• जन्म: 1880 ई., लमही गाँव (वाराणसी/काशी)
• मूल नाम: धनपत राय (पिताजी प्यार से नवाब राय कहते थे)
• रचनाएँ: लगभग 300 कहानियाँ और 14 उपन्यास
• प्रमुख उपन्यास: गोदान, सेवासदन, गबन, निर्मला, कर्मभूमि आदि
• प्रमुख कहानियाँ: ईदगाह, पूस की रात, कफ़न, बूढ़ी काकी, पंच परमेश्वर आदि
• मृत्यु: 1936 ई.
| शब्द | अर्थ (Hindi) | অসমীয়া অৰ্থ |
|---|---|---|
| चौक | चौराहा | চাৰিআলি |
| मेवाफरोश | फल बेचने वाला | ফল বেপাৰী |
| सेंत | मुफ्त / बिना मूल्य के | বিনামূলীয়া / ফ্ৰী |
| नीमकौड़ी | नीम का फल | নিম গছৰ গুটি |
| तबीयत खुश होना | बहुत आनंद आना | মন আনন্দিত হোৱা |
| लौंडा | दुकान में काम करने वाला लड़का | দোকানৰ ল’ৰা / কৰ্মচাৰী |
| कायदा | नियम / तरीका | নিয়ম / পদ্ধতি |
| सुराख | छेद | ফুটা / বিন্ধা |
| किड़हे | कीड़े लगे हुए | পোক লগা |
| गम | दुःख / अफ़सोस | দুখ / মনস্তাপ |
| चौकस | सावधान / सतर्क | সাৱধান / সজাগ |
| भाँप लिया | समझ लिया / ताड़ लिया | বুজি পালে / উমান পালে |
| दुर्गति | दुर्दशा / बुरी हालत | দুৰ্দশা / বেয়া অৱস্থা |
| साख | प्रतिष्ठा / विश्वास | মৰ্যাদা / বিশ্বাসযোগ্যতা |
उत्तर: दुकानदार ने लेखक (प्रेमचंद) से कहा।
(ख) "सेब चुन-चुनकर रखना।"
उत्तर: लेखक (प्रेमचंद) ने दुकानदार से कहा।
(क) दुकान पर किस रंग के सेब सजे हुए थे?
उत्तर: दुकान पर बहुत अच्छे रंगदार, गुलाबी सेब सजे हुए थे।
(ख) बनारस किस आम के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: बनारस 'लंगड़े' आम के लिए प्रसिद्ध है।
(ग) लेखक ने दुकानदार से कितने सेब माँगे?
उत्तर: लेखक ने दुकानदार से आध सेर (आधा सेर) सेब माँगे।
(ঘ) लेखक ने दुकानदार को कितने पैसे दिए?
उत्तर: लेखक ने दुकानदार को चार आने पैसे दिए।
(ङ) फल खाने का उपयुक्त समय क्या है?
उत्तर: फल खाने का उपयुक्त समय प्रातःकाल (सुबह) है।
(क) हमारे बदले हुए खाद्याभ्यास के बारे में लेखक का क्या विचार है?
उत्तर: लेखक का मानना है कि आजकल शिक्षित समाज में विटामिन और प्रोटीन को ध्यान में रखकर भोजन करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। पहले टमाटर और गाजर को कोई महत्व नहीं देता था, लेकिन अब पोषक तत्वों की जानकारी होने से वे भोजन का आवश्यक अंग बन गए हैं।
(ख) सेब खाने के क्या-क्या लाभ हैं?
उत्तर: सेब स्वाद और रस से भरपूर एक अत्यंत पौष्टिक फल है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन होते हैं। ऐसा माना जाता है कि रोज़ाना एक सेब खाने से डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
(ग) लेखक ने प्रातःकाल खाने के लिए जब सेब निकाले तो वे किस हालत में मिले?
उत्तर: लेखक को चारों सेब खराब मिले:
- पहला सेब एक रुपये के सिक्के के आकार में सड़ा हुआ था।
- दूसरा सेब आधा सड़ा हुआ था।
- तीसरा सेब एक तरफ से दबकर पिचक गया था।
- चौथे सेब में काला सुराख था और अंदर कीड़े लगे बेर की तरह धब्बे थे।
(ঘ) दुकानदार को लेखक से बेईमानी करने का अवसर कैसे मिला?
