छोटा जादूगर

■ पाठ का सार एवं संदेश (Summary & Core Message)

  • कहानीकार: छायावाद के प्रमुख स्तंभ बाबू जयशंकर प्रसाद (১৮৮৯-১৯৩৭)।

  • मूल विषय: एक अभावग्रस्त बालक (छोटा जादूगर) का अद्भुत स्वाभिमान, साहस, देश-प्रेम और मातृ-भक्ति।

  • कहानी का सार: बालक के पिता देश की स्वतंत्रता के लिए जेल में हैं और माँ गंभीर रूप से बीमार है। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी वह भीख न माँगकर अपनी कला और खेल के बल पर स्वाभिमान के साथ अपनी बीमार माँ के लिए दवा-पथ्य का प्रबंध करता है।

  • मूल संदेश: यह कहानी हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी स्वावलंबी बनने, अपने स्वाभिमान की रक्षा करने और पारिवारिक व राष्ट्रीय कर्तव्यों को निष्ठापूर्वक निभाने की प्रेरणा देती है।

अभ्यासमाला : सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

১. सही विकल्प का चयन करो :

(क) बाबू जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ था—
(अ) काशी में
(आ) इलाहाबाद में
(इ) पटना में
(ई) जयपुर में
उत्तर: (अ) काशी में

(ख) जयशंकर प्रसाद जी का साहित्यिक जीवन किस नाम से आरंभ हुआ था ?
(अ) ‘विद्याधर’ नाम से
(आ) ‘कलाधर’ नाम से
(इ) ‘ज्ञानधर’ नाम से
(ई) ‘करुणाधर’ नाम से
उत्तर: (आ) ‘कलाधर’ नाम से

(ग) प्रसाद जी का देहावसान हुआ—
(अ) 1935 ई. में
(आ) 1936 ई. में
(इ) 1937 ई. में
(ई) 1938 ई. में
उत्तर: (इ) 1937 ई. में

(ঘ) कार्निवाल के मैदान में लड़का चुपचाप किनको देख रहा था ?
(अ) चाय पीने वालों को
(आ) मिठाई खाने वालों को
(इ) गाने वालों को
(ई) शरबत पीने वालों को
उत्तर: (ई) शरबत पीने वालों को

(ङ) लड़के को जादूगर का कौन-सा खेल अच्छा मालूम हुआ ?
(अ) खिलौने पर निशाना लगाना
(आ) चूड़ी फेंकना
(इ) तीर से नम्बर छेदना
(ई) ताश का खेल दिखाना
उत्तर: (अ) खिलौने पर निशाना लगाना

२. पूर्ण वाक्य में उत्तर do:

(क) जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम क्या है?
उत्तर: जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम ‘ग्राम’ है।

(ख) प्रसाद जी द्वारा विरचित महाकाव्य का नाम बताओ।
उत्तर: प्रसाद जी द्वारा विरचित सुप्रसिद्ध महाकाव्य का नाम ‘कामायनी’ है।

(গ) लड़का जादूगर को क्या समझता था?
उत्तर: लड़का जादूगर को बिल्कुल निकम्मा समझता था এবং उसका मानना था कि उससे अच्छा ताश का खेल वह स्वयं दिखा सकता है।

(ঘ) लड़का तमाशा देखने परदे में क्यों नहीं गया था?
उत्तर: लड़का तमाशा देखने परदे के भीतर इसलिए नहीं गया था क्योंकि वहाँ जाने के लिए टिकट लगता था और उसके पास पैसे नहीं थे।

(ङ) श्रीमान ने कितने टिकट खरीद कर लड़के को दिए थे?
उत्तर: श्रीमान ने बारह (१२) टिकट खरीदकर लड़के को दिए थे।

(च) लड़के ने हिंडोले से अपना परिचय किस प्रकार दिया था?
उत्तर: लड़के ने हिंडोले (झूले) के ऊपर से पुकारते हुए अपना परिचय “छोटा जादूगर” कहकर दिया था।

(छ) बालक (छोटे जादूगर) को किसने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था?
उत्तर: बालक (छोटे जादूगर) को उसकी आवश्यकता (घर की गरीबी और परिस्थिति) ने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था।

(ज) श्रीमान कलकत्ते में किस अवसर पर की छुट्टी बिता रहे थे?
उत्तर: श्रीमान कलकत्ते में ‘बड़े दिन’ (क्रिसमस) के अवसर की छुट्टी बिता रहे थे।

