पाठ-2 : कश्मीरी सेब
कक्षा - 8 (Class 8) | आलोक भाग-3 (SCERT Assam)
लेखक परिचय (मुंशी प्रेमचंद):
जन्म: 1880 ई., लमही गाँव (वाराणसी/काशी)
मूल नाम: धनपत राय (पिताजी प्यार से नवाब राय कहते थे)
रचनाएँ: लगभग 300 कहानियाँ और 14 उपन्यास
प्रमुख उपन्यास: गोदान, सेवासदन, गबन, निर्मला, कर्मभूमि आदि
प्रमुख कहानियाँ: ईदगाह, पूस की रात, कफ़न, बूढ़ी काकी, पंच परमेश्वर आदि
मृत्यु: 1936 ई.
शब्दार्थ (শব্দাৰ্থ)
शब्दअर्थ (Hindi)অসমীয়া অৰ্থ
चौकचौराहाচাৰিআলি
मेवाफरोशफल बेचने वालाফল বেপাৰী
सेंतमुफ्त / बिना मूल्य केবিনামূলীয়া / ফ্ৰী
नीमकौड़ीनीम का फलনিম গছৰ গুটি
तबीयत खुश होनाबहुत आनंद आनाমন আনন্দিত হোৱা
लौंडादुकान में काम करने वाला लड़काদোকানৰ ল’ৰা / কৰ্মচাৰী
कायदानियम / तरीकाনিয়ম / পদ্ধতি
सुराखछेदফুটা / বিন্ধা
किड़हेकीड़े लगे हुएপোক লগা
गमदुःख / अफ़सोसদুখ / মনস্তাপ
चौकससावधान / सतर्कসাৱধান / সজাগ
भाँप लियासमझ लिया / ताड़ लियाবুজি পালে / উমান পালে
दुर्गतिदुर्दशा / बुरी हालतদুৰ্দশা / বেয়া অৱস্থা
साखप्रतिष्ठा / विश्वासমৰ্যাদা / বিশ্বাসযোগ্যতা
पाठ से (পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ)
प्रश्न 1. 'कश्मीरी सेब' कहानी को पढ़कर अपने शब्दों में सुनाओ।
कहानी का सार: एक शाम लेखक बाज़ार में फल खरीदने गए। वहाँ रंग-बिरंगे गुलाबी कश्मीरी सेब देखकर उनका मन ललचा गया। उन्होंने दुकानदार से आधा सेर सेब माँगे और अपना रुमाल देकर कहा कि अच्छे सेब चुनकर देना। घर आकर लेखक ने अगली सुबह जब सेब निकाले, तो देखा कि चारों सेब खराब थे—कोई सड़ा था, कोई पिचका था और कोई कीड़े लगा हुआ था। लेखक को अपने चार आने जाने का उतना दुःख नहीं हुआ, जितना दुकानदार की बेईमानी और समाज में गिरते नैतिक मूल्यों पर हुआ। यह कहानी हमें सिखाती है कि खरीदारी करते समय ग्राहकों को हमेशा सजग और सावधान रहना चाहिए।
प्रश्न 2. किसने कहा, किससे कहा?
(क) "बाबूजी, बड़े मजेदार सेब आए हैं।"
उत्तर: दुकानदार ने लेखक (प्रेमचंद) से कहा।

(ख) "सेब चुन-चुनकर रखना।"
उत्तर: लेखक (प्रेमचंद) ने दुकानदार से कहा।
प्रश्न 3. एक वाक्य में उत्तर लिखो:

(क) दुकान पर किस रंग के सेब सजे हुए थे?
उत्तर: दुकान पर बहुत अच्छे रंगदार, गुलाबी सेब सजे हुए थे।


(ख) बनारस किस आम के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: बनारस 'लंगड़े' आम के लिए प्रसिद्ध है।


(ग) लेखक ने दुकानदार से कितने सेब माँगे?
उत्तर: लेखक ने दुकानदार से आध सेर (आधा सेर) सेब माँगे।


(ঘ) लेखक ने दुकानदार को कितने पैसे दिए?
उत्तर: लेखक ने दुकानदार को चार आने पैसे दिए।


(ङ) फल खाने का उपयुक्त समय क्या है?
उत्तर: फल खाने का उपयुक्त समय प्रातःकाल (सुबह) है।

