कलम और तलवार
अभ्यासमाला : सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो
(क) कलम किसका प्रतीक है ?
उत्तर: कलम ज्ञानशक्ति, वैचारिक क्रांति और अहिंसा का प्रतीक है।
(ख) तलवार किसका प्रतीक है ?
उत्तर: तलवार दैहिक शक्ति, सैन्य बल और आत्मरक्षा का प्रतीक है।
(ग) संसार में कलम और तलवार में से किसकी शक्ति असीम है ?
उत्तर: संसार में कलम और तलवार में से कलम की शक्ति असीम और स्थायी है।
(घ) मीठे गान की सृष्टि किसके द्वारा होती है ?
उत्तर: मीठे और प्रेरणादायी गान की सृष्टि कलम के द्वारा होती है।
(ङ) युद्ध किसके बल पर जीता जा सकता है ?
उत्तर: युद्ध तलवार (शस्त्रास्त्र और शारीरिक शक्ति) के बल पर जीता जा सकता है।
(च) किसमें विचारों की शक्ति होती है ?
उत्तर: कलम में विचारों की ज्वलंत शक्ति होती है।
2. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)
(क) कलम हमारे किस काम आती है ?
उत्तर: कलम ज्ञान का दीप जलाकर अज्ञान के अंधकार को दूर करने, मन में ऊँचे भाव जगाने और क्रांतिकारी विचारों द्वारा समाज में नई चेतना पैदा करने के काम आती है।
(ख) तलवार की क्या उपयोगिता है ?
उत्तर: तलवार युद्ध के मैदान में शत्रु पर विजय प्राप्त करने, देश की सीमा व घर की रखवाली करने तथा हिंसक जीवों और आक्रांताओं से आत्मरक्षा करने के काम आती है।
(ग) ‘अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि क्या तुम बंद कमरे में बैठकर केवल कोरी कल्पनाओं और मधुर गीतों की रचना में लीन रहोगे, या बाहर निकलकर कर्मक्षेत्र (मैदान) में संघर्ष करोगे।
(घ) कलम विचारों के अंगारे कैसे पैदा करती है ?
उत्तर: कलम अपनी तेजस्वी और ओजस्वी लेखनी से जनमानस के दिलों-दिमाग में अन्याय के विरुद्ध क्रांति की ज्वाला भड़काकर विचारों के जलते अंगारे पैदा करती है।
(ङ) अक्षर चिनगारी कैसे बनते हैं ?
उत्तर: जब लेखक के विचार अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध ओजस्वी और निर्भीक हो जाते हैं, तब कलम से निकला प्रत्येक अक्षर समाज को जाग्रत करने वाली ‘चिनगारी’ बन जाता है।
3. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में)
(क) हाथों में शस्त्रास्त्र न होने पर भी कलम के द्वारा समाज में फैले भ्रष्टाचार-अनाचार को कैसे दूर किया जा सकता है ?
उत्तर: कलम विचारों की ऐसी असीम शक्ति है जो सीधे मनुष्य के अंतर्मन और हृदय पर प्रहार करती है। शस्त्रास्त्र केवल शरीर को चोट पहुँचा सकते हैं, परंतु कलम अपनी ओजस्वी वाणी से समाज में नई चेतना और जनक्रांति की ज्वाला जलाकर लोगों का हृदय परिवर्तन कर सकती है। इस प्रकार कलम भ्रष्टाचार और अनाचार को जड़ से समाप्त करने में सक्षम है।
(ख) कलम और तलवार में से तुम क्या लेना पसंद करोगे और क्यों ?
