• कवि: श्री सोहनलाल द्विवेदी
• प्रकृति से मिलने वाली शिक्षा:
- पर्वत : सिर उठाकर ऊँचा (महान) बनना सिखाता है।
- सागर : मन में गहराई और गंभीरता लाना सिखाता है।
- तरंग (लहरें) : मन में मीठा उत्साह और उमंग भरना सिखाती हैं।
- पृथ्वी : भारी से भारी विपत्ति में भी धैर्य (धैर्य्य) न छोड़ना सिखाती है।
- नभ (आकाश) : अपने अच्छे गुणों और विचारों से पूरे संसार को ढक लेना सिखाता है।
तुम भी ऊँचे बन जाओ।
सागर कहता है लहराकर
मन में गहराई लाओ।।
समझ रहे हो क्या कहती है
उठ-उठ गिर-गिर तरल तरंग।
भर लो, भर लो अपने मन में
मीठी-मीठी मृदुल उमंग।।
पृथ्वी कहती, धैर्य न छोड़ो
कितना ही हो सिर पर भार।
नभ कहता है, फैलो इतना,
ढक लो तुम सारा संसार।।
| शब्द | अर्थ (Hindi) | অসমীয়া অৰ্থ |
|---|---|---|
| शीश | सिर / माथा | মূৰ |
| गहराई | गंभीरता / अगाधता | গভীৰতা |
| तरंग | लहर / हिलोर | ঢৌ |
| मृदुल | कोमल / मधुर | কোমল / মিহি |
| उमंग | उत्साह / आनंद | উলাহ / উৎসাহ |
| धैर्य | धीरज / सहनशीलता | ধৈৰ্য |
| भार | बोझ / जिम्मेदारी | ভাৰ / বোজা |
| नभ | आकाश / गगन | আকাশ |
(क) पर्वत कहता शीश उठाकर,
तुम भी ऊँचे बन जाओ।
सागर कहता है लहराकर,
मन में गहराई लाओ।
(ख) पृथ्वी कहती, धैर्य न छोड़ो,
कितना ही हो सिर पर भार।
नभ कहता है, फैलो इतना,
ढक लो तुम सारा संसार।
(क) ऊँचाइयों को छूने का संदेश कौन देता है ? ➔ पर्वत
(ख) मन में गंभीरता लाने का संदेश कौन देता है ? ➔ सागर
(ग) धीरज रखने का संदेश कौन देती है ? ➔ पृथ्वी
(क) 'प्रकृति का संदेश' कविता के कवि कौन हैं ?
उत्तर: 'प्रकृति का संदेश' कविता के कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी हैं।
(ख) तरंग हमें क्या संदेश देती है ?
उत्तर: तरंग (लहर) हमें अपने मन में हमेशा मीठी-मीठी और कोमल उमंग (उत्साह) भरकर प्रसन्न रहने का संदेश देती है।
(ग) पाठ के आधार पर प्रकृति के चार उपादानों के नाम लिखो।
उत्तर: प्रकृति के चार उपादान हैं— पर्वत, सागर, पृथ्वी और नभ (आकाश)।
(ঘ) आकाश हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर: आकाश हमें अपने विचारों और सेवा भाव से इतना व्यापक बनने का संदेश देता है कि हम अपने स्नेह से पूरे संसार को ढक लें।
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| बालक | बालिका | बाघ | बाघिन |
| गायक | गायिका | माली | मालिन |
| पाठक | पाठिका | तेली | तेलिन |
| नायक | नायिका | धोबी | धोबिन |
• पर्वत ➔ गिरि
• शीश ➔ सिर
• नभ ➔ आकाश
• मृदुल ➔ कोमल
• पृथ्वी ➔ धरती
• यह पेड़ है। | वे पेड़ हैं।
• यह लड़का है। | ये लड़के हैं।
• वह पक्षी है। | वे पक्षी हैं।
• वह घोड़ा है। | वे घोड़े हैं।
(क) "ऊँट की बैठक, हिरन की चाल / वह कौन-सा जानवर, जिसके दुम न बाल ?"
➔ उत्तर: मेंढक (ভেকুলী)
(ख) किसकी आँखें होती हैं, पर देख नहीं सकता ?
➔ उत्तर: नारियल / आलू
(ग) वह कौन है, जिसका मुँह नहीं, पर बोलता है ?
➔ उत्तर: रुपया / रेडियो / घंटी
(ঘ) किसके पैर नहीं होते, पर चलता है ?
➔ उत्तर: घड़ी / साँप