प्रश्न 4. संक्षेप में उत्तर लिखो:

(क) हमारे बदले हुए खाद्याभ्यास के बारे में लेखक का क्या विचार है?
उत्तर: लेखक का मानना है कि आजकल शिक्षित समाज में विटामिन और प्रोटीन को ध्यान में रखकर भोजन करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। पहले टमाटर और गाजर को कोई महत्व नहीं देता था, लेकिन अब पोषक तत्वों की जानकारी होने से वे भोजन का आवश्यक अंग बन गए हैं।


(ख) सेब खाने के क्या-क्या लाभ हैं?
उत्तर: सेब स्वाद और रस से भरपूर एक अत्यंत पौष्टिक फल है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन होते हैं। ऐसा माना जाता है कि रोज़ाना एक सेब खाने से डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।


(ग) लेखक ने प्रातःकाल खाने के लिए जब सेब निकाले तो वे किस हालत में मिले?
उत्तर: लेखक को चारों सेब खराब मिले:

  • पहला सेब एक रुपये के सिक्के के आकार में सड़ा हुआ था।
  • दूसरा सेब आधा सड़ा हुआ था।
  • तीसरा सेब एक तरफ से दबकर पिचक गया था।
  • चौथे सेब में काला सुराख था और अंदर कीड़े लगे बेर की तरह धब्बे थे।

(ঘ) दुकानदार को लेखक से बेईमानी करने का अवसर कैसे मिला?
उत्तर: लेखक ने स्वयं देखकर सेब लेने के बजाय अपना रुमाल निकालकर दुकानदार को दे दिया और कहा कि चुनकर रख देना। लेखक के इस ढीलेपन और अत्यधिक विश्वास को देखकर दुकानदार समझ गया कि ग्राहक आँख मूँदकर भरोसा कर रहा है, जिससे उसे बेईमानी करने का अवसर मिल गया।


(ङ) खोमचेवाले की ईमानदारी के बारे में लेखक ने क्या कहा है?
उत्तर: लेखक ने बताया कि एक बार मुहर्रम के मेले में उन्होंने एक खोमचेवाले से एक पैसे की रेवड़ियाँ ली थीं और भूलवश पैसे की जगह अठन्नी दे आए थे। जब वे वापस गए, तो खोमचेवाले ने सहर्ष अठन्नी लौटा दी और अपनी भूल के लिए क्षमा भी माँगी।


(च) इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बाज़ार में खरीदारी करते समय हमें हमेशा सतर्क और सावधान रहना चाहिए। आँख बंद करके दुकानदार पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि हमारी असावधानी ही दूसरों को बेईमानी करने का अवसर देती है।

