• उपाधि: हिन्दी साहित्य का सूर्य, वात्सल्य रस के सम्राट
• जन्म: सन् 1478 ई. (रुनकता अथवा सीही गाँव)
• दीक्षा गुरु: महाप्रभु वल्लभाचार्य
• प्रमुख रचनाएँ: सूरसागर, साहित्य-लहरी और सूर-सारावली
• भाषा: मधुर और सरस ब्रजभाषा
• निधन: सन् 1583 ई. (पारसौली)
| शब्द (ब्रज) | अर्थ (Hindi) | অসমীয়া অৰ্থ |
|---|---|---|
| किलकत | किलकारी मारते हुए | আনন্দত হাঁহি মাৰি |
| कान्ह | श्रीकृष्ण | শ্ৰীকৃষ্ণ / কানু |
| घुटुरुवनि | घुटनों के बल | আঁঠুকাঢ়ি |
| कनक | स्वर्ण / सोना | সোণ |
| बिंब | परछाई / छाया | ছাঁ / প্ৰতিবিম্ব |
| दतियाँ | छोटे दाँत | দাঁত / দুপাৰি দাঁত |
| बसुधा | धरती / पृथ्वी | পৃথিৱী / ধৰিত্ৰী |
| सखा | मित्र / साथी | সখা / লগৰীয়া |
| सींके (छींका) | मटका लटकाने की जालीदार डोरी | শিকিয়া / শিকলি |
| भाजन | पात्र / बर्तन | পাত্ৰ / বাচন |
| दोना | पत्तों का बना कटोरा | দোনা / পাতৰ ঠোঙা |
| सांटि | छड़ी / सोंटा | লাঠি / এছাৰি |
(क) श्रीकृष्ण घुटनों के बल चलते हुए—
(अ) रो रहा था (आ) हँस रहा था (इ) किलकारी कर रहा था (ई) कुछ बोल रहा था
उत्तर: (इ) किलकारी कर रहा था
(ख) नंद का आँगन—
(अ) मणियों से जड़ा हुआ था (आ) मिट्टी से लीपा हुआ था (इ) संगमरमर का बना था (ई) ईंट का बना हुआ था
उत्तर: (अ) मणियों से जड़ा हुआ था
(ग) कृष्ण के मुँह पर मक्खन लगा हुआ था, क्योंकि—
(अ) ग्वाल बालकों ने लगा दिया था (आ) माँ ने लगाया था (इ) वह मक्खन चुराकर खा रहा था (ई) बच्चे खेल रहे थे
उत्तर: (इ) वह मक्खन चुराकर खा रहा था
(क) नन्द के आँगन में कृष्ण किसका प्रतिबिंब पकड़ने के लिए दौड़ता था ?
उत्तर: नन्द के मणियों से जड़े आँगन में कृष्ण अपनी ही परछाई (प्रतिबिंब) को पकड़ने के लिए दौड़ते थे।
(ख) कृष्ण के झूठ पकड़े जाने पर यशोदा ने क्या किया ?
उत्तर: कृष्ण के भोलेपन और चतुराई भरे तर्कों को देखकर माता यशोदा ने हाथ से छड़ी फेंक दी, मुस्कुराईं और कृष्ण को दौड़कर अपने गले से लगा लिया।
(ग) यशोदा बार-बार नंद को क्यों बुलाती है ?
उत्तर: बालकृष्ण के घुटनों के बल चलने, अपनी परछाई पकड़ने और किलकारी मारकर हँसने की अद्भुत बाल-लीला का आनंद दिखाने के लिए यशोदा बार-बार नंद जी को बुलाती हैं।
(ঘ) माता यशोदा बालक कृष्ण को किस तरह दूध पिलाती है ?
उत्तर: माता यशोदा बालक कृष्ण को प्रेमपूर्वक अपनी गोद में उठाकर और अपने आँचल से ढककर वात्सल्य भाव से दूध पिलाती हैं।
(ङ) किलकारी मारकर हँसते हुए कृष्ण का मुख कैसा दिखता है ?
उत्तर: जब कृष्ण किलकारी मारकर हँसते हैं, तो उनके मुख में सामने के दूध के दो छोटे-छोटे दाँत अत्यंत सुंदर और मनमोहक दिखाई पड़ते हैं।
(च) 'मैया मैं नहिं माखन खायौ'- इसके समर्थन में कृष्ण क्या सफाई देते हैं ?
उत्तर: कृष्ण सफाई देते हुए कहते हैं कि—
- सारे ग्वाल-सखाओं ने मिलकर जबरदस्ती उनके मुँह पर मक्खन लपेट दिया है।
- मक्खन का मटका बहुत ऊँचे छींके पर लटका हुआ है, उनके नन्हे-नन्हे हाथ वहाँ तक पहुँच ही नहीं सकते।
(ছ) बालक कृष्ण ने माखन चोरी के आरोप से बचने के लिए क्या चालाकी की ?
उत्तर: बालक कृष्ण ने तुरंत अपने नन्हे हाथों से मुँह पर लगा दही-मक्खन पोंछ लिया और मक्खन से भरा पत्तों का दोना पीठ के पीछे छिपा लिया।
(জ) क्या बालक कृष्ण माखन चोरी के आरोप से बच पाया ? यदि नहीं तो माता यशोदा ने कैसा व्यवहार किया ?
उत्तर: नहीं, बालक कृष्ण चोरी के आरोप से बच नहीं सके क्योंकि यशोदा माँ सब समझ गई थीं। लेकिन कृष्ण की भोली सूरत और बाल-लीला को देखकर यशोदा का क्रोध समाप्त हो गया और उन्होंने छड़ी फेंककर कृष्ण को गले से लगा लिया।
| शब्द-युग्म | अर्थ | शब्द-युग्म | अर्थ |
|---|---|---|---|
| अन्न / अन्य | अनाज / दूसरा | नीर / नीड़ | जल / घोंसला |
| अणु / अनु | कण / पीछे | चिर / चीर | सदा / वस्त्र |
| आदि / आदी | आरंभ / अभ्यस्त | सुत / सूत | बेटा / धागा |
| कुल / कूल | वंश / किनारा | बात / वात | कथन / हवा |
| जलद / जलज | बादल / कमल | दिन / दीन | दिवस / गरीब |
| पानी / पाणि | जल / हाथ | अंश / अंस | भाग / कंधा |