उत्तर: लेखक ने स्वयं देखकर सेब लेने के बजाय अपना रुमाल निकालकर दुकानदार को दे दिया और कहा कि चुनकर रख देना। लेखक के इस ढीलेपन और अत्यधिक विश्वास को देखकर दुकानदार समझ गया कि ग्राहक आँख मूँदकर भरोसा कर रहा है, जिससे उसे बेईमानी करने का अवसर मिल गया।
(ङ) खोमचेवाले की ईमानदारी के बारे में लेखक ने क्या कहा है?
उत्तर: लेखक ने बताया कि एक बार मुहर्रम के मेले में उन्होंने एक खोमचेवाले से एक पैसे की रेवड़ियाँ ली थीं और भूलवश पैसे की जगह अठन्नी दे आए थे। जब वे वापस गए, तो खोमचेवाले ने सहर्ष अठन्नी लौटा दी और अपनी भूल के लिए क्षमा भी माँगी।
(च) इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बाज़ार में खरीदारी करते समय हमें हमेशा सतर्क और सावधान रहना चाहिए। आँख बंद करके दुकानदार पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि हमारी असावधानी ही दूसरों को बेईमानी करने का अवसर देती है।
- नाप-तौल में कम देकर (बाट या तराजू में हेराफेरी करके)।
- ऊपर अच्छी वस्तुएँ और नीचे सड़ी-गली या घटिया वस्तुएँ रखकर।
- वस्तु की गुणवत्ता या समाप्ति तिथि (Expiry Date) छिपाकर।
- नकली सामान को असली बताकर अधिक मूल्य वसूलना।
- मीठी-मीठी बातों में फंसाकर बिना परखे सामान थमा देना।
- सामान को स्वयं अच्छी तरह देख-परख कर ही खरीदना चाहिए।
- पैकेट पर वजन, निर्माण तिथि (Mfg. Date), समाप्ति तिथि (Expiry Date) और MRP अवश्य देखना चाहिए।
- दुकानदार के तौलते समय तराजू पर ध्यान रखना चाहिए।
- हमेशा सामान की पक्की रसीद (Bill) लेनी चाहिए।
- "जागो ग्राहक जागो" के तहत अपने उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
उदाहरण: सुबह = करीम शाम को घर लौटता है।
• अमीर (विलोम: गरीब) = हमें गरीब लोगों की सहायता करनी चाहिए।
• पश्चिम (विलोम: पूरब) = सूर्य पूरब दिशा में उगता है।
• हानि (विलोम: लाभ) = समय पर काम करने से लाभ होता है।
• आशा (विलोम: निराशा) = असफलता से मन में निराशा नहीं लानी चाहिए।
| व्यक्तिवाचक संज्ञा | जातिवाचक संज्ञा | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|---|
| रामू | गाँव, नदी, शहर | भूख |
| गंगा | पेड़, आदमी, आम | प्यास |
| - | सिक्के, घड़ा, पानी, भीड़ | मिठास |
| क्र.सं. | विशेषण शब्द | विशेषण का भेद |
|---|---|---|
| 1 | अच्छा | गुणवाचक विशेषण |
| 2 | मधुर | गुणवाचक विशेषण |
| 3 | बारह | निश्चित संख्यावाचक विशेषण |
| 4 | अच्छी | गुणवाचक विशेषण |
| 5 | बढ़िया | गुणवाचक विशेषण |
| 6 | कई | अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण |
• खा-खाकर: राम खा-खाकर मोटा हो गया है।
• रो-रोकर: बच्चे ने रो-रोकर अपनी आँखें लाल कर लीं।
• दौड़-दौड़कर: डाकिया दौड़-दौड़कर समय पर पत्र पहुँचाता है।
• बोल-बोलकर: शिक्षक ने बोल-बोलकर बच्चों को पाठ सिखाया।
• मार-मारकर: शिकारी ने मार-मारकर जंगली जानवर को भगा दिया।
• रह-रहकर: आज सुबह से रह-रहकर बारिश हो रही है।