  नेहा, स्नेहा की सहेली थी।

(ग) राजू गेंद खेलता है।  ➔  राजू ने गेंद खेली। (राजू गेंद खेलता था।)

(ঘ) रेहना खत लिख रही है।  ➔  रेहना खत लिख रही थी।

(ङ) हम कल दिल्ली जाएँगे।  ➔  हम कल दिल्ली गए थे।

प्रश्न 4. निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करो:

(क) यह तुमने बहुत अच्छा सवाल पूछी है ?
शुद्ध रूप: यह तुमने बहुत अच्छा सवाल पूछा है?


(ख) रोहन ने पुस्तक पढ़ा।
शुद्ध रूप: रोहन ने पुस्तक पढ़ी। (पुस्तक स्त्रीलिंग है)


(ग) सीमा ने भात भाई।
शुद्ध रूप: सीमा ने भात खाया। (भात पुल्लिंग है)


(ঘ) अयन ने रोटी खाया।
शुद्ध रूप: अयन ने रोटी खाई। (रोटी स्त्रीलिंग है)


(ङ) सेठानी ने राजा से सवाल की।
शुद्ध रूप: सेठानी ने राजा से सवाल किया। (सवाल पुल्लिंग है)

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