चिड़िया की बच्ची
अभ्यासमाला : प्रश्नोत्तर
1. सही विकल्प का चयन करो :
(क) सेठ माधवदास ने संगमरमर की क्या बनवाई है ?
(1) कोठी (2) मूर्त्ति (3) मंदिर (4) स्मारक
उत्तर: (1) कोठी
(ख) किसकी डाली पर एक चिड़िया आन बैठी ?
(1) जूही (2) गुलाब (3) बेला (4) चमेली
उत्तर: (2) गुलाब
(ग) चिड़िया के पंख ऊपर से चमकदार और ______ थे।
(1) सफेद (2) स्याह (3) लाल (4) पीला
उत्तर: (2) स्याह
(घ) चिड़िया से बात करते-करते सेठ ने एकाएक दबा दिया ______
(1) हाथ (2) पाँव (3) बटन (4) हुक्का
उत्तर: (3) बटन
2. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :
(क) सेठ माधवदास की अभिरुचियों के बारे में बताओ।
सेठ माधवदास को कला, सुंदरता और प्रकृति से गहरा प्रेम था। उन्हें सुंदर फूल-पौधे, फव्वारों में उछलता पानी देखना और शाम को बगीचे में बैठकर प्रकृति की छटा निहारना अत्यंत प्रिय था।
(ख) शाम के समय सेठ माधवदास क्या-क्या करते हैं ?
शाम के समय सेठ माधवदास कोठी के बाहर चबूतरे पर गलीचे और मसनद के सहारे बैठकर प्रकृति की सुंदरता निहारते हैं, मित्रों से बातचीत करते हैं या हुक्के की सटक मुँह में लिए ख्यालों में खोए रहते हैं।
(ग) चिड़िया के रंग-रूप के बारे में क्या जानते हो ?
चिड़िया अत्यंत सुंदर थी। उसकी गरदन लाल थी जो किनारों पर हल्की नीली हो गई थी। पंख ऊपर से चमकदार स्याह (काले) थे और उसके नन्हें शरीर पर विचित्र व सुंदर रंग-बिरंगी चित्रकारी थी।
(घ) चिड़िया किस बात से डरी रही थी ?
चिड़िया सेठ माधवदास की महलों, सोने और प्रलोभनों भरी अनजान बातों से डर रही थी, क्योंकि वह केवल अपनी माँ को जानती थी और अँधेरा होने से पहले अपनी माँ के पास घोंसले में पहुँचना चाहती थी।
(ङ) ‘तू सोना नहीं जानती, सोना ? उसी की जगत को तृष्णा है।’ आशय स्पष्ट करो।
इसका आशय यह है कि संसार का प्रत्येक मनुष्य धन-दौलत और सोने को पाने के लिए लालायित रहता है। सेठ माधवदास चिड़िया को सोने का सांसारिक महत्व बताकर उसे अपने पास पिंजरे में कैद करने का प्रयास कर रहे थे।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :
(क) किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था ?
संपन्नता के प्रमाण: माधवदास के पास संगमरमर की नई आलीशान कोठी, फव्वारों से सजा सुंदर विशाल बगीचा, ढेर सारा सोना-चाँदी, मोती और अनेक दास-दासियों की सुविधा थी।
अकेलेपन व असंतुष्टि के प्रमाण: उनका विशाल महल भीतर से सूना और वीरान था। शाम को वे अकेले मसनद के सहारे बैठकर खालीपन महसूस करते थे। उनके जीवन में सच्चा पारिवारिक सुख और आत्मीयता नहीं थी।
(ख) सेठ माधवदास चिड़िया को क्या-क्या प्रलोभन दे रहा था ?
सेठ माधवदास चिड़िया को अपने पास रोकने के लिए निम्नलिखित प्रलोभन दे रहे थे:
वह उसके रहने के लिए दुनिया का सबसे सुंदर सोने का पिंजरा बनवा देंगे जिसमें मोतियों की झालर लटकेगी।
पानी पीने के लिए सोने की कटोरी देंगे।
उसे बगीचे के रंग-बिरंगे फूलों और पूरे महल की रानी बना देंगे तथा उसे धन-दौलत से मालामाल कर देंगे।
(ग) माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है ? क्या माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था ?
