पाठ-4 : जलाशय के किनारे कुहरी थी
कक्षा - 8 (Class 8) | आलोक भाग-3 (SCERT Assam)
कवि परिचय (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'):
जन्म: 1896 ई., महिषादल, मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल)
साहित्यिक धारा: छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक
प्रमुख रचनाएँ: अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, नए पत्ते, अपरा आदि
पत्रिका संपादन: समन्वय, मतवाला और माधुरी
निधन: 1961 ई.
शब्दार्थ (শব্দাৰ্থ)
शब्दअर्थ (Hindi)অসমীয়া অৰ্থ
कुहरीकोहरा / कुहासाকুঁৱলী
जलाशयतालाब / सरोवर / पोखरজলাশয় / পুখুৰী
डेरारहने का स्थान / पड़ावবাহৰ / আশ্ৰয় স্থান
जुगनूँरात में चमकने वाला कीड़ा (खद्योत)জোনাকী পৰুৱা
परिमलसुगंध / खुशबूসুগন্ধি / সুবাস
मलयशीतल-मंद पवन / हवाমলয়া বতাহ
दमकेचमकने लगेজিলিকি উঠিল
ताड़ताड़ का ऊँचा वृक्षতাল গছ
स्यारसियार / गीदड़শিয়াল
विचरते थेघूमते-फिरते थेঘূৰি ফুৰিছিল
लहरतरंग / हिलोरঢৌ
ताक रहे थेदेख रहे थे / निहार रहे थेচাই আছিল / লক্ষ্য কৰিছিল
पाठ से (পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ)
प्रश्न 1. कविता में चित्रित जलाशय के सौन्दर्य का वर्णन करो।
उत्तर: 'जलाशय के किनारे कुहरी थी' कविता में भोर (सुबह होने से पहले) के समय जलाशय के प्राकृतिक सौन्दर्य का मनोहारी चित्रण किया गया है। जलाशय के चारों ओर कुहासा छाया हुआ था और हरे-नीले पत्तों से भरे पेड़ खड़े थे। आम की डाल पानी पर झुकी हुई थी। सुनसान किनारे पर जुगनू चमक रहे थे। मंद-मंद सुगंधित हवा बह रही थी, जिससे नारियल के पेड़ हिल रहे थे। पपीहा छिपकर गा रहा था और सरोवर की उठती लहरों में आकाश का तारा चमक रहा था।
प्रश्न 2. 'जलाशय के किनारे कुहरी थी' कविता का भावार्थ अपने शब्दों में लिखो।
भावार्थ: प्रस्तुत कविता में कवि निराला जी ने रात के अंतिम पहर और सुबह के आगमन के समय प्रकृति के शांत और रहस्यमयी वातावरण का वर्णन किया है। भोर के समय जलाशय के किनारे घना अंधकार और कुहासा छाया था। जीव-जंतु और पेड़-पौधे अपने शांत स्वभाव में थे। लेकिन जैसे ही उजाला होने लगा, तारा छिप गया और नया सवेरा हो गया। यह कविता हमें प्रकृति की सुंदरता और उसमें पल-पल होने वाले परिवर्तनों का सुंदर अहसास कराती है।
प्रश्न 3. संक्षेप में उत्तर दो:

(क) जलाशय के किनारे घना अंधकार क्यों छाया हुआ था?
उत्तर: रात का समय होने, चारों ओर कुहासा छाए रहने और जलाशय के किनारे घने पेड़ों व पत्तों का घेरा होने के कारण वहाँ घना अंधकार छाया हुआ था।


(ख) सुबह प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?
उत्तर: सुबह होने पर अंधकार और कुहासा धीरे-धीरे दूर हो जाता है। आकाश के तारे छिप जाते हैं और चारों ओर उजाला फैल जाता है। पक्षी चहचहाने लगते हैं और शीतल-मंद सुगंधित हवा बहने लगती है।


(ग) कविता में वर्णित पशु-पक्षियों के नाम और उनके कार्यकलापों का उल्लेख करो।
उत्तर: कविता में निम्नलिखित पशु-पक्षियों का वर्णन है:

  • जुगनू: इनके दल अंधकार में यहाँ-वहाँ चमक रहे थे।
  • पपीहा: पेड़ों की ओट में छिपकर मधुर स्वर में पुकार रहा था।
  • स्यार (सियार): सुनसान किनारे पर आराम से इधर-उधर घूम रहे थे।

