पाठ-11 : प्रकृति का संदेश
कक्षा - 6 (Class 6) | आलोक भाग-1 (SCERT Assam)
कविता का मुख्य संदेश (সাৰাংশ):
कवि: श्री सोहनलाल द्विवेदी
प्रकृति से मिलने वाली शिक्षा:
  • पर्वत : सिर उठाकर ऊँचा (महान) बनना सिखाता है।
  • सागर : मन में गहराई और गंभीरता लाना सिखाता है।
  • तरंग (लहरें) : मन में मीठा उत्साह और उमंग भरना सिखाती हैं।
  • पृथ्वी : भारी से भारी विपत्ति में भी धैर्य (धैर्य्य) न छोड़ना सिखाती है।
  • नभ (आकाश) : अपने अच्छे गुणों और विचारों से पूरे संसार को ढक लेना सिखाता है।
प्रकृति का संदेश (मूल कविता)
पर्वत कहता शीश उठाकर
तुम भी ऊँचे बन जाओ।
सागर कहता है लहराकर
मन में गहराई लाओ।।

समझ रहे हो क्या कहती है
उठ-उठ गिर-गिर तरल तरंग।
भर लो, भर लो अपने मन में
मीठी-मीठी मृदुल उमंग।।

पृथ्वी कहती, धैर्य न छोड़ो
कितना ही हो सिर पर भार।
नभ कहता है, फैलो इतना,
ढक लो तुम सारा संसार।।
शब्दार्थ (শব্দাৰ্থ)
शब्दअर्थ (Hindi)অসমীয়া অৰ্থ
शीशसिर / माथाমূৰ
गहराईगंभीरता / अगाधताগভীৰতা
तरंगलहर / हिलोरঢৌ
मृदुलकोमल / मधुरকোমল / মিহি
उमंगउत्साह / आनंदউলাহ / উৎসাহ
धैर्यधीरज / सहनशीलताধৈৰ্য
भारबोझ / जिम्मेदारीভাৰ / বোজা
नभआकाश / गगनআকাশ
अभ्यास-माला (পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ)
प्रश्न 3. खाली जगहों की पूर्ति करो:

(क) पर्वत कहता शीश उठाकर,
तुम भी ऊँचे बन जाओ।
सागर कहता है लहराकर,
मन में गहराई लाओ।


(ख) पृथ्वी कहती, धैर्य न छोड़ो,
कितना ही हो सिर पर भार।
नभ कहता है, फैलो इतना,
ढक लो तुम सारा संसार

प्रश्न 4. कविता का भाव समझो और उत्तर दो:

(क) ऊँचाइयों को छूने का संदेश कौन देता है ?पर्वत

(ख) मन में गंभीरता लाने का संदेश कौन देता है ?सागर

(ग) धीरज रखने का संदेश कौन देती है ?पृथ्वी

प्रश्न 5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो:

(क) 'प्रकृति का संदेश' कविता के कवि कौन हैं ?
उत्तर: 'प्रकृति का संदेश' कविता के कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी हैं।


(ख) तरंग हमें क्या संदेश देती है ?
उत्तर: तरंग (लहर) हमें अपने मन में हमेशा मीठी-मीठी और कोमल उमंग (उत्साह) भरकर प्रसन्न रहने का संदेश देती है।


(ग) पाठ के आधार पर प्रकृति के चार उपादानों के नाम लिखो।
उत्तर: प्रकृति के चार उपादान हैं— पर्वत, सागर, पृथ्वी और नभ (आकाश)


(ঘ) आकाश हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर: आकाश हमें अपने विचारों और सेवा भाव से इतना व्यापक बनने का संदेश देता है कि हम अपने स्नेह से पूरे संसार को ढक लें।

भाषा-अध्ययन (लिंग परिवर्तन व समानार्थी शब्द)
प्रश्न 7. लिंग बदलो (पुल्लिंग से स्त्रीलिंग):
पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
बालकबालिकाबाघबाघिन
गायकगायिकामालीमालिन
पाठकपाठिकातेलीतेलिन
नायकनायिकाधोबीधोबिन
प्रश्न 8. समानार्थक (पर्यायवाची) शब्दों का मिलान करो:

• पर्वत ➔ गिरि

• शीश ➔ सिर

• नभ ➔ आकाश

• मृदुल ➔ कोमल

• पृथ्वी ➔ धरती

प्रश्न 14. 'है' अथवा 'हैं' लगाकर वाक्यों को पूरा करो:

• यह पेड़ है।   |   वे पेड़ हैं

• यह लड़का है।   |   ये लड़के हैं

• वह पक्षी है।   |   वे पक्षी हैं

• वह घोड़ा है।   |   वे घोड़े हैं

आओ, पहेलियाँ बूझें (সাঁথৰ)

(क) "ऊँट की बैठक, हिरन की चाल / वह कौन-सा जानवर, जिसके दुम न बाल ?"
उत्तर: मेंढक (ভেকুলী)


(ख) किसकी आँखें होती हैं, पर देख नहीं सकता ?
उत्तर: नारियल / आलू


(ग) वह कौन है, जिसका मुँह नहीं, पर बोलता है ?
उत्तर: रुपया / रेडियो / घंटी


(ঘ) किसके पैर नहीं होते, पर चलता है ?
उत्तर: घड़ी / साँप

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