माधवदास चिड़िया की चंचलता, सुंदरता और मासूमियत पर मुग्ध होकर उसे अपनी कोठी में कैद करना चाहते थे ताकि उनका सूनापन दूर हो सके। माधवदास बिल्कुल भी निःस्वार्थ मन से ऐसा नहीं कह रहे थे। वे चिड़िया को बातों में उलझाकर और मीठी-मीठी बातों का लालच देकर अपने स्वार्थ के लिए पिंजरे में बंदी बनाना चाहते थे।
4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) :
(क) सेठ माधवदास और चिड़िया के मनोभावों में क्या अंतर हैं ? कहानी के आधार पर स्पष्ट करो।
सेठ माधवदास के मनोभाव: सेठ माधवदास भौतिकवादी, अहंकारी और स्वार्थी मानसिकता के प्रतीक हैं। उनका मानना है कि धन, सोने और ऐश्वर्य के बल पर संसार के किसी भी जीव की स्वतंत्रता को खरीदा जा सकता है। उनका तथाकथित प्रेम स्वार्थ से भरा है, जिसमें वे केवल अपने खालीपन और मनोरंजन के लिए चिड़िया को बंधक बनाना चाहते हैं।
चिड़िया के मनोभाव: नन्ही चिड़िया अत्यंत भोली, निश्छल, मासूम और प्रकृति-प्रेमी है। उसके लिए धन, सोने का पिंजरा और महलों का कोई मूल्य नहीं है। उसके लिए माँ का वात्सल्य, खुली हवा, सूरज की सुनहरी धूप, पेड़ों की डालियाँ और उड़ने की आजादी ही सबसे बड़ा सुख है। वह किसी भी लालच में अपनी स्वतंत्रता नहीं खोना चाहती।
(ख) कहानी के अंत में नन्ही चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा ? अपने विचार लिखो।
कहानी के अंत में जब नन्ही चिड़िया सेठ के नौकर के कठोर और क्रूर पंजे से छिटककर फुर्र से उड़ जाती है, तो हमें असीम संतोष, राहत और खुशी की अनुभूति होती है। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि छल-कपट और अहंकार पर मासूमियत तथा स्वतंत्रता की जीत होती है। यदि चिड़िया नौकर की पकड़ में आ जाती, तो वह सोने के पिंजरे में घुट-घुटकर अपनी चहचहाहट और जीवन खो देती। चिड़िया का उड़कर सीधे अपनी माँ की गोद में पहुँचना और सुरक्षित हो जाना अत्यंत मार्मिक एवं सुखद अंत प्रस्तुत करता है।
(ग) ‘माँ मेरी बाट देखती होगी’ नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है। अपने अनुभव के आधार पर बताओ कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्व है ?
हमारी जिंदगी में माँ का स्थान सर्वोपरि, पवित्र और अनुपमेय है। माँ ही संतान की प्रथम गुरु, सच्ची रक्षक और सबसे सुरक्षित आश्रय होती है। संसार की समस्त धन-दौलत, महल और ऐश्वर्य भी माँ के आंचल और निस्वार्थ प्रेम की बराबरी नहीं कर सकते। संकट, भय और निराशा के समय केवल माँ की गोद ही सबसे बड़ा ढाढ़स और शांति प्रदान करती है। जिस प्रकार नन्ही चिड़िया सेठ के अपार वैभव को ठुकराकर केवल अपनी माँ की गोद में सुकून पाती है, उसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य के जीवन की वास्तविक सुरक्षा और सच्ची खुशी माँ के सानिध्य में ही निहित होती है।
(घ) क्या माधवदास के बनाए सोने के पिंजरे में चिड़िया सुख से रह सकती थी ? एक पक्षी के लिए पिंजरे का क्या महत्व है ?
माधवदास के बनाए सोने के पिंजरे में चिड़िया कभी भी सुखी नहीं रह सकती थी। पक्षियों का वास्तविक जीवन खुले गगन में स्वच्छंद उड़ना, नदियों का बहता शीतल जल पीना, पेड़ों की डालियों पर झूलना और कड़वी निंबौरियाँ खाकर भी मस्ती में चहचहाना है। पिंजरा चाहे लोहे का हो या बेशकीमती सोने का, वह अंततः परतंत्रता और गुलामी का ही प्रतीक होता है। किसी भी पक्षी के लिए पिंजरा उसकी उड़ने की क्षमता, प्राकृतिक आनंद और जीवन की स्वतंत्रता को छीनने वाला कारागार मात्र होता है।
5. किसने, किससे और कब कहा ?
