सड़क की बात
अभ्यासमाला : सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
1. एक शब्द में उत्तर दो :
(क) गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर किस आख्या से विभूषित हैं ?
उत्तर: विश्व-कवि (कविगुरु)।
(ख) रवींद्रनाथ ठाकुर जी के पिता का नाम क्या था ?
उत्तर: महर्षि देवेंद्रनाथ ठाकुर।
(ग) कौन-सा काव्य-ग्रंथ रवींद्रनाथ ठाकुर जी की कीर्ति का आधार-स्तंभ है ?
उत्तर: ‘गीतांजलि’ (जिसके लिए सन् १९१३ में उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला)।
(घ) सड़क किसकी आखिरी घड़ियों का इंतजार कर रही है ?
उत्तर: शाप की (शाप-मुक्ति की)।
(ङ) सड़क किसकी तरह सब कुछ महसूस कर सकती है ?
उत्तर: अंधे की तरह।
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) कवि-गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर: कवि-गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म कोलकाता के जोरासाँको में एक संपन्न एवं प्रतिष्ठित बंगाली परिवार में हुआ था।
(ख) गुरुदेव ने कब मोहनदास करमचंद गाँधी को ‘महात्मा’ के रूप में संबोधित किया था ?
उत्तर: जब मोहनदास करमचंद गाँधी शांतिनिकेतन पधारे थे, तब गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि से संबोधित किया था।
(ग) सड़क के पास किस कार्य के लिए फुर्सत नहीं है ?
उत्तर: सड़क के पास इतनी सी भी फुर्सत नहीं है कि वह अपने सिरहाने एक छोटा-सा नीले रंग का वनफूल खिला सके या करवट बदल सके।
(घ) सड़क ने अपनी निद्रावस्था की तुलना किससे की है ?
उत्तर: सड़क ने अपनी निद्रावस्था की तुलना चिरनिद्रा में पड़े अजगर से तथा अंधे व्यक्ति की मूक अवस्था से की है।
(ङ) सड़क अपनी कड़ी और सूखी सेज पर क्या नहीं डाल सकती ?
उत्तर: सड़क अपनी कड़ी और सूखी सेज पर एक भी कोमल हरी घास या दूब नहीं डाल सकती।
३. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग २५ शब्दों में) :
(क) रवींद्रनाथ ठाकुर जी की प्रतिभा का परिचय किन क्षेत्रों में मिलता है ?
उत्तर: रवींद्रनाथ ठाकुर जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे एक महान कवि, कथाकार, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार एवं दार्शनिक थे। उन्होंने ‘गीतांजलि’, ‘गोरा’, ‘काबुलीवाला’ जैसी अमर रचनाएँ दीं एवं ‘शांतिनिकेतन’ की स्थापना की।
(ख) शांतिनिकेतन के महत्त्व पर प्रकाश डालो।
उत्तर: शांतिनिकेतन गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के सपनों का मूर्त रूप है। यह प्रकृति के खुले वातावरण में शिक्षा एवं भारतीय कला-संस्कृति के विकास का विश्वप्रसिद्ध केंद्र है, जो आगे चलकर ‘विश्व-भारती विश्वविद्यालय’ बना।
(ग) सड़क शाप-मुक्ति की कामना क्यों कर रही है ?
उत्तर: सड़क शाप-मुक्ति की कामना इसलिए कर रही है ताकि वह करवट बदल सके, अपनी कठोर और सूखी सतह पर हरी-हरी कोमल घास बिछा सके एवं अपने सिरहाने सुंदर वनफूल खिलाकर प्रकृति के सुख का अनुभव कर सके।
(घ) सुख की घर-गृहस्थी वाले व्यक्ति के पैरों की आहट सुनकर सड़क क्या समझ जाती है ?
उत्तर: सड़क समझ जाती है कि वह व्यक्ति अपने प्रियजनों से मिलने और खुशियों से भरे अपने घर पहुँचने के लिए आतुर है। उसके कदमों में एक खास उमंग और स्नेह का खिंचाव होता है।
(ङ) गृहहीन व्यक्ति के पैरों की आहट सुनने पर सड़क को क्या बोध होता है ?
उत्तर: गृहहीन व्यक्ति के कदमों की आहट सुनकर सड़क को बोध होता है कि उसके कदमों में न कोई मंजिल है और न कोई आशा। वह केवल भटक रहा है एवं उसके कदमों से सड़क की सूखी धूल मानो और भी सूख जाती है।
(च) सड़क अपने ऊपर पड़े एक चरण-चिह्न को क्यों ज्यादा देर तक नहीं देख सकती ?
उत्तर: क्योंकि सड़क पर निरंतर लाखों नए-नए पाँव आते रहते हैं, जो पहले के पद-चिह्नों को कुचलकर धूल में मिटा देते हैं। कोई भी निशान वहाँ स्थायी रूप से टिक नहीं पाता।
(छ) बच्चों के कोमल पाँवों के स्पर्श से सड़क में कौन-से मनोभाव बनते हैं ?