(ঘ) कविता में कुछ वृक्षों का उल्लेख है। उनके नाम और उपयोगिता बताओ।
उत्तर: कविता में आम, नारियल और ताड़ के वृक्षों का उल्लेख है:

  • आम: यह हमें मीठे और स्वादिष्ट फल देता है तथा इसकी छाया शीतल होती है।
  • नारियल: नारियल का पानी स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसके फल, तेल और रेशे रस्सी तथा चटाई बनाने के काम आते हैं।
  • ताड़: ताड़ से मीठा ताड़गोला फल, रस और पत्तों से पंखे, चटाई व झाड़ू आदि बनाए जाते हैं।

प्रश्न 4. नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनो:

(क) आम की डाल कहाँ आई हुई थी?
(i) जलाशय के किनारे    (ii) पानी पर    (iii) नारियल के पेड़ पर    (iv) ताड़ के पेड़ पर
उत्तर: (ii) पानी पर


(ख) किसके दल यहाँ-वहाँ चमक रहे थे?
(i) जुगनूँ के    (ii) पपीहा के    (iii) स्यार के    (iv) कोयल के
उत्तर: (i) जुगनूँ के


(ग) लहरें कहाँ उठ रही थीं?
(i) नदी में    (ii) जलाशय में    (iii) आकाश में    (iv) सागर में
उत्तर: (ii) जलाशय में (सरोवर में)

प्रश्न 5. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:

(क) कुहासा कहाँ छाया हुआ था?
उत्तर: कुहासा जलाशय के किनारे छाया हुआ था।


(ख) हवा में किसकी सुगंध मिली हुई थी?
उत्तर: हवा में वन के फूलों और वनस्पतियों की सुगंध (परिमल) मिली हुई थी।


(ग) पेड़ों की ओट में छिपकर कौन गा रहा था?
उत्तर: पेड़ों की ओट में छिपकर पपीहा गा (पुकार) रहा था।


(ঘ) तारे कब छिप गए?
उत्तर: सुबह उजाला होते ही तारे छिप गए।


(ङ) तारा कहाँ चमकने लगा?
उत्तर: तारा सरोवर (जलाशय) के अंतर में (पानी के भीतर प्रतिबिंब रूप में) चमकने लगा।

पाठ के आस-पास (ঋতু পৰিৱৰ্তন আৰু প্ৰকৃতি)
प्रश्न 1. 'ऋतु-परिवर्तन से मानव जीवन पर गहरा असर पड़ता है'- इस कथन पर पाँच पंक्तियाँ लिखो।
उत्तर:
  1. ऋतु बदलने से हमारे खान-पान और भोजन की आदतों में बदलाव आता है।
  2. ऋतुओं के अनुसार हमारे पहनावे और वस्त्रों (जैसे गर्मियों में सूती और सर्दियों में ऊनी कपड़े) में परिवर्तन होता है।
  3. मौसम का असर मनुष्य के स्वास्थ्य और दैनिक कार्यक्षमता पर पड़ता है।
  4. कृषि और फसलों का उत्पादन पूरी तरह ऋतु चक्र पर निर्भर करता है।
  5. विभिन्न ऋतुओं में अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं, जो जीवन में नया उत्साह लाते हैं।
भाषा-अध्ययन (ভাষা আৰু ব্যাকৰণ)
प्रश्न 1. कविता में आए क्रियापदों में किस काल की बहुलता है? उदाहरण देकर समझाओ।
उत्तर: इस कविता में भूतकाल (Past Tense) के क्रियापदों की बहुलता है।
उदाहरण:
  • कुहरी थी
  • घेरा था
  • डेरा था
  • जुगनूँ के दल दमके / चमके
  • मलय बहा
  • पेड़ हिले
  • पपीहा पुकार रहा था
  • स्यार विचरते थे
इन सभी क्रियापदों से यह स्पष्ट होता है कि घटना या दृश्य बीते हुए समय का है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित पंक्तियों में आए शब्दों को गद्यानुरूप क्रम (सही पदक्रम) में लिखो:

(क) पपीहा पुकार रहा था छिपा।
गद्यानुरूप क्रम: पपीहा छिपकर पुकार रहा था।


(ख) स्यार विचरते थे आराम से।
गद्यानुरूप क्रम: स्यार आराम से विचरते थे।

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