पाठ 15 - तुम कब जाओगे, अतिथि | सरल प्रश्न-उत्तर
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पाठ-15 : तुम कब जाओगे, अतिथि

सरल एवं सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर

पाठ का सार

शरद जोशी का यह व्यंग्य लंबे समय तक घर में टिके रहने वाले अतिथि और गृहस्थ की कठिनाई को दिखाता है। अतिथि के आने पर लेखक और उनकी पत्नी प्रेम से स्वागत करते हैं तथा विशेष भोजन बनाते हैं। अतिथि चौथे और पाँचवें दिन भी नहीं जाता, तो उत्साह धीरे-धीरे खीझ, मौन और निराशा में बदल जाता है। लेखक मानते हैं कि अतिथि देवता होता है, लेकिन उसे उचित समय पर लौट जाना चाहिए। पाठ दूसरों की सुविधा और मर्यादा का ध्यान रखने की सीख देता है।

🌸 पाठ से

1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) लेखक अतिथि को दिखाकर कैलेंडर की तारीखें क्यों बदल रहे थे?

उत्तरलेखक अतिथि को बीते दिनों का एहसास दिलाकर उसके लौटने का संकेत देने के लिए कैलेंडर की तारीखें बदल रहे थे।

(ख) लेखक तथा उनकी पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया?

उत्तरलेखक ने अतिथि को स्नेह से गले लगाया और उनकी पत्नी ने सादर नमस्ते की। दोनों ने खुशी और सम्मान से उसका स्वागत किया।

(ग) मेहमान के स्वागत में दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा दी गई?

उत्तरदोपहर के भोजन को उच्च-मध्यम वर्गीय डिनर की गरिमा दी गई। दो सब्जियाँ, रायता और मिठाई भी बनाई गई।

(घ) तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?

उत्तरतीसरे दिन अतिथि ने कहा, “मैं धोबी को कपड़े देना चाहता हूँ।”

(ङ) सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो जाने पर क्या हुआ?

उत्तरसत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर बातचीत बंद हो गई, हँसी गायब हो गई और भोजन खिचड़ी तक पहुँच गया। घर का वातावरण बोझिल हो गया।

2. संक्षेप में उत्तर दो

(क) मेहमान के आते ही लेखक पर क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तरलेखक के मन में थोड़ी आशंका हुई और उनका बटुआ काँप उठा, फिर भी उन्होंने मुस्कराकर अतिथि को गले लगाया।

(ख) रात के भोजन को किस प्रकार गरिमापूर्ण बनाया गया?

उत्तरभोजन में दो सब्जियों और रायते के साथ मिठाई बनाई गई। इस प्रकार साधारण भोजन को विशेष डिनर जैसा बनाया गया।

(ग) लेखक के लिए कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और क्यों?

उत्तरअतिथि का तीसरे दिन कपड़े धोबी को देने की इच्छा जताना अप्रत्याशित था। इससे साफ था कि वह अभी कई दिन और रहने वाला है।

(घ) लेखक का सौहार्द धीरे-धीरे क्यों बदल गया?

उत्तरअतिथि के उचित समय पर न लौटने से घर की दिनचर्या, खर्च और निजी स्वतंत्रता प्रभावित हुई। इसलिए लेखक का सौहार्द खीझ और निराशा में बदल गया।

(ङ) अतिथि कब देवता होता है और कब राक्षस हो जाता है?

उत्तरअतिथि थोड़े समय के लिए आकर मर्यादा में रहे तो देवता होता है। आवश्यकता से अधिक रुककर गृहस्थ को असुविधा दे तो वह बोझ या राक्षस जैसा लगने लगता है।

3. उत्तर दो

(क) लेखक ने अतिथि को विदा लेने का संकेत किन-किन उपायों से दिया?