(झ) सड़क के किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर खेल दिखाते समय छोटे जादूगर की वाणी में स्वभावसुलभ प्रसन्नता की तरी क्यों नहीं थी?
उत्तर: क्योंकि उसकी माँ की हालत बहुत नाजुक थी और माँ ने उसे कहा था कि उसका अंतिम समय समीप है, इसलिए वह मानसिक रूप से अत्यंत दुखी और व्यग्र था।

(ञ) मृत्यु से ठीक पहले छोटे जादूगर की माँ के मुँह से कौन-सा अधूरा शब्द निकला था?
उत्तर: मृत्यु से ठीक पहले छोटे जादूगर की माँ के मुँह से “बे…” (बेटा) अधूरा शब्द निकला था।

३. अति संक्षिप्त उत्तर (लगभग ২৫ शब्द):

(क) बाबू जयशंकर प्रसाद की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय किन क्षेत्रों में मिलता है?
उत्तर: बाबू जयशंकर प्रसाद की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंध जैसे विभिन्न साहित्यिक विधाओं में मिलता है। वे छायावाद के प्रमुख स्तंभ और एक दार्शनिक रचनाकार थे।

(ख) श्रीमान ने छोटे जादूगर को पहली भेंट के दौरान किस रूप में देखा था?
उत्तर: पहली भेंट में लेखक ने उसे कार्निवल के मैदान में शरबत पीने वालों को चुपचाप देखते हुए देखा। उसके गले में फटे कुर्ते पर सूत की रस्सी और जेब में ताश के पत्ते थे।

(ग) “वहाँ जाकर क्या कीजिएगा?” छोटे जादूगर ने ऐसा कब कहा था?
उत्तर: जब लेखक ने छोटे जादूगर को उस परदे के अंदर ले जाने की बात कही जहाँ जादू का खेल देखने के लिए टिकट लगता था, तब उसने लेखक से यह बात कही थी।

(ঘ) निशानेबाज के रूप में छोटे जादूगर की कार्य-कुशलता का वर्णन करो।
उत्तर: छोटा जादूगर एक अत्यंत कुशल निशानेबाज था। खेल के मैदान में लेखक द्वारा दिलाए गए बारह टिकटों से उसने बारह बार निशाना लगाया और उसका एक भी निशाना खाली नहीं गया।

(ङ) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान-श्रीमती को छोटा जादूगर किस रूप में मिला था?
उत्तर: वह कंधे पर खादी का झोला लटकाए, साफ जाँघिया और आधी बाँहों का कुरता पहने हुए मिला। उसने हाथ में ताश के पत्तों और खिलौनों के साथ खेल दिखाने का प्रस्ताव रखा।

(च) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान ने जब छोटे जादूगर को ‘लड़के !’ कहकर संबोधित किया, तो उत्तर में उसने क्या कहा?
उत्तर: उसने गर्व से कहा कि उसे ‘छोटा जादूगर’ कहा जाए, क्योंकि यही उसका नाम है और इसी नाम से उसकी आजीविका चलती है।

(छ) “आज तुम्हारा खेल जमा क्यों नहीं ?”— इस प्रश्न के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या कहा?
उत्तर: उसने कातर भाव से उत्तर दिया कि उसकी माँ ने उसे तुरंत घर आने को कहा है क्योंकि उनका अंतिम समय (घड़ी) समीप है।

४. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग ৫০ शब्दों में) :

(क) प्रसाद जी की कहानियों की विशेषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर: जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, त्याग और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत होती हैं। उनकी कहानियों में चरित्रों का आंतरिक द्वंद्व और मनोवैज्ञानिक चित्रण प्रमुखता से मिलता है। वे तत्सम प्रधान, परिमार्जित और काव्यात्मक भाषा का प्रयोग करते हैं। उनकी कहानियाँ जीवन-संघर्ष और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती हैं।

(খ) “क्यों जी, तुमने इसमें क्या देखा?” इस प्रश्न का उत्तर छोटे जादूगर ने किस प्रकार दिया था?
उत्तर: लेखक के इस प्रश्न पर छोटे जादूगर ने बड़ी प्रगल्भता और आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया। उसने कहा कि उसने वहाँ सब कुछ देखा है— चूड़ी फेंकना, खिलौनों पर निशाना लगाना और तीर से नंबर छेदना। उसने यह भी कहा कि उसे खिलौनों पर निशाना लगाना सबसे अच्छा लगा এবং वहाँ का जादूगर उसे निकम्मा लगा, क्योंकि उससे बेहतर खेल वह स्वयं दिखा सकता है।