उत्तर: मैं कलम लेना पसंद करूँगा। क्योंकि कलम ज्ञान, शांति और विवेक का प्रतीक है। जहाँ तलवार से केवल भय और हिंसा पैदा होती है, वहीं कलम से अज्ञानता दूर होती है और समाज को नई दिशा मिलती है। कलम के द्वारा लाए गए परिवर्तन स्थायी और लोक-कल्याणकारी होते हैं।
(ग) इस कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर: ‘कलम और तलवार’ कविता से हमें प्रेरणा मिलती है कि किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए ज्ञान (कलम) और सुरक्षा (तलवार) दोनों का समन्वय आवश्यक है। हमें ज्ञान का दीप जलाकर समाज में जागृति लानी चाहिए और साथ ही अन्याय व बाहरी खतरों का सामना करने के लिए आत्मबल और साहस भी रखना चाहिए।
4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में)
(क) ‘कलम और तलवार’ कविता का सारांश लिखो।
उत्तर: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी ने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘कलम और तलवार’ में मानव जीवन और राष्ट्र के दो प्रमुख उपादानों—ज्ञानशक्ति (कलम) और दैहिक शक्ति (तलवार) की महत्ता का सुंदर विश्लेषण किया है।
कवि पूछते हैं कि क्या मनुष्य केवल अंध कक्ष में बैठकर मधुर गीतों की रचना करेगा या तलवार उठाकर मैदान में विजय प्राप्त करेगा? कलम ज्ञान का प्रकाश फैलाती है, भावनाओं को जगाती है और विचारों के अंगारे पैदा करती है। वहीं तलवार युद्ध जीतने और हिंसक आक्रांताओं से रक्षा के लिए अनिवार्य है। अंत में कवि स्पष्ट करते हैं कि जिस समाज में निर्भीक नर-नारी रहते हैं और जहाँ लोगों के मन में क्रांति की ज्वाला जलती है, वहाँ कलम की शक्ति इतनी प्रबल हो जाती है कि उन्हें बाहरी तलवार की कमी महसूस नहीं होती।
(ख) कलम और तलवार में किसकी शक्ति अधिक है ? तर्क सहित अपना विचार प्रस्तुत करो।
उत्तर: यद्यपि तात्कालिक सुरक्षा और युद्ध के लिए तलवार की आवश्यकता होती है, परंतु समग्र और दूरगामी दृष्टि से कलम की शक्ति तलवार से कहीं अधिक श्रेष्ठ और असीम है।
हृदय परिवर्तन: तलवार केवल शरीर को वश में कर सकती है या मार सकती है, किंतु कलम मनुष्य की विचारधारा और आत्मा को बदलकर समाज में युगान्तकारी क्रांति ला सकती है।
स्थायित्व: तलवार से जीती गई सत्ता अस्थायी होती है, जबकि कलम से दिए गए ज्ञान और विचार युगों-युगों तक जीवित रहते हैं।
सृजन बनाम विनाश: तलवार विनाश का साधन है, जबकि कलम नवनिर्माण, साहित्य, संस्कृति और सभ्यता की जननी है।
अतः वैचारिक और नैतिक धरातल पर कलम की शक्ति ही सर्वोपरि है।
5. सप्रसंग व्याख्या करो
(क) “अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे, मीठे गान ?
या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर जा मैदान ?”
