नीलकंठ

■ पाठ का सार एवं संदेश (Summary & Core Message)

  • रचनाकार: आधुनिक मीरा के नाम से प्रसिद्ध छायावादी कवयित्री एवं रेखाचित्रकार महादेवी वर्मा (१८०७-१९८७)।

  • विधा: रेखाचित्र / संस्मरण (जीव-जंतुओं के प्रति वात्सल्य और संवेदनशीलता)।

  • मूल विषय: मयूर ‘नीलकंठ’ का सौंदर्य, वीरता, कलाप्रियता एवं राधा-कुब्जा के साथ उसके भावनात्मक संबंध।

  • मूल संदेश: यह पाठ हमें मूक पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील होने, उनकी भावनाओं को समझने एवं प्रकृति व जीवों के सह-अस्तित्व को सम्मान देने की अनुपम शिक्षा देता है।

अभ्यासमाला : सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर 

१. सही विकल्प का चयन करो :

(क) नीलकंठ पाठ में महादेवी वर्मा की कौन-सी विशेषता परिलक्षित हुई है ?
(अ) जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम
(आ) मनुष्य के प्रति सहानुभूति
(इ) पक्षियों के प्रति प्रेम
(ई) राष्ट्रीय पशुओं के प्रति प्रेम
उत्तर: (अ) जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम

(ख) महादेवी जी ने मोर-मोरनी के जोड़े के लिए कितनी कीमत चुकाई ?
(अ) पाँच रुपए
(आ) सात रुपए
(इ) तीस रुपए
(ई) पैंतीस रुपए
उत्तर: (ई) पैंतीस रुपए

(ग) विदेशी महिलाओं ने नीलकंठ को क्या उपाधि दी थी ?
(अ) परफेक्ट जेंटलमैन
(आ) किंग ऑफ द जंगल
(इ) ब्यूटीफुल बर्ड
(ई) स्वीट एंड हैंडसम पर्सन
उत्तर: (अ) परफेक्ट जेंटलमैन

(घ) महादेवी वर्मा ने अपनी पालतू बिल्ली का नाम क्या रखा था ?
(अ) चित्रा
(आ) राधा
(इ) कुब्जा
(ई) कजली
उत्तर: (अ) चित्रा

(ङ) नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु थी—
(अ) ग्रीष्म ऋतु
(आ) वर्षा ऋतु
(इ) शीत ऋतु
(ई) वसंत ऋतु
उत्तर: (आ) वर्षा ऋतु

२. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग २५ शब्दों में) :

(क) मोर-मोरनी के जोड़े को लेकर पहुँचने पर सब लोग महादेवी जी से क्या कहने लगे ?
उत्तर: घर पहुँचने पर सब लोग महादेवी जी से कहने लगे कि यह मोर नहीं बल्कि तीतर है, और चिड़ीमार ने उन्हें मोर कहकर ठग लिया है।

(ख) महादेवी जी के अनुसार नीलकंठ को कैसा वृक्ष अधिक भाता था ?
उत्तर: महादेवी जी के अनुसार नीलकंठ को फलों के वृक्षों की तुलना में फूलों से लदे और नए पत्तों से पल्लवित वृक्ष अधिक भाते थे, जैसे आम और अशोक के पेड़।

(ग) नीलकंठ को राधा और कुब्जा में किसे अधिक प्यार था और क्यों ?
उत्तर: नीलकंठ को राधा से अधिक प्यार था, क्योंकि राधा स्वभाव से शांत, सौम्य और नीलकंठ की छाया के समान रहने वाली योग्य सहचारिणी थी, जबकि कुब्जा अत्यंत क्रोधी और ईर्ष्यालु थी।

(घ) मृत्यु के बाद नीलकंठ का संस्कार महादेवी जी ने कैसे किया ?
उत्तर: मृत्यु के बाद महादेवी जी ने नीलकंठ के पार्थिव शरीर को अपने रेशमी शाल में लपेटकर बड़े आदर और ममता के साथ गंगा नदी की पवित्र धारा में प्रवाहित कर दिया।

३. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग ४० शब्दों में) :