उत्तर: बच्चों के कोमल पाँवों के स्पर्श से सड़क का कठोर हृदय ममता और वात्सल्य से भर उठता है। वह सोचती है कि काश वह उनके लिए फूलों की तरह कोमल बन पाती ताकि उनके नन्हे पैरों को कोई चुभन न हो।
(ज) किसलिए सड़क को न हँसी है, न रोना ?
उत्तर: सड़क सबके सुख-दुख, आशा-निराशा और आँसू-मुस्कान की केवल एक मूक और तटस्थ साक्षी है। वह किसी भी भावना को अपने ऊपर ठहरने नहीं देती एवं सबको आगे बढ़ा देती है, इसलिए उसे न हँसी है और न रोना।
(झ) राहगीरों के पाँवों के शब्दों को याद रखने के संदर्भ में सड़क ने क्या कहा है ?
उत्तर: सड़क कहती है कि उसके ऊपर से अनगिनत पाँव गुजरते हैं और समय के साथ हमेशा के लिए शांत हो जाते हैं। उन सबको याद रखना असंभव है; उसे कभी-कभी केवल उन पाँवों की करुण नूपुर-ध्वनि याद आती है।
४. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग ৫০ शब्दों में) :
(क) जड़ निद्रा में पड़ी सड़क लाखों चरणों के स्पर्श से उनके बारे में क्या-क्या समझ जाती है ?
उत्तर: सड़क अंधे की तरह केवल पैरों की आहट और स्पर्श से हर राहगीर के अंतर्मन को पढ़ लेती है। वह जान जाती है कि कौन सुखी घर लौट रहा है, कौन परदेस जा रहा है, कौन काम की चिंता में है एवं कौन बेघर होकर निराशा में भटक रहा है।
(ख) सड़क संसार की कोई भी कहानी पूरी क्यों नहीं सुन पाती ?
उत्तर: सड़क पर चलने वाले लोग अपनी बातें, गीत और कहानियाँ अधूरी छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। जब तक सड़क किसी की कहानी समझने की कोशिश करती है, तब तक दूसरे पाँव आकर पुरानी बातों को धूल में उड़ा देते हैं। इसलिए जीवन की कोई भी कहानी पूरी नहीं हो पाती।
(ग) “मैं किसी का भी लक्ष्य नहीं हूँ। सबका उपाय मात्र हूँ।”— सड़क ने ऐसा क्यों कहा है ?
उत्तर: सड़क का आशय यह है कि वह किसी की अंतिम मंजिल (गंतव्य) नहीं है, बल्कि मंजिल तक पहुँचने का एक साधन (माध्यम) मात्र है। लोग अपने गंतव्य तक पहुँचते ही सड़क को छोड़ देते हैं और कोई भी उस पर ठहरना नहीं चाहता।
(घ) सड़क कब और कैसे घर का आनंद कभी-कभी महसूस करती है ?
उत्तर: जब छोटे-छोटे अबोध बच्चे सड़क पर खेलने आते हैं, धूल के घरौंदे बनाते हैं और खिलखिलाते हैं, तब सड़क को अपने भीतर घर के वात्सल्य और अपनत्व का सुखद अनुभव होता है।
(ङ) सड़क अपने ऊपर से नियमित रूप से चलने वालों की प्रतीक्षा क्यों करती है ?
उत्तर: जो लोग प्रतिदिन नियमित रूप से सड़क से गुजरते हैं, उनके कदमों की ध्वनि से सड़क का गहरा आत्मीय संबंध बन जाता है। वह उत्सुकता से प्रतीक्षा करती है कि कब वे परिचित पाँव आएँगे और उसकी नीरसता को दूर करेंगे।
भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान
१. विलोम (विपरीतार्थक) शब्द तालिका :
शब्द | विलोम | शब्द | विलोम |
|---|---|---|---|
मृत्यु | जीवन | आरंभ | अंत |
शाप | वरदान | जड़ | चेतन |
अमीर | गरीब | कृतज्ञ | कृतघ्न |
छाया | धूप | निर्मल | मलिन |
आशा | निराशा | सूक्ष्म | स्थूल |
२. संधि-विच्छेद :
शब्द | संधि-विच्छेद | शब्द | संधि-विच्छेद |
|---|---|---|---|
देहावसान | देह + अवसान | संसार | सम् + सार |
रवींद्र | रवि + इंद्र | मनोरथ | मनः + रथ |
सूर्योदय | सूर्य + उदय | आशीर्वाद | आशीः + वाद |
सदैव | सदा + एव | दुस्साहस | दुश् + साहस |
अत्यधिक | अति + अधिक | नीरस | निः + रस |
जगन्नाथ | जगत् + नाथ | उज्ज्वल | उत् + ज्वल |
उच्चारण | उत् + चारण |