पाठ-12 : अभ्यास की महिमा
कक्षा - 6 (Class 6) | आलोक भाग-1 (SCERT Assam)
कहानी का मुख्य सार (নীতিশিক্ষা):
বোপদেৱ নামৰ এজন ল’ৰা পঢ়া-শুনাত অতি দুৰ্বল আছিল। গুৰুদেৱে হতাশ হৈ তাক ঘৰলৈ উভতি যাবলৈ ক’লে। বাটত পিয়াহ লাগি এটা নাদৰ (কুঁৱা) পাৰত পানী খাবলৈ গৈ সি দেখিলে যে বাৰে বাৰে মাটিৰ কলহ থোৱাৰ ফলত নাদৰ টান শিলৰ পাৰতো গাঁত হৈ গৈছে। তেতিয়া বোপদেৱৰ মনত প্ৰশ্ন আহিল— যদি কোমল মাটিৰ কলহৰ ঘঁহনি খাই কঠিন শিল ক্ষয় হ’ব পাৰে, তেন্তে বাৰে বাৰে চেষ্টা আৰু অনুশীলন (অভ্যাস) কৰিলে সি কিয় পঢ়া-শুনা আয়ত্ত কৰিব নোৱাৰিব! এই আত্মবিশ্বাস লৈ সি পুনৰ আশ্ৰমলৈ উভতি আহিল আৰু নিষ্ঠাৰে পঢ়ি ডাঙৰ হৈ সংস্কৃতৰ এজন প্ৰসিদ্ধ পণ্ডিত হৈ উঠিল।
মূল মন্ত্ৰ: "অভ্যাস আৰু পৰিশ্ৰমেৰে অসাধ্যকো সাধন কৰিব পাৰি।"
शब्दार्थ (শব্দাৰ্থ)
शब्दअर्थ (Hindi)অসমীয়া অৰ্থ
मंदबुद्धिकम बुद्धि वाला / मूर्खকম বুদ্ধিৰ / ভোটা
जगतकुएँ के मुहाने का चबूतराনাদৰ ওপৰৰ শিলৰ ভেটি
सहपाठीसाथ में पढ़ने वालाসহপাঠী / লগৰীয়া
गड्ढाजमीन में गहरा स्थानগাঁত / দ ঠাই
निश्चयदृढ़ संकल्प / निर्णयদৃঢ় সংকল্প / সিদ্ধান্ত
प्रसिद्धविख्यात / मशहूरবিখ্যাত / জনাজাত
परिश्रममेहनतপৰিশ্ৰম / কষ্ট
पाठ से (पाठভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ)
प्रश्न 2. उत्तर दो:

(क) बोपदेव कैसा बालक था ?
उत्तर: बोपदेव एक मंदबुद्धि और पढ़ने-लिखने में बहुत कमजोर बालक था।


(ख) बोपदेव के सहपाठी उसे क्या कहकर चिढ़ाते थे ?
उत्तर: बोपदेव के सहपाठी उसे 'बुद्धू' और 'मूर्ख' कहकर चिढ़ाते थे।


(ग) गुरुजी ने बोपदेव को कहाँ भेजने का निश्चय किया ?
उत्तर: निराश होकर गुरुजी ने बोपदेव को उसके गाँव भेजने का निश्चय किया।

प्रश्न 3. कहानी को पढ़कर उत्तर लिखो:

(क) औरतें कुएँ पर क्या कर रही थीं ?
उत्तर: औरतें कुएँ से पानी भर रही थीं।


(ख) कुएँ की जगत पर गड्ढे कैसे बने थे ?
उत्तर: बार-बार मिट्टी के घड़े रखने की रगड़ से कुएँ की पत्थर वाली जगत पर अपने-आप गड्ढे बन गए थे।


(ग) बोपदेव पाठशाला क्यों लौट आया ?
उत्तर: पत्थर पर घड़े के निशान देखकर बोपदेव को समझ आ गया कि निरंतर अभ्यास करने से विद्या अवश्य आ सकती है। इसलिए उसने मन लगाकर पढ़ने का दृढ़ निश्चय किया और पाठशाला लौट आया।


(ঘ) बोपदेव बड़ा होकर क्या बना ?
उत्तर: बोपदेव बड़ा होकर संस्कृत का एक प्रसिद्ध और महान विद्वान बना।

प्रश्न 6. किसने कहा, किससे कहा ?

(क) 'ये गड्ढे किसने बनाए हैं ?'
किसने कहा: बोपदेव ने | किससे कहा: पानी भरने वाली औरत से।


(ख) 'ये गड्ढे हमने नहीं बनाए हैं।'
किसने कहा: एक औरत ने | किससे कहा: बोपदेव से।

दोहे का सरल अर्थ (দোহাৰ ভাবাৰ্থ)

"करत करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान।
रसरि आवत जात ते, सिल पर पड़त निसान।।"


सरल अर्थ:
जिस प्रकार कुएँ की कठोर शिला (पत्थर) पर कोमल रस्सी के बार-बार आने-जाने (घिसने) से भी गहरा निशान पड़ जाता है, ठीक उसी प्रकार लगातार अभ्यास और परिश्रम करने से मंदबुद्धि (मूर्ख) व्यक्ति भी ज्ञानी और बुद्धिमान बन जाता है।
भाषा-अध्ययन (ভাষা আৰু ব্যাকৰণ)
प्रश्न 8. तद्भव से मानक (तत्सम) रूप:
तद्भव रूपशुद्ध (मानक) रूपतद्भव रूपशुद्ध (मानक) रूप
अरजनअर्जनधरमधर्म
मूरखमूर्खकरमकर्म
मरममर्मशरमशर्म
प्रश्न 9. दो-दो पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द लिखो:

बालक : बच्चा, लड़का

औरत : महिला, स्त्री

गुरु : शिक्षक, अध्यापक

घड़ा : मटका, कलश

पानी : जल, नीर

प्रसिद्ध : विख्यात, मशहूर

प्रश्न 13. क्रिया रूपों (हूँ, है, हो, हैं) से खाली जगह भरो:

• मैं छात्र हूँ।   |   मैं छात्रा हूँ

• तू लिखता है

• तुम लिखते हो।   |   तुम कलाकार हो।   |   तुम महान हो

• हम विद्यार्थी हैं।   |   हम साथ-साथ पढ़ते हैं

• आप शिक्षक हैं

• मदन और करीम दोस्त हैं

सुलेख (আদৰ্শ বাক্য):
"परिश्रम और अभ्यास के बिना जीवन में कोई भी सफल नहीं हो सकता।"
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