प्रस्तुत कहानी अकबर-बीरबल के प्रसिद्ध प्रसंगों पर आधारित है। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी दूसरों का बुरा (अपकार) नहीं सोचना चाहिए। जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह स्वयं उसमें गिरता है। कुम्हार ने धोबी को फँसाने के लिए षड्यंत्र रचा था, लेकिन बीरबल की बुद्धिमानी से वह स्वयं अपने ही जाल में फँस गया।
| शब्द | अर्थ (Hindi) | অসমীয়া অৰ্থ |
|---|---|---|
| हिफाजत | रखवाली / सुरक्षा | ৰক্ষণাবেক্ষণ / সুৰক্ষা |
| शाह | बादशाह / राजा | ৰজা / বাদশাহ |
| डाँट | डपट / फटकार | হুকুম / তিৰস্কাৰ |
| रेंकना | गधे की आवाज | গাধৰ চিঞৰ |
| समस्या | कठिनाई / उलझन | সমস্যা / জটিলতা |
| शरारत | बदमाशी / कपट भाव | দুষ্টামি / চতুৰালি |
| उपयुक्त | उचित / योग्य | উপযুক্ত / যোগ্য |
| योजना | तरकीब / उपाय | পৰিকল্পনা |
| टब | बड़ा पात्र / नाँद | ডাঙৰ পাত্ৰ / টাব |
| तरकीब | युक्ति / उपाय | উপায় / বুদ্ধি |
| हकदार | अधिकारी | প্ৰাপ্য ব্যক্তি / অধিকাৰী |
| शाबाशी | प्रशंसा / बधाई | প্ৰশংসা / ধন্যবাদ |
(क) कुम्हार को धोबी के गधे पर इतना गुस्सा क्यों आया था ?
उत्तर: धोबी के गधे ने कुम्हार के आँगन में धूप में सूखने के लिए रखे मिट्टी के सारे बर्तनों पर कूद-कूद कर उन्हें तोड़ दिया था। वे बर्तन किसी सेठ के आदेश पर बनाए गए थे, इसलिए कुम्हार को बहुत गुस्सा आया।
(ख) कुम्हार धोबी को क्यों सबक सिखाना चाहता था ?
उत्तर: बर्तन टूट जाने के कारण कुम्हार समय पर ग्राहक (सेठ) को बर्तन नहीं दे पा रहा था। धोबी द्वारा टूटे बर्तनों के पैसे दे देने के बाद भी कुम्हार का क्रोध शांत नहीं हुआ, इसलिए वह धोबी से बदला लेकर उसे सबक सिखाना चाहता था।
(ग) दरबार में जाकर कुम्हार बादशाह अकबर से क्या बोला ?
उत्तर: कुम्हार ने बादशाह से कहा कि ईरान के शाह के पास सफेद और स्वच्छ हाथी हैं क्योंकि उनके धोबी उन्हें रोज़ धोते हैं। यदि हमारे हाथियों को भी उसके पड़ोसी धोबी से धुलवाया जाए, तो हमारे हाथी भी सफेद हो जाएँगे।
(ঘ) धोबी क्यों घबरा गया था ?
उत्तर: दिनभर रगड़-रगड़ कर धोने के बावजूद हाथी काले के काले ही रहे। धोबी डर गया कि काम पूरा न होने पर बादशाह अकबर क्रोधित होकर उसे कठोर दंड देंगे।
(ङ) हाथियों को साफ न कर पाने के कारण बादशाह अकबर द्वारा धोबी को डाँटे जाने पर वह क्या बोला ?
उत्तर: धोबी ने कहा, "महाराज, यदि मेरे पास एक बड़ा टब हो जिसमें हाथी को रखकर धोया जा सके, तो मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे हाथी ईरान के हाथियों से भी अधिक सफेद हो जाएँगे।"
(च) 'जैसे को तैसा' कहानी से तुम्हें क्या सीख मिली ?
उत्तर: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी दूसरों का अहित (बुरा) नहीं सोचना चाहिए। छल-कपट करने वाले व्यक्ति को अंत में अपने ही कर्मों का बुरा फल भुगतना पड़ता है।
(ছ) धोबी को सबक सिखाने के लिए कुम्हार ने कौन-सी योजना बनाई ?