(ग) अपने माँ-बाप से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या-क्या कहा था?
उत्तर: जब लेखक ने उसके परिवार के बारे में पूछा, तो बालक ने गर्व से बताया कि उसके बाबूजी देश के लिए जेल में हैं। माँ के बारे में उसने बताया कि वह बीमार है। उसने स्पष्ट किया कि वह यहाँ तमाशा देखने नहीं, बल्कि दिखाने आया है ताकि पैसे कमाकर अपनी बीमार माँ के लिए दवा-भोजन का प्रबंध कर सके।

(घ) श्रीमान ने तेरह-चौदह वर्ष के छोटे जादूगर को किसलिए आश्चर्य से देखा था?
उत्तर: लेखक ने उस तेरह-चौदह वर्ष के बालक को आश्चर्य से इसलिए देखा क्योंकि इतनी कम उम्र में भी उसमें अद्भुत आत्मविश्वास, स्वाभिमान और कर्तव्य की भावना थी। जब बालक ने कहा कि वह शरबत पीने के बजाय खेल दिखाकर पैसे कमाना चाहेगा ताकि माँ की सेवा कर सके, तो उसकी यह परिपक्व बात सुनकर लेखक दंग रह गए।

(ङ) श्रीमती के आग्रह पर छोटे जादूगर ने किस प्रकार अपना खेल दिखाया?
उत्तर: श्रीमती की वाणी में माँ जैसी मिठास पाकर छोटे जादूगर ने उत्साह से खेल शुरू किया। उसने खिलौनों के माध्यम से भालू का मनाना, बिल्ली का रूठना और गुड्डा-गुड़िया के ब्याह का सजीव अभिनय दिखाया। ताश के पत्तों का रंग बदलना और सूत की डोरी को जोड़कर दिखाना उसकी कलाकारी का प्रमुख हिस्सा था।

(च) हवड़ा की ओर आते समय छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की भेंट किस प्रकार हुई थी?
उत्तर: जब लेखक अपनी मोटर से हवड़ा की ओर जा रहे थे, तब सड़क किनारे एक झोंपड़ी के पास छोटा जादूगर कंधे पर कम्बल डाले खड़ा दिखाई दिया। लेखक के पूछने पर उसने बताया कि उसकी माँ वहीं है और अस्पताल वालों ने उसे निकाल दिया है। झोंपड़ी के भीतर लेखक ने उसकी माँ को चिथड़ों में लिपटी काँपते हुए देखा।

(छ) सड़क के किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर छोटा जादूगर किस मनःस्थिति में और किस प्रकार खेल दिखा रहा था?
उत्तर: छोटा जादूगर अत्यंत व्यग्र और दुखी मनःस्थिति में था क्योंकि उसकी माँ का अंतिम समय निकट था। उसकी वाणी में पुरानी प्रसन्नता नहीं थी। वह दूसरों को हँसाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन भीतर से उसका हृदय रो रहा था। वह केवल कर्तव्य और मजबूरी के कारण खेल दिखा रहा था।

(ज) छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की अंतिम भेंट का अपने शब्दों में वर्णन करो।
उत्तर: अंतिम भेंट अत्यंत कारुणिक थी। लेखक उसे अपनी मोटर में बैठाकर उसकी झोंपड़ी तक ले गए। वहाँ पहुँचते ही बालक ‘माँ-माँ’ पुकारते हुए भीतर घुसा। माँ के मुँह से केवल अधूरा शब्द ‘बे…’ निकला और उनके प्राण निकल गए। बालक अपनी मृत माँ से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगा। उस उज्ज्वल धूप में लेखक को सारा संसार जादू जैसा स्तब्ध प्रतीत हुआ।

५. सम्यक उत्तर दो (लगभग १०० शब्दों में) :

(क) बाबू जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक देन का उल्लेख करो।
उत्तर: बाबू जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिंदी साहित्य के ‘छायावाद’ युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनकी साहित्यिक देन अत्यंत विशाल और कालजयी है। उन्होंने काव्य, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंध जैसी विधाओं में उच्च कोटि की रचनाएँ की हैं। उनका महाकाव्य ‘कामायनी’ हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। नाटकों के क्षेत्र में उन्होंने ‘चंद्रगुप्त’, ‘स्कंदगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ लिखकर भारतीय इतिहास और संस्कृति को पुनर्जीवित किया। उनकी कहानियाँ मानवीय संवेदना, राष्ट्रीय चेतना और दार्शनिक विचारों से परिपूर्ण हैं। प्रसाद जी की भाषा परिमार्जित, तत्सम प्रधान और काव्यात्मक है, जिसने हिंदी गद्य को नई ऊँचाई प्रदान की।