(क) “यह बगीचा मैंने तुम्हारे लिए ही बनवाया है।”
उत्तर: यह सेठ माधवदास ने नन्ही चिड़िया से तब कहा, जब चिड़िया पहली बार उनके बगीचे में गुलाब की डाली पर आकर बैठी थी।
(ख) “मैं अभी चली जाऊँगी। बगीचा आपका है। मुझे माफ करें।”
उत्तर: यह नन्ही चिड़िया ने सेठ माधवदास से तब कहा, जब उसे पता चला कि वह बगीचा सेठ का है और वह संकोच व डर से उड़ने लगी थी।
(ग) “सोने का एक बहुत सुन्दर घर मैं तुम्हें बना दूँगा।”
उत्तर: यह सेठ माधवदास ने नन्ही चिड़िया से उसे अपने महल में रोकने और लालच देने के उद्देश्य से कहा था।
(घ) “क्या है मेरी बच्ची, क्या है ?”
उत्तर: यह चिड़िया की माँ ने नन्ही चिड़िया से तब कहा, जब चिड़िया नौकर के पंजे से बचकर रोती-सुबकती हुई उसकी छाती से चिपक गई थी।
5. भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. ‘पर’ शब्द के तीन अलग-अलग अर्थों/उद्देश्यों में वाक्य प्रयोग :
पाठ में ‘पर’ शब्द का प्रयोग 3 अलग-अलग अर्थों में हुआ है:
अधिकरण कारक (ऊपर / स्थान के अर्थ में): मेज पर सुंदर फूलदान रखा है।
पंख के अर्थ में: पक्षी खुले आकाश में अपने पर फैलाकर उड़ रहे हैं।
लेकिन / किंतु (समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय के अर्थ में): मैंने उसे बहुत समझाया, पर वह नहीं माना।
2. वर्तमान मानक खड़ीबोली रूप वाले शब्दों की खोज :
पाठ के शब्द | वर्तमान मानक रूप |
|---|---|
तैंने | तूने |
छनभर | क्षणभर |
खुश करियो | खुश करना |
बहुतेरी | बहुत-सी / अत्यधिक |
उजेला | उजाला |
जतन | यत्न / प्रयत्न |
3. कारक और उनके विभक्ति चिह्न (परसर्ग) :
पाठ का उदाहरण वाक्य: “मैं माँ के पास जा रही हूँ, सूरज की धूप खाने और हवा से खेलने और फूलों से बात करने। मैं जरा घर से उड़ आयी थी।”
पाठ से चुने गए प्रमुख कारक और विभक्ति चिह्न:
ने (माधवदास ने, सेठ ने) → कर्ता कारक
को (चिड़िया को, चित्त को) → कर्म कारक
से (सोने से, मसनद के सहारे से) → करण कारक
के लिए (तुम्हारे लिए, निशान के लिए) → संप्रदान कारक
से (घर से बाहर, पंजे से) → अपादान कारक
का / के / की (गुलाब की डाली, सोने का घर) → संबंध कारक
में / पर (बगीचे में, डाली पर, महल में) → अधिकरण कारक
अरी / ओ (अरी चिड़िया, ओ माँ) → संबोधन कारक
6. परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: जैनेन्द्र कुमार को ‘हिन्दी का गोर्की’ किसने कहा था ?
उत्तर: महान कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने जैनेन्द्र कुमार की लेखन कला से प्रभावित होकर उन्हें ‘हिन्दी का गोर्की’ कहा था।
प्रश्न 2: जैनेन्द्र कुमार को किस उपन्यास पर ‘हिन्दुस्तानी अकादमी पुरस्कार’ प्राप्त हुआ था ?
उत्तर: जैनेन्द्र कुमार को उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘परख’ पर हिन्दुस्तानी अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
प्रश्न 3: सेठ माधवदास चिड़िया को क्यों बंदी बनाना चाहते थे ?
उत्तर: सेठ माधवदास अपने अकेलेपन और वीरान महल के सूनेपन को दूर करने तथा चिड़िया की चंचलता से अपना मनोरंजन करने के लिए उसे बंदी बनाना चाहते थे।
प्रश्न 4: नन्ही चिड़िया ने सेठ के प्रलोभनों का क्या उत्तर दिया ?
उत्तर: नन्ही चिड़िया ने कहा कि उसे सोने-चाँदी या महलों की कोई चाह नहीं है, वह केवल अपनी माँ के घोंसले की सुनहरी धूप, दाना और अपनी माँ का प्यार चाहती है।
प्रश्न 5: ‘चिड़िया की बच्ची’ कहानी से हमें क्या संदेश मिलता है ?
उत्तर: इस कहानी से हमें यह संदेश मिलता है कि स्वतंत्रता और पारिवारिक (मातृ) स्नेह किसी भी भौतिक वैभव, धन-दौलत और सोने के पिंजरे से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।