पाठ 5 - जीना-जिलाना मत भूलना | सरल प्रश्न-उत्तर
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पाठ-5 : जीना-जिलाना मत भूलना

डॉ. अच्युत शर्मा • सरल एवं सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर

कविता का सार

कवि प्रकृति के विभिन्न रूपों के माध्यम से मनुष्य को उसके कर्तव्य याद दिलाते हैं। सूर्य ज्ञान और आशा की रोशनी फैलाने, चाँद सेवा व परोपकार की चाँदनी बिखेरने, पेड़ छाया देने, पक्षी मीठा बोलने, फूल प्रेम बाँटने, भौंरे गलतियाँ न गिनने, नदियाँ आगे बढ़ते रहने और हवाएँ दूसरों को जीवन देने की सीख देती हैं। संकट आने पर भी स्वयं हँसना और दूसरों को हँसाना तथा अपने साथ दूसरों को भी जीने में सहायता करना ही कविता का मूल संदेश है।

🌸 पाठ से

1. कविता का हाव-भाव के साथ वाचन करो।

सुझावकविता को स्पष्ट उच्चारण, उचित लय और प्रसन्न भाव के साथ पढ़ें। “मत भूलना” पर प्रेरणात्मक भाव रखें।

2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) तरह-तरह के पक्षी हमसे क्या कहते हैं?

उत्तरतरह-तरह के पक्षी हमसे चहक-चहक कर मीठा गाना और मधुर बोलना न भूलने को कहते हैं।

(ख) रंग-बिरंगे फूल हमें क्या बताते हैं?

उत्तररंग-बिरंगे फूल हमें खिल-खिल कर सभी में प्यार बाँटने की सीख देते हैं।

(ग) हमारे लिए भौंरों का संदेश क्या है?

उत्तरभौंरे हमें मिल-जुलकर रहने और दूसरों की गलतियाँ गिनाने से बचने का संदेश देते हैं।

(घ) बढ़ती हुई नदियाँ हमें कौन-सा उपदेश देती हैं?

उत्तरबढ़ती हुई नदियाँ हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का उपदेश देती हैं।

(ङ) ‘जीना-जिलाना मत भूलना’ कविता के कवि कौन हैं?

उत्तरइस कविता के कवि डॉ. अच्युत शर्मा हैं।

3. सोचो और संक्षेप में उत्तर दो

(क) सवेरे पूर्व दिशा में उदित होकर सूरज हमें क्या करने के लिए कहता है?

उत्तरसूरज हमें ज्ञान, आशा और अच्छाई की रोशनी फैलाने के लिए कहता है।

(ख) रात को चमकता चाँद हमें किस कर्तव्य की याद दिलाता है?

उत्तरचाँद हमें सेवा, प्रेम और परोपकार की चाँदनी सब ओर फैलाने का कर्तव्य याद दिलाता है।

(ग) हरे-भरे पेड़-पौधे हमें क्या संदेश देते हैं?

उत्तरपेड़-पौधे हमें दूसरों को सुख, सुरक्षा और आराम की छाया देने का संदेश देते हैं।

(घ) बहती हुई हवाएँ हमें क्या करने को कहती हैं?

उत्तरबहती हवाएँ हमें दूसरों को जीवन देने और उनकी सहायता करने को कहती हैं।

4. पंक्तियों का सरल अर्थ

“कहती प्रकृति, आए विपत्ति
हँसना-हँसाना मत भूलना,
चलें गोलियाँ, फटें गोले
जीना-जिलाना मत भूलना।”

सरल अर्थप्रकृति कहती है कि जीवन में कैसी भी आपदा या कठिनाई आए, हमें साहस और प्रसन्नता नहीं छोड़नी चाहिए। युद्ध जैसी भयंकर स्थिति में भी स्वयं जीने के साथ दूसरों के जीवन की रक्षा और सहायता करना नहीं भूलना चाहिए।

5. कविता का मूल भाव स्पष्ट करो।

उत्तरकविता का मूल भाव है कि मनुष्य प्रकृति से परोपकार, प्रेम, मधुरता, निरंतर आगे बढ़ना और संकट में साहस बनाए रखना सीखे। केवल अपने लिए जीना पर्याप्त नहीं; हमें दूसरों को भी सुखी और सुरक्षित जीवन जीने में सहायता करनी चाहिए।

🤝 पाठ के आस-पास

1. “प्रकृति एक खुली पुस्तक है”—चर्चा।

उत्तरप्रकृति के हर रूप से कुछ सीखा जा सकता है। सूर्य परिश्रम, नदी निरंतरता, वृक्ष परोपकार, फूल प्रेम और पक्षी मधुरता की शिक्षा देते हैं। इसलिए प्रकृति को खुली पुस्तक कहा गया है।

2. आसपास के प्राकृतिक उपकरणों को प्राणी और अप्राणी में बाँटो।

प्राणीअप्राणी
मनुष्य, पशु, पक्षी, कीट, पेड़-पौधेसूर्य, चाँद, जल, हवा, मिट्टी, पत्थर

3. तितली और जुगनू हमें किन कर्तव्यों की याद दिलाते हैं?