प्रश्न 5. "चार पैसों का इतना गम न हुआ, जितना समाज के इस चारित्रिक पतन का।"- लेखक ने किस परिस्थिति में ऐसा कहा है?
उत्तर: जब लेखक ने देखा कि दुकानदार ने जान-बूझकर चारों के चारों सेब सड़े हुए दिए हैं, तब उन्होंने यह बात कही। लेखक को चार आने के आर्थिक नुकसान का उतना दुःख नहीं था, जितना इस बात का दुःख था कि व्यापारी वर्ग भी अब खुलेआम बेईमानी करने लगा है और समाज में नैतिकता व ईमानदारी का पतन हो रहा है।
प्रश्न 6. सत्य कथन के सामने (✓) और असत्य कथन के सामने (✗) का निशान लगाओ:
(क) गाजर में अधिक विटामिन पाया जाता है। ✓ सत्य
(ख) अल्फाँसो सेब की एक किस्म है। ✗ असत्य (आम की किस्म है)
(ग) फल खाने का सही समय रात है। ✗ असत्य
(ঘ) चौथे सेब में एक काला सूराख था। ✓ सत्य
(ङ) दुकानदार ने लेखक को बढ़िया सेब दिए थे। ✗ असत्य
(च) आदमी बेईमानी तभी करता है, जब उसे अवसर मिलता है। ✓ सत्य
(ছ) लेखक ने दुकानदार को सेब की कीमत के रूप में चार आने पैसे दिए थे। ✓ सत्य
(ज) एक सेब भी खाने लायक नहीं था। ✓ सत्य
(झ) सभी दुकानदार बेईमानी करते हैं। ✗ असत्य
(ञ) खोमचेवाले ने लेखक की अठन्नी नहीं लौटायी। ✗ असत्य
पाठ के आस-पास (সাৱধানতা আৰু আলোচনা)
प्रश्न 4. दुकानदार ग्राहकों को किस प्रकार ठगता है?
उत्तर: दुकानदार ग्राहकों को मुख्य रूप से इन तरीकों से ठगते हैं:
  1. नाप-तौल में कम देकर (बाट या तराजू में हेराफेरी करके)।
  2. ऊपर अच्छी वस्तुएँ और नीचे सड़ी-गली या घटिया वस्तुएँ रखकर।
  3. वस्तु की गुणवत्ता या समाप्ति तिथि (Expiry Date) छिपाकर।
  4. नकली सामान को असली बताकर अधिक मूल्य वसूलना।
  5. मीठी-मीठी बातों में फंसाकर बिना परखे सामान थमा देना।
प्रश्न 5. कोई वस्तु खरीदते समय हम ठगे न जाएँ- इसके लिए हमें क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तर: खरीदारी करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए:
  • सामान को स्वयं अच्छी तरह देख-परख कर ही खरीदना चाहिए।
  • पैकेट पर वजन, निर्माण तिथि (Mfg. Date), समाप्ति तिथि (Expiry Date) और MRP अवश्य देखना चाहिए।
  • दुकानदार के तौलते समय तराजू पर ध्यान रखना चाहिए।
  • हमेशा सामान की पक्की रसीद (Bill) लेनी चाहिए।
  • "जागो ग्राहक जागो" के तहत अपने उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
भाषा-अध्ययन (ভাষা আৰু ব্যাকৰণ)
प्रश्न 1. उदाहरण देखकर दिए गए शब्दों के विलोम शब्द से वाक्य बनाओ:

उदाहरण: सुबह = करीम शाम को घर लौटता है।


अमीर (विलोम: गरीब) = हमें गरीब लोगों की सहायता करनी चाहिए।

पश्चिम (विलोम: पूरब) = सूर्य पूरब दिशा में उगता है।

हानि (विलोम: लाभ) = समय पर काम करने से लाभ होता है।

आशा (विलोम: निराशा) = असफलता से मन में निराशा नहीं लानी चाहिए।

प्रश्न 2. गद्यांश से संज्ञा शब्द छाँटकर तालिका में लिखो:
व्यक्तिवाचक संज्ञाजातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञा
रामूगाँव, नदी, शहरभूख
गंगापेड़, आदमी, आमप्यास
-सिक्के, घड़ा, पानी, भीड़मिठास
प्रश्न 3. अनुच्छेद से विशेषण शब्द छाँटकर उनके भेद लिखो:
क्र.सं.विशेषण शब्दविशेषण का भेद
1अच्छागुणवाचक विशेषण
2मधुरगुणवाचक विशेषण
3बारहनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
4अच्छीगुणवाचक विशेषण
5बढ़ियागुणवाचक विशेषण
6कईअनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
प्रश्न 4. पुनरुक्त क्रिया पदों से वाक्य बनाओ:

खा-खाकर: राम खा-खाकर मोटा हो गया है।

रो-रोकर: बच्चे ने रो-रोकर अपनी आँखें लाल कर लीं।

दौड़-दौड़कर: डाकिया दौड़-दौड़कर समय पर पत्र पहुँचाता है।

बोल-बोलकर: शिक्षक ने बोल-बोलकर बच्चों को पाठ सिखाया।

मार-मारकर: शिकारी ने मार-मारकर जंगली जानवर को भगा दिया।

रह-रहकर: आज सुबह से रह-रहकर बारिश हो रही है।

प्रश्न 5. कोष्ठक में दिए गए विशेषण शब्दों से रिक्त स्थान भरो:
पांडव पाँच भाई थे। एक दिन गर्मी के दिनों में घने वन में पांडवों को बहुत जोर की प्यास लगी। आस-पास ऊँचे वृक्षों के कारण दूर तक देखना मुश्किल था। थोड़ी दूर पर जल का अभाव था। तब नकुल ने एक बड़े पेड़ पर चढ़कर देखा कि दूर पर जल से भरा एक बड़ा तालाब है। उसे दूर से उड़कर आता एक छोटा पक्षी दिखाई दिया।
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