(খ) छोटे जादूगर के मधुर व्यवहार एवं स्वाभिमान पर प्रकाश डालो।
उत्तर: ‘छोटा जादूगर’ कहानी का मुख्य पात्र एक बालक है, जिसका व्यवहार अत्यंत मधुर और हृदयस्पर्शी है। पहली भेंट में ही वह अपनी वाक्पटुता से लेखक को आकर्षित कर लेता है। श्रीमती जी के साथ उसका व्यवहार एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह विनम्र है। उसके चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उसका स्वाभिमान है। अत्यंत निर्धन होते हुए भी वह किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता और न ही भीख मांगता है। जब लेखक उसे शरबत पिलाना चाहते हैं, तो वह कहता है कि यदि उसे खेल दिखाने का मौका मिले तो अधिक खुशी होगी। वह अपनी मेहनत और कला से कमाकर स्वाभिमान के साथ जीना चाहता है।

(গ) छोटे जादूगर की चतुराई और कार्य-कुशलता का वर्णन करो।
उत्तर: छोटा जादूगर उम्र में छोटा होते हुए भी अत्यधिक चतुर এবং कार्य-कुशल है। कार्निवल के मैदान में वह आत्मविश्वास के साथ कहता है कि वह पेशेवर जादूगर से बेहतर ताश का खेल दिखा सकता है। उसकी निशानेबाजी की कुशलता तब सिद्ध होती है जब वह बारह टिकटों पर लगातार अचूक निशाना लगाकर बारह खिलौने जीत लेता है। वह केवल हाथ की सफाई ही नहीं जानता, बल्कि एक कुशल अभिनेता भी है। बिल्ली का रूठना, भालू का मनाना और गुड्डा-गुड़िया का ब्याह जैसे खेलों में वह दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करता है।

(ঘ) छोटे जादूगर के देश-प्रेम और मातृ-भक्ति का परिचय दो।
उत्तर: छोटे जादूगर के चरित्र में देश-प्रेम और मातृ-भक्ति का अनुपम संगम दिखाई देता है। उसके पिता देश की स्वतंत्रता के लिए जेल में बंद हैं, और बालक इस बात को बड़े गर्व के साथ बताता है। वहीं उसकी मातृ-भक्ति अद्वितीय है। अपनी बीमार माँ की दवा और भोजन के लिए वह दिन-रात मेहनत करता है। माँ के अंतिम समय की चेतावनी के बावजूद वह खेल दिखाने जाता है ताकि माँ के लिए कफ़न और भोजन का प्रबंध कर सके। माँ की मृत्यु पर उससे लिपटकर उसका रोना उसकी असीम मातृ-भक्ति को उजागर करता है।

(ङ) छोटे जादूगर की कहानी से तुम्हें कौन-सी प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: ‘छोटा जादूगर’ कहानी हमें विषम परिस्थितियों में धैर्य, साहस এবং स्वाभिमान के साथ जीने की प्रेरणा देती है। यह सिखाती है कि आयु कम होने पर भी मनुष्य अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभा सकता है। बालक का चरित्र हमें स्वावलंबन और श्रम का महत्व सिखाता है; वह भीख मांगने के बजाय अपनी कला से सम्मानपूर्वक आजीविका कमाता है। यह कहानी हमें विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने और माता-पिता के प्रति समर्पित रहने का संदेश देती है।

६. सप्रसंग व्याख्या करो :

(क) “मैं उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुआ। उसके अभाव में भी संपूर्णता थी।”

  • संदर्भ: प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आलोक (भाग-२)’ में संकलित बाबू जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी ‘छोटा जादूगर’ से ली गई है।

  • प्रसंग: यह अंश उस समय का है जब लेखक कार्निवल के मैदान में पहली बार उस छोटे बालक को देखते हैं।

  • व्याख्या: लेखक कहते हैं कि मेले की चकाचौंध के बीच उस बालक के चेहरे की गंभीरता और सादगी ने उन्हें आकर्षित कर लिया। बालक के पास भौतिक सुख-सुविधाओं का भारी अभाव था—फटे कपड़े और गले में सूती रस्सी, फिर भी उसके व्यक्तित्व में एक अद्भुत संपूर्णता थी। यह संपूर्णता उसके आत्मविश्वास, स्वाभिमान এবং विषम परिस्थितियों से लड़ने के साहस से उपजी थी। वह अभावग्रस्त होकर भी दीन-हीन या लाचार नहीं था।

(ख) “श्रीमती की वाणी में वह माँ की सी मिठास थी, जिसके सामने किसी भी लड़के को रोका नहीं जा सकता।”

