এটা বৃদ্ধ বাঘে চিকাৰ কৰিব নোৱাৰি পুখুৰীৰ পাৰত পোৱা সোণৰ খাৰুডালৰ লোভ দেখুৱাই এজন বাটৰুৱাক (পথিক) ফান্দত পেলায়। বাটৰুৱাজনে প্ৰথমতে বাঘৰ কথা বিশ্বাস কৰা নাছিল যদিও সোণৰ লোভত অন্ধ হৈ নিজৰ বিবেক হেৰুৱাই পুখুৰীত নামিল। পুখুৰীৰ দলদপীয় বোকাত বাটৰুৱাজন সোমাই পৰাত বাঘটোৱে তাক বধ কৰি খাই পেলালে।
শিক্ষা: লোভেই পাপ, পাপেই মৃত্যু। কেতিয়াও দুষ্ট আৰু হিংস্ৰ স্বভাৱৰ লোকৰ মিছা প্ৰলোভনত ভোল গৈ নিজৰ বুদ্ধি-বিবেক বিসৰ্জন দিব নালাগে।
| शब्द | अर्थ (Hindi) | অসমীয়া অৰ্থ |
|---|---|---|
| बटोही | राही / पथिक | বাটৰুৱা / পথচাৰী |
| कंगन | कंकण / हाथ का गहना | খাৰু / বালা |
| दलदल | गहरा कीचड़ (दलदली जमीन) | দ বোকা / পুতি হোৱা ঠাই |
| स्वर्ण | सोना / कंचन | সোণ |
| लालच | लोभ | লোভ |
| खतरा | जोखिम / संकट | বিপদ / শংকা |
| सीख | शिक्षा / उपदेश | উপদেশ / শিক্ষা |
| झपट पड़ना | हमला करना / कूदना | জঁপিয়াই পৰা / আক্ৰমণ কৰা |
(क) बूढ़े होने पर बाघ ने क्या तरकीब सोची ?
उत्तर: बूढ़े होने के कारण बाघ शिकार करने में असमर्थ था, इसलिए उसने दलदल वाले तालाब के किनारे सोने के कंगन का लालच दिखाकर राहगीरों को फँसाने की तरकीब सोची।
(ख) बाघ ने किसका लालच देकर बटोही को तालाब में फँसाया ?
उत्तर: बाघ ने सोने के कंगन का लालच देकर बटोही को तालाब में फँसाया।
(ग) बाघ की बातें सुनकर बटोही ने क्या किया ?
उत्तर: बाघ की मीठी और धर्म की बातें सुनकर बटोही सोने के लालच में पड़ गया, अपनी जान का खतरा भूल गया और कंगन लेने के लिए तालाब में उतर गया।
(ঘ) तालाब में उतरते ही बटोही का क्या हाल हुआ ?
उत्तर: तालाब में दो-चार कदम रखते ही बटोही गहरे दलदल (कीचड़) में बुरी तरह फँस गया और हिल भी न सका।
(ङ) आखिरकार बाघ ने बटोही का क्या हाल किया ?
उत्तर: दलदल में फँसे असहाय बटोही को देखकर बाघ धीरे-धीरे आगे बढ़ा, उस पर झपट पड़ा और उसे मारकर खा गया।
• किताब : मैं प्रतिदिन अपनी हिंदी की किताब पढ़ता हूँ।
• गाय : गाय एक सीधी और दूध देने वाली पालतू पशु है।
• मकान : तालाब के किनारे उसका एक सुंदर पक्का मकान है।
• कलम : मैं परीक्षा में अच्छी कलम से लिखता हूँ।
• बहन : रीता अपनी छोटी बहन से बहुत प्यार करती है।
| शब्द | समान अर्थवाला शब्द |
|---|---|
| (क) तालाब | ➔ पोखर |
| (ख) आसमान | ➔ गगन |
| (ग) लालच | ➔ लोभ |
| (घ) स्वर्ण | ➔ सोना |
| (ङ) बटोही | ➔ पथिक |
• १४ ➔ चौदह (14)
• १५ ➔ पंद्रह (15)
• १६ ➔ सोलह (16)
• २१ ➔ इक्कीस (21)
• २७ ➔ सत्ताइस (27)
• ष् + य = ष्य : मनुष्य, भविष्य, भाष्य
• द् + ध = द्ध : बुद्ध, शुद्ध, युद्ध
• च् + च = च्च : बच्चा, कच्चा, सच्चा
• ष् + ट = ष्ट : कष्ट, नष्ट, स्पष्ट
• मोहन को बुलाओ।
• गाय को हरी घास खिलाओ।
• भूखे को भोजन और प्यासे को पानी दो।
• बच्चे को फल दो।
"हाय! बड़ा मूर्ख हूँ जो लालच में पड़कर मैंने अपना विवेक त्याग दिया।"
— লোভৰ বশৱৰ্তী হৈ কেতিয়াও কোনো কাৰ্য কৰিব নালাগে।