• जन्म: 1896 ई., महिषादल, मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल)
• साहित्यिक धारा: छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक
• प्रमुख रचनाएँ: अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, नए पत्ते, अपरा आदि
• पत्रिका संपादन: समन्वय, मतवाला और माधुरी
• निधन: 1961 ई.
| शब्द | अर्थ (Hindi) | অসমীয়া অৰ্থ |
|---|---|---|
| कुहरी | कोहरा / कुहासा | কুঁৱলী |
| जलाशय | तालाब / सरोवर / पोखर | জলাশয় / পুখুৰী |
| डेरा | रहने का स्थान / पड़ाव | বাহৰ / আশ্ৰয় স্থান |
| जुगनूँ | रात में चमकने वाला कीड़ा (खद्योत) | জোনাকী পৰুৱা |
| परिमल | सुगंध / खुशबू | সুগন্ধি / সুবাস |
| मलय | शीतल-मंद पवन / हवा | মলয়া বতাহ |
| दमके | चमकने लगे | জিলিকি উঠিল |
| ताड़ | ताड़ का ऊँचा वृक्ष | তাল গছ |
| स्यार | सियार / गीदड़ | শিয়াল |
| विचरते थे | घूमते-फिरते थे | ঘূৰি ফুৰিছিল |
| लहर | तरंग / हिलोर | ঢৌ |
| ताक रहे थे | देख रहे थे / निहार रहे थे | চাই আছিল / লক্ষ্য কৰিছিল |
(क) जलाशय के किनारे घना अंधकार क्यों छाया हुआ था?
उत्तर: रात का समय होने, चारों ओर कुहासा छाए रहने और जलाशय के किनारे घने पेड़ों व पत्तों का घेरा होने के कारण वहाँ घना अंधकार छाया हुआ था।
(ख) सुबह प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?
उत्तर: सुबह होने पर अंधकार और कुहासा धीरे-धीरे दूर हो जाता है। आकाश के तारे छिप जाते हैं और चारों ओर उजाला फैल जाता है। पक्षी चहचहाने लगते हैं और शीतल-मंद सुगंधित हवा बहने लगती है।
(ग) कविता में वर्णित पशु-पक्षियों के नाम और उनके कार्यकलापों का उल्लेख करो।
उत्तर: कविता में निम्नलिखित पशु-पक्षियों का वर्णन है:
- जुगनू: इनके दल अंधकार में यहाँ-वहाँ चमक रहे थे।
- पपीहा: पेड़ों की ओट में छिपकर मधुर स्वर में पुकार रहा था।
- स्यार (सियार): सुनसान किनारे पर आराम से इधर-उधर घूम रहे थे।
(ঘ) कविता में कुछ वृक्षों का उल्लेख है। उनके नाम और उपयोगिता बताओ।
उत्तर: कविता में आम, नारियल और ताड़ के वृक्षों का उल्लेख है:
- आम: यह हमें मीठे और स्वादिष्ट फल देता है तथा इसकी छाया शीतल होती है।
- नारियल: नारियल का पानी स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसके फल, तेल और रेशे रस्सी तथा चटाई बनाने के काम आते हैं।
- ताड़: ताड़ से मीठा ताड़गोला फल, रस और पत्तों से पंखे, चटाई व झाड़ू आदि बनाए जाते हैं।
(क) आम की डाल कहाँ आई हुई थी?
(i) जलाशय के किनारे (ii) पानी पर (iii) नारियल के पेड़ पर (iv) ताड़ के पेड़ पर
उत्तर: (ii) पानी पर
(ख) किसके दल यहाँ-वहाँ चमक रहे थे?
(i) जुगनूँ के (ii) पपीहा के (iii) स्यार के (iv) कोयल के
उत्तर: (i) जुगनूँ के
(ग) लहरें कहाँ उठ रही थीं?
(i) नदी में (ii) जलाशय में (iii) आकाश में (iv) सागर में
उत्तर: (ii) जलाशय में (सरोवर में)
(क) कुहासा कहाँ छाया हुआ था?
उत्तर: कुहासा जलाशय के किनारे छाया हुआ था।
(ख) हवा में किसकी सुगंध मिली हुई थी?
उत्तर: हवा में वन के फूलों और वनस्पतियों की सुगंध (परिमल) मिली हुई थी।
(ग) पेड़ों की ओट में छिपकर कौन गा रहा था?
उत्तर: पेड़ों की ओट में छिपकर पपीहा गा (पुकार) रहा था।
(ঘ) तारे कब छिप गए?
उत्तर: सुबह उजाला होते ही तारे छिप गए।
(ङ) तारा कहाँ चमकने लगा?
उत्तर: तारा सरोवर (जलाशय) के अंतर में (पानी के भीतर प्रतिबिंब रूप में) चमकने लगा।
- ऋतु बदलने से हमारे खान-पान और भोजन की आदतों में बदलाव आता है।
- ऋतुओं के अनुसार हमारे पहनावे और वस्त्रों (जैसे गर्मियों में सूती और सर्दियों में ऊनी कपड़े) में परिवर्तन होता है।
- मौसम का असर मनुष्य के स्वास्थ्य और दैनिक कार्यक्षमता पर पड़ता है।
- कृषि और फसलों का उत्पादन पूरी तरह ऋतु चक्र पर निर्भर करता है।
- विभिन्न ऋतुओं में अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं, जो जीवन में नया उत्साह लाते हैं।
उदाहरण:
- कुहरी थी
- घेरा था
- डेरा था
- जुगनूँ के दल दमके / चमके
- मलय बहा
- पेड़ हिले
- पपीहा पुकार रहा था
- स्यार विचरते थे
(क) पपीहा पुकार रहा था छिपा।
गद्यानुरूप क्रम: पपीहा छिपकर पुकार रहा था।
(ख) स्यार विचरते थे आराम से।
गद्यानुरूप क्रम: स्यार आराम से विचरते थे।