  • संदर्भ: प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आलोक (भाग-२)’ में संकलित जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी ‘छोटा जादूगर’ से ली गई है।

  • प्रसंग: यह अंश तब का है जब बोटानिकल उद्यान में लेखक की पत्नी बालक को खेल दिखाने के लिए स्नेहपूर्वक बुलाती हैं।

  • व्याख्या: लेखक यहाँ वात्सल्य और ममता की शक्ति का वर्णन कर रहे हैं। छोटा जादूगर, जो दुनिया के तिरस्कार का सामना कर रहा था, श्रीमती जी की वाणी में छिपी माँ जैसी ममता को पहचान लेता है। उस स्नेह भरे निमंत्रण में ऐसी आत्मीयता थी कि बालक बिना किसी संकोच के अपना खेल दिखाने को तैयार हो गया। यह सिद्ध करता है कि प्रेम और सम्मान से किसी का भी हृदय जीता जा सकता है।

भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान

१. सरल, मिश्र और संयुक्त वाक्यों को पहचानो :

(क) कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी।
उत्तर: सरल वाक्य (एक ही मुख्य क्रिया है)

(ख) माँजी बीमार है, इसलिए मैं नहीं गया।
उत्तर: संयुक्त वाक्य (‘इसलिए’ अव्यय से दो स्वतंत्र उपवाक्य जुड़े हैं)

(ग) मैं घूमकर पान की दुकान पर आ गया।
उत्तर: सरल वाक्य

(घ) माँ ने कहा है कि आज तुरंत चले आना।
उत्तर: मिश्र वाक्य (‘कि’ योजक से आश्रित उपवाक्य जुड़ा है)

(ङ) मैं भी पीछे था, किंतु स्त्री के मुँह से ‘बे…’ निकलकर रह गया।
उत्तर: संयुक्त वाक्य (‘किंतु’ संयोजक से जुड़े दो उपवाक्य हैं)

२. अर्थ लिखकर निम्नांकित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो :

  • नौ दो ग्यारह होना: (भाग जाना) — पुलिस को आते देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गया।

  • आँखें बदल जाना: (व्यवहार में परिवर्तन आना) — गरीबी आते ही कई मित्रों की आँखें बदल जाती हैं।

  • घड़ी समीप होना: (मृत्यु का समय निकट होना) — बीमार माँ की घड़ी समीप जानकर छोटा जादूगर व्यग्र था।

  • दंग रह जाना: (आश्चर्यचकित होना) — बालक का अचूक निशाना देखकर सभी लोग दंग रह गए।

  • श्रीगणेश होना: (शुरुआत/आरंभ होना) — आज हमने अपनी नई दुकान का श्रीगणेश किया है।

  • अपने पाँवों पर खड़ा होना: (स्वावलंबी बनना) — छोटा जादूगर अपनी मेहनत से अपने पाँवों पर खड़ा होना चाहता था।

  • अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना: (स्वयं अपना नुकसान करना) — पढ़ाई छोड़कर बुरी संगति में पड़ना अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना है।

३. निम्नलिखित शब्दों के लिंग परिवर्तन करो :

  • रस्सी → रस्सा

  • जादूगरनी → जादूगर

  • श्रीमती → श्रीमान

  • गुड़िया → गुड्डा

  • वधू → वर

  • स्त्री → पुरुष

  • नायिका → नायक

  • मालिन → माली

४. निम्नांकित शब्दों के लिंग निर्धारित करो :

  • रुकावट → स्त्रीलिंग (उदा. काम में रुकावट आई)

  • हँसी → स्त्रीलिंग (उदा. उसकी हँसी मधुर थी)

  • शरबत → पुल्लिंग (उदा. शरबत मीठा है)

  • वाणी → स्त्रीलिंग (उदा. माँ की वाणी में मिठास थी)

  • भीड़ → स्त्रीलिंग (उदा. मेले में भारी भीड़ थी)

  • तिरस्कार → पुल्लिंग (उदा. किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए)

  • निशाना → पुल्लिंग (उदा. उसका निशाना अचूक था)

  • झील → स्त्रीलिंग (उदा. यह एक सुंदर झील है)

५. निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तन करो :

  • खिलौना → खिलौने

  • आँख → आँखें

  • दुकान → दुकानें

  • छात्रा → छात्राएँ

  • बिल्ली → बिल्लियाँ

  • साधु → साधु (अपरिवर्तित रहता है / साधुओं)

  • कहानी → कहानियाँ

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