उत्तरलेखक ने कैलेंडर की तारीखें बदलकर दिन गिनाए, अतिथि के कपड़े लॉन्ड्री में देने की बात की, बातचीत कम की, विशेष भोजन बंद किया और खिचड़ी बनवाई। इनसे वे चाहते थे कि अतिथि लौटने का संकेत समझे।

(ख) अपेक्षा से अधिक रुकने पर लेखक के मन की प्रतिक्रियाएँ क्रम से लिखो।

उत्तरपहले हल्की आशंका हुई; फिर स्वागत और उत्साह रहा; दूसरे दिन तक विदाई की आशा रही; तीसरे दिन चिंता और भय बढ़े; चौथे दिन मौन, खीझ और चिढ़ पैदा हुई; पाँचवें दिन लेखक निराश होकर अतिथि से जाने की विनती करने लगा।

🤝 पाठ के आस-पास

1. घर में अतिथि आने पर आरंभिक बातचीत कैसी होती है?

गृहस्वामी: नमस्ते! आइए, आपका स्वागत है। यात्रा आरामदायक रही?
अतिथि: नमस्ते! यात्रा अच्छी रही। आप सब कैसे हैं?
गृहस्वामी: हम सब ठीक हैं। पहले हाथ-मुँह धो लीजिए, फिर चाय लेते हैं।
अतिथि: धन्यवाद। बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है?
गृहस्वामी: अच्छी चल रही है। घर में सभी आपकी प्रतीक्षा कर रहे थे।

⭐ योग्यता-विस्तार

1. अतिथि से संबंधित लोककथाएँ या कहावतें।

  • अतिथि देवो भवः।
  • मेहमान भगवान का रूप होता है।
  • अतिथि का सम्मान घर की शोभा बढ़ाता है।
  • समय पर आया अतिथि आनंद देता है, अधिक ठहरा अतिथि कठिनाई देता है।

2. घर के कामों की सूची और सदस्य।

काममैंदादीमाँपिताभाईबहन
घर का सामान लाना
घर की सफाई करना
खाना पकाना

यह केवल नमूना है। विद्यार्थी अपने परिवार के अनुसार निशान लगाएँ।

✍️ भाषा-अध्ययन

1. वाक्यों को निर्देशानुसार बदलो।

मूल वाक्यपरिवर्तित वाक्य
हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने जाएँगे।हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने नहीं जाएँगे। (नकारात्मक)
किसी लॉन्ड्री पर दे देंगे।क्या किसी लॉन्ड्री पर दे देंगे? (प्रश्नवाचक)
देवता और मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते।देवता और मनुष्य थोड़े समय तक साथ रहते हैं। (सकारात्मक)

2. ‘चुका/चुकी/चुके’ क्रिया का प्रयोग।

‘चुका’ क्रिया मुख्य कार्य के पूर्ण हो जाने का बोध कराती है और कर्ता के लिंग-वचन के अनुसार बदलती है।

  • तुम अपने भारी चरण-कमलों की छाप मेरी जमीन पर अंकित कर चुके
  • तुम मेरी काफी मिट्टी खोद चुके
  • हम तुम्हें आदर-सत्कार के उच्च बिंदु पर ले जा चुके थे।
  • शब्दों का लेन-देन मिट चुका और चर्चा के विषय चुक गए

नए वाक्य: मैं खाना खा चुका हूँ। सीमा गृहकार्य कर चुकी है। बच्चे खेल चुके हैं।

📚 शब्दार्थ

सतत - लगातारसामीप्य - निकटता
एस्टोनॉट्स - अंतरिक्ष यात्रीऔपचारिक - रीति के अनुसार
बैंगनी - बैंगन के रंग वालानिर्मूल - बिना मूल या जड़ के
मेहमाननवाजी - आतिथ्य-सत्कारकोनों से सौहार्द - किनारों से सद्भाव
छोर - किनारा या सीमाशनैः-शनैः - धीरे-धीरे
भावभीनी - भाव से पूर्णगुंजायमान - गूँजता हुआ
मार्मिक - मर्मस्पर्शीऊष्मा - गर्मजोशी
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