पाठ-10 : गोकुल लीला
कक्षा - 8 (Class 8) | आलोक भाग-3 (SCERT Assam)
कवि परिचय (महाकवि सूरदास):
उपाधि: हिन्दी साहित्य का सूर्य, वात्सल्य रस के सम्राट
जन्म: सन् 1478 ई. (रुनकता अथवा सीही गाँव)
दीक्षा गुरु: महाप्रभु वल्लभाचार्य
प्रमुख रचनाएँ: सूरसागर, साहित्य-लहरी और सूर-सारावली
भाषा: मधुर और सरस ब्रजभाषा
निधन: सन् 1583 ई. (पारसौली)
पदों का सरल भावार्थ (সৰল ভাবাৰ্থ)
पद 1 का भावार्थ (घुटनों के बल चलते श्रीकृष्ण):
बालक श्रीकृष्ण मणियों और सोने से जड़े नंद बाबा के सुंदर आँगन में किलकारी मारते हुए घुटनों के बल चल रहे हैं। वे आँगन में अपनी ही परछाई देखकर उसे पकड़ने के लिए दौड़ते हैं। जब वे हँसते हैं तो उनके मुख में दूध के दो दाँत चमक उठते हैं। मणियों के फर्श पर उनके हाथ-पैरों की छाया देखकर ऐसा लगता है मानो पृथ्वी उनके लिए कमलों का आसन सजा रही हो। कृष्ण की इस मनमोहक बाल-लीला को देखकर माता यशोदा बार-बार नंद जी को बुलाती हैं और फिर प्रेम से कन्हैया को गोद में उठाकर आँचल से ढककर दूध पिलाने लगती हैं।
पद 2 का भावार्थ (मैया मैं नहिं माखन खायौ):
बालक कृष्ण माखन चोरी करते हुए पकड़े जाने पर बड़ी चतुराई और भोलेपन से माता यशोदा से कहते हैं— "हे मैया! मैंने मक्खन नहीं खाया है। ये सभी ग्वाल-बाल मेरे पीछे पड़ गए हैं और इन्होंने ही मेरे मुँह पर मक्खन लपेट दिया है। छींके पर मटका बहुत ऊँचा टँगा है, मेरे नन्हे हाथ वहाँ तक कैसे पहुँच सकते हैं?" फिर वे चुपके से मुँह पोंछकर मक्खन का दोना पीठ पीछे छिपा लेते हैं। कृष्ण की इस बाल-सुलभ चतुराई और भोलेपन पर रीझकर माता यशोदा हाथ से छड़ी फेंक देती हैं और मुस्कुराते हुए कन्हैया को अपने गले से लगा लेती हैं।
शब्दार्थ (শব্দাৰ্থ)
शब्द (ब्रज)अर्थ (Hindi)অসমীয়া অৰ্থ
किलकतकिलकारी मारते हुएআনন্দত হাঁহি মাৰি
कान्हश्रीकृष्णশ্ৰীকৃষ্ণ / কানু
घुटुरुवनिघुटनों के बलআঁঠুকাঢ়ি
कनकस्वर्ण / सोनाসোণ
बिंबपरछाई / छायाছাঁ / প্ৰতিবিম্ব
दतियाँछोटे दाँतদাঁত / দুপাৰি দাঁত
बसुधाधरती / पृथ्वीপৃথিৱী / ধৰিত্ৰী
सखामित्र / साथीসখা / লগৰীয়া
सींके (छींका)मटका लटकाने की जालीदार डोरीশিকিয়া / শিকলি
भाजनपात्र / बर्तनপাত্ৰ / বাচন
दोनापत्तों का बना कटोराদোনা / পাতৰ ঠোঙা
सांटिछड़ी / सोंटाলাঠি / এছাৰি
पाठ से (পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ)
प्रश्न 5. सही उत्तर पर निशान लगाओ:

(क) श्रीकृष्ण घुटनों के बल चलते हुए—
(अ) रो रहा था    (आ) हँस रहा था    (इ) किलकारी कर रहा था    (ई) कुछ बोल रहा था
उत्तर: (इ) किलकारी कर रहा था


(ख) नंद का आँगन—
(अ) मणियों से जड़ा हुआ था    (आ) मिट्टी से लीपा हुआ था    (इ) संगमरमर का बना था    (ई) ईंट का बना हुआ था
उत्तर: (अ) मणियों से जड़ा हुआ था