(क) बड़े मियाँ ने मोर के बच्चे दूसरों को न देकर महादेवी जी को ही क्यों देना चाहा ?
उत्तर: बड़े मियाँ जानते थे कि अन्य लोग मोर के पंजों से दवा बनाने के लिए उसे खरीदकर मार डालते हैं। बड़े मियाँ के दिल में दया थी एवं वे जानते थे कि महादेवी जी पशु-पक्षियों से अपार प्रेम करती हैं और उनका संरक्षण करेंगी, इसलिए उन्होंने मोर के बच्चे महादेवी जी को ही दिए।

(ख) महादेवी जी ने मोर और मोरनी के क्या नाम रखे और क्यों ?
उत्तर: नीली, चमकदार गर्दन (नीलाभ ग्रीवा) होने के कारण मोर का नाम ‘नीलकंठ’ रखा गया। मोरनी सदा नीलकंठ की छाया की तरह उसके साथ-साथ रहती थी, इसलिए उसका नाम ‘राधा’ रखा गया।

(ग) लेखिका के अनुसार कार्तिकेय ने मयूर को अपना वाहन क्यों चुना होगा ? मयूर की विशेषताओं के आधार पर उत्तर दो।
उत्तर: कार्तिकेय युद्ध के देवता हैं। मयूर केवल एक सुंदर पक्षी ही नहीं, बल्कि एक निर्भीक, सतर्क, कलाप्रिय एवं वीर पक्षी है जो सर्प जैसे विषैले शत्रु का भी संहार कर सकता है। उसकी इसी वीरता और सतर्कता के कारण कार्तिकेय ने उसे अपना युद्ध-वाहन चुना होगा।

(घ) नीलकंठ के रूप-रंग का वर्णन अपने शब्दों में करो। इस दृष्टि से राधा कहाँ तक भिन्न थी ?
उत्तर: नीलकंठ के सिर पर सघन, ऊँची और चमकीली कलगी थी, तीखी बंकिम चोंच, नीलमणि जैसी चमकदार आँखें एवं लंबी नील-हरित गर्दन थी। उसके पंखों पर इंद्रधनुषी चंद्रिकाएँ थीं। राधा का रूप इतना भव्य नहीं था, किंतु उसकी धूपछाँही गर्दन, चंचल कलगी एवं मंथर गति उसे नीलकंठ की सुंदर सहचारिणी बनाती थी।

(ङ) बारिश में भींगकर नृत्य करने के बाद नीलकंठ और राधा पंखों को कैसे सुखाते ?
उत्तर: वर्षा रुकने पर नीलकंठ अपने दोनों पंखों को फैलाकर सुखाता था। कभी-कभी नीलकंठ और राधा एक-दूसरे के पंखों से टपकने वाली पानी की बूँदों को अपनी चोंच से पी-पीकर परस्पर एक-दूसरे के पंखों का गीलापन दूर करते थे।

(च) नीलकंठ और राधा के नृत्य का वर्णन अपने शब्दों में करो।
उत्तर: वर्षा ऋतु में बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक के साथ नीलकंठ अपने पंखों का सतरंगी मंडलाकार छाता बनाकर तन्मय होकर नाचने लगता था। मेघों का गर्जन जितना तीव्र होता, उसके नृत्य का वेग उतना ही बढ़ जाता। राधा भी उसके साथ-साथ घूमकर लयबद्ध गति से उसका साथ देती थी।

(छ) वसंत ऋतु में नीलकंठ के लिए जालीघर में बंद रहना असहनीय हो जाता था, क्यों ?
उत्तर: वसंत ऋतु में जब आम के पेड़ सुनहरी मंजरियों से लद जाते थे और अशोक का पेड़ लाल नए पत्तों (पल्लवों) से भर जाता था, तब प्रकृति के इस अप्रतिम सौंदर्य को देखकर नीलकंठ बेचैन हो उठता था और उसका मन खुले वातावरण में उड़ने को करता था, इसलिए जालीघर में बंद रहना उसके लिए असहनीय हो जाता था।

(ज) जाली के बड़े घर में रहने वाले जीव-जंतुओं के आचरण का वर्णन करो।
उत्तर: जालीघर के सभी जीव-जंतु नीलकंठ को अपना संरक्षक एवं सेनापति मानते थे। नीलकंठ प्रातःकाल सभी कबूतरों, खरगोशों आदि को दाना चुगने की जगह ले जाता था। खरगोश के बच्चों के साथ खेलता, उन्हें सुरक्षा देता और नियम तोड़ने पर चोंच से हल्का दंड देकर अनुशासन बनाए रखता था।