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आलोक (भाग-2)’ में संकलित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित कविता ‘कलम और तलवार’ से उद्धृत हैं।
प्रसंग: यहाँ कवि ने व्यक्ति के सामने विचार (ज्ञान) और कर्म (संघर्ष) के दो मार्गों को रखकर चुनाव करने की प्रेरणा दी है।
व्याख्या: कवि प्रश्न करते हैं कि क्या तुम एक बंद कमरे में बैठकर केवल भावुकता और कोरी कल्पना के मीठे गीत गाते रहोगे, अथवा समय की पुकार सुनकर हाथ में तलवार लेकर कर्मक्षेत्र के मैदान में उतरोगे और वास्तविक विजय हासिल करोगे? कवि का आशय है कि केवल विचारों में खोए रहने से काम नहीं चलता; आवश्यकता पड़ने पर अन्याय और शत्रु के विरुद्ध सक्रिय संघर्ष करना भी अनिवार्य है।
(ख) “लहू गर्म रखने को रखो मन में ज्वलित विचार,
हिंस्र जीव से बचने को चाहिए किंतु, तलवार।”
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश राष्ट्रकवि ‘दिनकर’ विरचित कविता ‘कलम और तलवार’ से लिया गया है।
प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि ने आंतरिक चेतना (विचार) और बाह्य सुरक्षा (शस्त्र) के संतुलन को रेखांकित किया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि मनुष्य के भीतर राष्ट्रीय चेतना, उत्साह और पौरुष का लहू गर्म रखने के लिए मन में क्रांतिकारी और प्रज्वलित विचार होने चाहिए, जो कलम से प्राप्त होते हैं। परंतु वास्तविक जीवन में हिंसक पशुओं, अपराधियों और विदेशी आक्रांताओं से अपनी और समाज की रक्षा करने के लिए तलवार (शस्त्र-बल) का होना भी अनिवार्य है। अतः मनुष्य को वैचारिक रूप से प्रबुद्ध और शारीरिक रूप से समर्थ दोनों होना चाहिए।
(ग) “जहाँ लोग पालते लहू में हलाहल की धार,
क्या चिंता यदि वहाँ हाथ में हुई नहीं तलवार ?”
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘कलम और तलवार’ कविता का उपसंहार हैं।
प्रसंग: यहाँ कवि ने वैचारिक क्रांति और आत्मबल की सर्वोच्चता को प्रतिपादित किया है।
व्याख्या: ‘लहू में हलाहल (विष) की धार पालना’ का अर्थ है अन्याय, शोषण और गुलामी के विरुद्ध मन में तीव्र आक्रोश और विद्रोही संकल्प रखना। कवि कहते हैं कि जिस देश के नागरिकों के रग-रग में स्वाभिमान और क्रांति का ज्वार बहता हो और जहाँ कलम से निकले अक्षर चिनगारी बनकर जन-जन को जाग्रत कर दें, वहाँ यदि हाथ में लोहे की तलवार न भी हो, तो भी चिंता की कोई बात नहीं है। जनता का अदम्य मनोबल ही सबसे बड़ा अस्त्र बन जाता है।
भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान
निम्नांकित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखो :
घर: गृह, आवास, सदन, आलय
तलवार: कृपाण, खड्ग, असि, शमशीर
दीप: दीपक, दीया, प्रदीप
लहू: रक्त, खून, रुधिर, शोणित
बिजली: विद्युत, चपला, दामिनी, तड़ित
तन: शरीर, देह, काया, वपु
अपार: असीम, अनंत, अगाध, बेहद
शक्ति: बल, सामर्थ्य, ताकत, क्षमता
निम्नांकित अनेकार्थी शब्दों के दो-दो भिन्न अर्थ लिखो :
कलम: (1) लिखने की लेखनी (पेन) / (2) पेड़-पौधों की रोपने वाली टहनी (शाखा)
कक्षा: (1) विद्यालय की श्रेणी/वर्ग (Class) / (2) गृह-कक्षा या परिधि (Orbit)
मैदान: (1) खुला भू-भाग या खेल का मैदान / (2) युद्ध-क्षेत्र (रणभूमि)
अक्षर: (1) वर्ण/ध्वनि-चिह्न / (2) अविनाशी/ब्रह्म (जो कभी नष्ट न हो)
निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विपरीतार्थक) शब्द लिखो :
ज्ञान × अज्ञान
अजेय × जेय (पराजेय)
मीठा × कड़वा
निर्भय × भयभीत (डरपोक)
हिंसा × अहिंसा
विजय × पराजय
उजियाली × अंधियारी
प्रज्ज्वलित × निर्वापित (बुझा हुआ)
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करो :
ज्ञानदीप: शिक्षा हमारे जीवन में ज्ञानदीप जलाकर अज्ञान का अंधकार मिटाती है।
कृपाण: वीर सैनिक ने अपनी तेज कृपाण से शत्रु का सामना किया।
हलाहल: भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष पी लिया था।
चिनगारी: एक छोटी-सी चिनगारी भी विशाल जंगल में आग लगा सकती है।