(ग) कृष्ण के मुँह पर मक्खन लगा हुआ था, क्योंकि—
(अ) ग्वाल बालकों ने लगा दिया था    (आ) माँ ने लगाया था    (इ) वह मक्खन चुराकर खा रहा था    (ई) बच्चे खेल रहे थे
उत्तर: (इ) वह मक्खन चुराकर खा रहा था

प्रश्न 6. संक्षेप में उत्तर दो:

(क) नन्द के आँगन में कृष्ण किसका प्रतिबिंब पकड़ने के लिए दौड़ता था ?
उत्तर: नन्द के मणियों से जड़े आँगन में कृष्ण अपनी ही परछाई (प्रतिबिंब) को पकड़ने के लिए दौड़ते थे।


(ख) कृष्ण के झूठ पकड़े जाने पर यशोदा ने क्या किया ?
उत्तर: कृष्ण के भोलेपन और चतुराई भरे तर्कों को देखकर माता यशोदा ने हाथ से छड़ी फेंक दी, मुस्कुराईं और कृष्ण को दौड़कर अपने गले से लगा लिया।


(ग) यशोदा बार-बार नंद को क्यों बुलाती है ?
उत्तर: बालकृष्ण के घुटनों के बल चलने, अपनी परछाई पकड़ने और किलकारी मारकर हँसने की अद्भुत बाल-लीला का आनंद दिखाने के लिए यशोदा बार-बार नंद जी को बुलाती हैं।


(ঘ) माता यशोदा बालक कृष्ण को किस तरह दूध पिलाती है ?
उत्तर: माता यशोदा बालक कृष्ण को प्रेमपूर्वक अपनी गोद में उठाकर और अपने आँचल से ढककर वात्सल्य भाव से दूध पिलाती हैं।


(ङ) किलकारी मारकर हँसते हुए कृष्ण का मुख कैसा दिखता है ?
उत्तर: जब कृष्ण किलकारी मारकर हँसते हैं, तो उनके मुख में सामने के दूध के दो छोटे-छोटे दाँत अत्यंत सुंदर और मनमोहक दिखाई पड़ते हैं।


(च) 'मैया मैं नहिं माखन खायौ'- इसके समर्थन में कृष्ण क्या सफाई देते हैं ?
उत्तर: कृष्ण सफाई देते हुए कहते हैं कि—

  1. सारे ग्वाल-सखाओं ने मिलकर जबरदस्ती उनके मुँह पर मक्खन लपेट दिया है।
  2. मक्खन का मटका बहुत ऊँचे छींके पर लटका हुआ है, उनके नन्हे-नन्हे हाथ वहाँ तक पहुँच ही नहीं सकते।

(ছ) बालक कृष्ण ने माखन चोरी के आरोप से बचने के लिए क्या चालाकी की ?
उत्तर: बालक कृष्ण ने तुरंत अपने नन्हे हाथों से मुँह पर लगा दही-मक्खन पोंछ लिया और मक्खन से भरा पत्तों का दोना पीठ के पीछे छिपा लिया।


(জ) क्या बालक कृष्ण माखन चोरी के आरोप से बच पाया ? यदि नहीं तो माता यशोदा ने कैसा व्यवहार किया ?
उत्तर: नहीं, बालक कृष्ण चोरी के आरोप से बच नहीं सके क्योंकि यशोदा माँ सब समझ गई थीं। लेकिन कृष्ण की भोली सूरत और बाल-लीला को देखकर यशोदा का क्रोध समाप्त हो गया और उन्होंने छड़ी फेंककर कृष्ण को गले से लगा लिया।

भाषा-अध्ययन (ভাষা আৰু ব্যাকৰণ)
प्रश्न 1. श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द-युग्मों के अर्थ:
शब्द-युग्मअर्थशब्द-युग्मअर्थ
अन्न / अन्यअनाज / दूसरानीर / नीड़जल / घोंसला
अणु / अनुकण / पीछेचिर / चीरसदा / वस्त्र
आदि / आदीआरंभ / अभ्यस्तसुत / सूतबेटा / धागा
कुल / कूलवंश / किनाराबात / वातकथन / हवा
जलद / जलजबादल / कमलदिन / दीनदिवस / गरीब
पानी / पाणिजल / हाथअंश / अंसभाग / कंधा
प्रश्न 2. 'कृष्ण' शब्द के पाँच पर्यायवाची शब्द लिखो:
उत्तर: कान्हा, श्याम, मुरलीधर, गोपाल, गोविंद (अथवा: वासुदेव, गिरिधर)।
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