तितली रंगों से कहती—
जीवन सुंदर तुम बनाओ।
जुगनू अँधेरे में कहता—
आशा का दीप जलाओ।

4. प्राकृतिक और मानव-सर्जित आपदाएँ।

उत्तरबाढ़, भूकंप, चक्रवात और भूस्खलन प्राकृतिक आपदाएँ हैं। युद्ध, आगजनी, प्रदूषण और लापरवाही से हुई दुर्घटनाएँ मानव-सर्जित आपदाएँ हैं। आपदा के समय शांत रहना, सुरक्षित स्थान पर जाना, प्रशासन की सलाह मानना और जरूरतमंदों की सहायता करना चाहिए।

5. “जिओ और जिलाओ” पर विचार।

उत्तरमनुष्य को अपने जीवन के साथ दूसरों के जीवन, अधिकार और सुख का भी सम्मान करना चाहिए। प्रेम, सहयोग और सेवा से ही समाज शांतिपूर्ण और सुंदर बनता है।

✍️ भाषा-अध्ययन

1. दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखो।

सवेराप्रातः, प्रभातसूरजरवि, सूर्य
चाँदशशि, चंद्रमापेड़वृक्ष, तरु
पक्षीखग, पंछीफूलपुष्प, सुमन
भौंराभ्रमर, मधुकरनदीसरिता, तटिनी
हवावायु, पवन

2. शब्दों का वाक्य में प्रयोग करो।

चमक-चमक कर: तारे चमक-चमक कर आकाश सजाते हैं।
चहक-चहक कर: पक्षी चहक-चहक कर सुबह का स्वागत करते हैं।
खिल-खिल कर: बगीचे में फूल खिल-खिल कर मुसकराते हैं।
हिल-मिल कर: हमें हिल-मिल कर रहना चाहिए।

3. प्रेरणार्थक क्रिया के वाक्य।

शिक्षक बच्चों को कविता दिखाते हैं। माँ बच्चे को चलना सिखाती है। अध्यापक विद्यार्थियों से पत्र लिखवाते हैं। मालिक मजदूरों को तेजी से भगाता है। गुरु बच्चों को नृत्य नचाते हैं।

4. क्रिया के अनुज्ञा रूप

सामान्यमध्यम आदरअधिक आदर
तू बाजार जा।तुम बाजार जाओ।आप बाजार जाइए।
तू खाना खा।तुम खाना खाओ।आप खाना खाइए।
तू पढ़।तुम पढ़ो।आप पढ़िए।

5. वर्तमान काल के भेद

भेदउदाहरण
सामान्य वर्तमानलड़का स्कूल जाता है।
तात्कालिक वर्तमानलड़का स्कूल जा रहा है।
संदिग्ध वर्तमानलड़का स्कूल जाता होगा।

⭐ योग्यता-विस्तार

1. हँसी का महत्त्व

उत्तरहँसी तनाव कम करती है, मन प्रसन्न रखती है और लोगों को जोड़ती है। विद्यालय या मोहल्ले में ‘लाफिंग क्लब’ बनाकर सुबह व्यायाम और हँसी का अभ्यास किया जा सकता है।

2. फ्लोरेंस नाइटिंगेल और मदर टेरेसा

उत्तरफ्लोरेंस नाइटिंगेल ने घायल और बीमार लोगों की सेवा की तथा आधुनिक नर्सिंग को नई दिशा दी। मदर टेरेसा ने गरीब, बीमार और असहाय लोगों की निःस्वार्थ सेवा की। दोनों का जीवन हमें मानव-सेवा की प्रेरणा देता है।

📚 शब्दार्थ

जिलानादूसरे को जीने की प्रेरणा/मदद देनाविपत्तिआपदा, परेशानी
उगकरउदित होकरगोलेगोलाकार मारणास्त्र
सूरजसूर्यउपकरणसाधन
रोशनीप्रकाश, उजियालानिरंतरलगातार
छाँवछायासंकटआपदा, कठिनाई
बढ़ती-बढ़तीआगे बढ़ती हुईचलें गोलियाँ, फटें गोलेमानव द्वारा सर्जित आपदाओं का आना

कविता की शिक्षा

प्रकृति की तरह उदार बनें—ज्ञान की रोशनी फैलाएँ, प्रेम बाँटें, दूसरों को सहारा दें और कठिन समय में भी साहस रखते हुए जीवन बचाने का प्रयास करें।

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