उत्तर: कुम्हार ने बादशाह अकबर से कहकर धोबी को काले हाथी धोकर सफेद करने के असंभव कार्य में फँसाने की योजना बनाई थी।
(জ) क्या कुम्हार अपनी योजना में कामयाब हुआ ?
उत्तर: नहीं, कुम्हार अपनी योजना में कामयाब नहीं हुआ; बल्कि बीरबल की बुद्धिमत्ता के कारण वह स्वयं अपने ही जाल में फँस गया।
(ঝ) धोबी सहायता के लिए किसके महल की ओर चल पड़ा था ?
उत्तर: धोबी सहायता के लिए बादशाह अकबर के बुद्धिमान मंत्री बीरबल के महल की ओर चल पड़ा था।
(क) गधा ...... के कारण जोर-जोर से रेंकने लगा।
(क) क्रोध (ख) दर्द (ग) बुखार (घ) भय
उत्तर: (ख) दर्द
(ख) ...... से मिलने के पश्चात वह निश्चिंत होकर अपने घर वापस आ गया।
(क) अकबर (ख) बीरबल (ग) ईरान के बादशाह (घ) कुम्हार
उत्तर: (ख) बीरबल
(ग) कुम्हार को हाथी के नहाने के लिए ...... बनाने का आदेश दिया गया।
(क) गमला (ख) टब (ग) कंडाल (घ) घड़ा
उत्तर: (ख) टब
(घ) “मैं तुम्हें तुम्हारी इस ...... के लिए इनाम दूँगा।"
(क) तरकीब (ख) बुद्धिमत्ता (ग) चालाकी (घ) सहायता
उत्तर: (ख) बुद्धिमत्ता
লাচিত বৰফুকন অসমৰ এজন বিখ্যাত বীৰ আছিল। তেওঁ শৰাইঘাটৰ যুদ্ধত মোগলক পৰাস্ত কৰি অসমক ৰক্ষা কৰিছিল। মোগলে অসম জয় কৰিব বিচাৰিছিল। তেওঁলোকৰ সেনাপতি ৰামসিংহই অসম জয় কৰিবলৈ দিল্লীৰ পৰা আহিছিল, কিন্তু যুদ্ধত তেওঁ লাচিত বৰফুকনৰ হাতত পৰাজিত হৈছিল। লাচিত বৰফুকনে নিজৰ দেশক অতিশয় ভাল পাইছিল। দেশৰ কামত তেওঁৰ মোমায়ে গাফিলতি (ঢিলা) কৰিছিল। এই কাৰণেই মোমায়েকো বাচি নাথাকিল। তেওঁ কৈছিল— "দেশতকৈ মোমাই ডাঙৰ নহয়।"
(क) मैंने रोटी खाया।
शुद्ध रूप: मैंने रोटी खाई। (रोटी स्त्रीलिंग है)
(ख) वह दो महीने से बीमार हैं।
शुद्ध रूप: वह दो महीने से बीमार है। (या: वे दो महीने से बीमार हैं।)
(ग) इस चिट्ठी को किसने लिखी है।
शुद्ध रूप: यह चिट्ठी किसने लिखी है?
(ঘ) बच्चा माँ के बगल में बैठा है।
शुद्ध रूप: बच्चा माँ के पास बैठा है।
(ङ) राम और सीता आ रही है।
शुद्ध रूप: राम और सीता आ रहे हैं।
गद्यांश का सार: खेलकूद मानव जीवन का एक अत्यंत आवश्यक अंग है। यह व्यायाम का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है जिससे शरीर में चुस्ती और कार्यक्षमता बढ़ती है तथा मानसिक तनाव दूर होता है। खेलों में भाग लेने से अनुशासन, सहयोग और नेतृत्व जैसे मानवीय गुणों का विकास होता है। इसके साथ ही खेल विभिन्न देशों के बीच आपसी मित्रता और संबंध मजबूत करने में भी सहायक होते हैं।