(झ) नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप के चंगुल से किस तरह बचाया ?
उत्तर: जब एक साँप ने शिशु खरगोश को आधा निगल लिया, तब नीलकंठ ने ऊपर झूले से झपटकर साँप को अपने पंजों से फन के पास दबा लिया और अपनी तीखी चोंच से इतने प्रहार किए कि साँप अधमरा होकर ढीला पड़ गया। खरगोश का बच्चा मुक्त हो गया और नीलकंठ ने साँप को मारकर रात भर खरगोश के बच्चे को अपने पंखों के नीचे रखकर ऊष्मा दी।

(ञ) लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन सी चेष्टाएँ बहुत भाती थीं ?
उत्तर: लेखिका को नीलकंठ का सतरंगी पंख फैलाकर मंडलाकार मुद्रा में खड़े होकर स्वागत करना, विदेशी मेहमानों के आगे सिर झुकाकर सम्मान प्रदर्शित करना एवं लेखिका की हथेली से भुने चने अपनी नुकीली चोंच से बड़ी कोमलता से उठाकर खाना अत्यंत प्रिय लगता था।

४. सम्यक् उत्तर दो (लगभग १०० शब्दों में) :

(क) नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में वर्णन करो।
उत्तर: नीलकंठ एक अत्यंत आकर्षक, कलाप्रिय, वीर एवं संवेदनशील पक्षी था। उसके स्वभाव की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
१. संरक्षक और अनुशासनप्रिय: वह जालीघर के सभी छोटे-बड़े जीवों का सेनापति बन गया था और उनकी रक्षा करता था।
२. अद्भुत वीरता: उसने अपनी जान जोखिम में डालकर एक असहाय शिशु खरगोश को जहरीले साँप से बचाया।
३. कलाप्रियता और सौंदर्य-प्रेम: वह बादलों को देखकर तन्मय होकर नृत्य करता था और पुष्पित-पल्लवित वृक्षों से अगाध प्रेम करता था।
४. कृतज्ञता और आतिथ्य-सत्कार: वह लेखिका और अतिथियों के प्रति पंख फैलाकर सम्मान प्रकट करता था।
५. संवेदनशीलता: कुब्जा के दुर्व्यवहार और राधा के वियोग से दुखी होकर उसने दाना-पानी छोड़ दिया एवं अंत में अपने प्राण त्याग दिए।

(ख) कुब्जा और राधा के आचरण में क्या अंतर परिलक्षित होते हैं ? क्यों ?
उत्तर: राधा और कुब्जा के स्वभाव में ज़मीन-आसमान का अंतर था:

  • राधा का आचरण: राधा शांत, सौम्य, सहनशील एवं प्रेममयी थी। वह नीलकंठ की छाया की तरह साथ रहती थी, उसके साथ ताल मिलाकर नृत्य करती थी और अन्य सभी जीव-जंतुओं से सद्भाव रखती थी।

  • कुब्जा का आचरण: कुब्जा नाम के अनुरूप ही कुटिल, क्रोधी, ईर्ष्यालु एवं आक्रामक थी। वह नीलकंठ पर एकाधिकार चाहती थी। उसने ईर्ष्यावश राधा की कलगी नोच डाली, पंख घायल किए एवं उसके अंडे फोड़ दिए।

  • कारण: कुब्जा का यह आचरण उसकी अत्यधिक ईर्ष्या और स्वार्थी स्वभाव के कारण था, जिसने अंततः नीलकंठ की जान ले ली।

(ग) ‘मयूर कलाप्रिय वीर पक्षी है, हिंसक मात्र नहीं’— इस कथन का आशय समझाकर लिखो।
उत्तर: लेखिका का यह कथन मयूर के वास्तविक चरित्र को उजागर करता है। मयूर सर्पभक्षी होने के कारण हिंसक अवश्य है, किंतु उसकी हिंसा केवल आत्मरक्षा, दूसरों की सुरक्षा और प्राकृतिक भूख तक सीमित है। वह चील या बाज की तरह क्रूर शिकारी नहीं है जो केवल रक्तपात करते हैं।
मयूर के भीतर कला, संगीत और सौंदर्य के प्रति गहरा अनुराग होता है। वह मेघों की गर्जना पर लयबद्ध होकर नृत्य करता है, वसंत के फूलों और नए पत्तों का आनंद लेता है एवं अपने साथियों के प्रति ममता व संरक्षण की भावना रखता है। इसलिए मयूर को केवल हिंसक न कहकर कलाप्रिय और वीर पक्षी कहा गया है।

भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान

१. निम्नलिखित शब्दों के संधि-विच्छेद करो :

  • नवागंतुक = नव + आगंतुक

  • मंडलाकार = मंडल + आकार

  • निश्चेष्ट = निः + चेष्ट

  • आनंदोत्सव = आनंद + उत्सव

  • विस्मयाभिभूत = विस्मय + अभिभूत

  • आविर्भूत = आविः + भूत

  • मेघाच्छन्न = मेघ + आच्छन्न

  • उद्दीप्त = उत् + दीप्त

२. निम्नलिखित समस्तपदों का विग्रह करते हुए समास का नाम भी बताओ :

  • पक्षी-शावक = पक्षी का शावक (संबंध तत्पुरुष समास)

  • करुण-कथा = करुण है जो कथा (कर्मधारय समास)

  • लय-ताल = लय और ताल (द्वंद्व समास)

  • धूप-छाँह = धूप और छाँह (द्वंद्व समास)

  • श्याम-श्वेत = श्याम और श्वेत (द्वंद्व समास)

  • चंचु-प्रहार = चंचु (चोंच) से प्रहार (करण तत्पुरुष समास)

  • नीलकंठ = नीला है जो कंठ (कर्मधारय समास) / नीला है कंठ जिसका अर्थात् मयूर या शिव (बहुव्रीहि समास)

  • आर्तक्रंदन = आर्त का क्रंदन (संबंध तत्पुरुष समास)

  • युद्धवाहन = युद्ध का वाहन (संबंध तत्पुरुष समास)

३. निम्नलिखित शब्दों से मूल शब्द और प्रत्यय अलग करो :

  • स्वाभाविक = स्वभाव + इक

  • दुर्बलता = दुर्बल + ता

  • रिमझिमाहट = रिमझिम + आहट

  • पुष्पित = पुष्प + इत

  • चमत्कारिक = चमत्कार + इक

  • मानवीकरण = मानव + ईकरण

  • विदेशी = विदेश + ई

  • सुनहला = सुनह + ला

  • परिणामतः = परिणाम + ततः

४. उठना, जाना, डालना, लेना क्रियाओं से बनने वाली संयुक्त क्रियाओं से वाक्य बनाओ :

  • उठना (जाग उठना): बच्चे की करुण पुकार सुनकर नीलकंठ झटपट जाग उठा

  • जाना (चले जाना): वर्षा होते ही सभी पक्षी अपने घोंसलों में चले गए

  • डालना (फोड़ डालना): कुब्जा ने ईर्ष्यावश राधा के अंडों को फोड़ डाला

  • लेना (बचा लेना): नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप के मुँह से बचा लिया

५. निम्नलिखित वाक्यों में उपयुक्त विराम चिह्न लगाओ :

(क) अशुद्ध: उन्हें रोककर पूछा मोर के बच्चे है कहाँ ।
शुद्ध: उन्हें रोककर पूछा, “मोर के बच्चे हैं कहाँ?”

(ख) अशुद्ध: सब जीव-जंतु भागकर इधर-उधर छिप गए।
शुद्ध: सब जीव-जंतु भागकर इधर-उधर छिप गए।

(ग) अशुद्ध: चोंच से मार-मारकर उसने राधा की कलगी नोच डाली पंख नोच डाले।
शुद्ध: चोंच से मार-मारकर उसने राधा की कलगी नोच डाली, पंख नोच डाले।

(घ) अशुद्ध: न उसे कोई बीमारी हुई न उसके शरीर पर किसी चोट का चिह्न मिला।
शुद्ध: न उसे कोई बीमारी हुई, न उसके शरीर पर किसी चोट का चिह्न मिला।

(ङ) अशुद्ध: मयूर को बाज चील आदि की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता जिनका जीवन ही क्रूर कर्म है।
शुद्ध: मयूर को बाज, चील आदि की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जिनका जीवन ही क्रूर कर्म है।

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